अन-निसा · 49/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
أَلَمْ تَرَ إِلَى الَّذِينَ يُزَكُّونَ أَنفُسَهُم ۚ بَلِ اللَّهُ يُزَكِّي مَن يَشَاءُ وَلَا يُظْلَمُونَ فَتِيلًا ۝٤٩
Alam tara ilal lazeena yuzakkoona anfusahum; balil laahu yuzakkee mai yashaaa`u wa laa yuzlamoona fateelaa
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) क्या तुमने उन लोगों के हाल पर नज़र नहीं की जो आप बड़े मुक़द्दस बनते हैं (मगर उससे क्या होता है) बल्कि ख़ुदा जिसे चाहता है मुक़द्दस बनाता है और ज़ुल्म तो किसी पर धागे के बराबर हो ही गा नहीं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يُزَكُّونَ أَنفُسَهُمْ: अपने आपको पाक-साफ़ कहते हैं, अपनी प्रशंसा करते हैं और अपने कर्मों को अच्छा बताते हैं।
  • فَتِيلًا: खजूर की गुठली के खांचे में लगा हुआ बारीक धागा, जो अत्यंत तुच्छ और मामूली चीज़ के लिए उदाहरण के रूप में प्रयोग होता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! क्या आपने उन लोगों पर ध्यान नहीं दिया जो स्वयं अपनी प्रशंसा करते हैं और अपने आपको पवित्र और नेक ठहराते हैं? यह उनका अहंकार और आत्म-मुग्धता है, क्योंकि वास्तविक पवित्रता और प्रशंसा केवल अल्लाह के हाथ में है। अल्लाह ही है जो अपने बंदों में से जिसे चाहता है, अपने ज्ञान और न्याय के आधार पर पवित्र और सम्मानित करता है, क्योंकि वही हर दिल के भेद और हर कर्म की सच्चाई को जानता है। कोई व्यक्ति अपने आपको पवित्र कहकर अल्लाह के यहाँ अपना दर्जा नहीं बढ़ा सकता। साथ ही, अल्लाह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता; चाहे उनके अच्छे कर्म कितने ही कम क्यों न हों, उन्हें उनका पूरा बदला दिया जाएगा, यहाँ तक कि खजूर की गुठली के खांचे में लगे बारीक धागे के बराबर भी उन्हें कमी नहीं दी जाएगी।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि अपनी प्रशंसा करना और अपने आपको बड़ा या पवित्र समझना इस्लाम में पसंदीदा नहीं है। इंसान को चाहिए कि वह विनम्रता अपनाए और अपने कर्मों को अल्लाह पर छोड़ दे।
  2. सच्ची पवित्रता और सम्मान अल्लाह की ओर से मिलता है, जो उसे अपने बंदों को उनकी नीयत और अमल के अनुसार प्रदान करता है। इसलिए हमें अपनी स्थिति को बेहतर बनाने के लिए अल्लाह से ही दुआ करनी चाहिए।
  3. अल्लाह का न्याय पूर्ण है; वह किसी के साथ ज़ुल्म नहीं करता। यह बात हमें आश्वस्त करती है कि हमारा हर अच्छा काम, चाहे वह कितना ही छोटा क्यों न हो, अल्लाह के यहाँ अमूल्य है और उसका बदला ज़रूर मिलेगा। यह हमें अच्छे कर्म करने की प्रेरणा देती है।
  4. आत्म-प्रशंसा से बचना चाहिए, क्योंकि यह अहंकार और घमंड की ओर ले जाती है, जबकि इस्लाम में नम्रता और अल्लाह के आगे झुकना सबसे बड़ा गुण है।


📜 आयत 47-51 — अन-निसा

47يَا أَيُّهَا الَّذِينَ أُوتُوا الْكِتَابَ آمِنُوا بِمَا نَزَّلْنَا مُصَدِّقًا لِّمَا مَعَكُم مِّن قَبْلِ أَن نَّطْمِسَ وُجُوهًا فَنَرُدَّهَا عَلَىٰ أَدْبَارِهَا أَوْ نَلْعَنَهُمْ كَمَا لَعَنَّا أَصْحَابَ السَّبْتِ ۚ وَكَانَ أَمْرُ اللَّهِ مَفْعُولًا
पस उनमें से चन्द लोगों के सिवा और लोग ईमान ही न लाएंगे ऐ अहले किताब जो (किताब) हमने नाज़िल की है और उस (किताब) की भी तस्दीक़ करती है जो तुम्हारे पास है उस पर ईमान लाओ मगर क़ब्ल इसके कि हम कुछ लोगों के चेहरे बिगाड़कर उनके पुश्त की तरफ़ फेर दें या जिस तरह हमने असहाबे सबत (हफ्ते वालों) पर फिटकार बरसायी वैसी ही फिटकार उनपर भी करें
48إِنَّ اللَّهَ لَا يَغْفِرُ أَن يُشْرَكَ بِهِ وَيَغْفِرُ مَا دُونَ ذَٰلِكَ لِمَن يَشَاءُ ۚ وَمَن يُشْرِكْ بِاللَّهِ فَقَدِ افْتَرَىٰ إِثْمًا عَظِيمًا
और ख़ुदा का हुक्म किया कराया हुआ काम समझो ख़ुदा उस जुर्म को तो अलबत्ता नहीं माफ़ करता कि उसके साथ शिर्क किया जाए हॉ उसके सिवा जो गुनाह हो जिसको चाहे माफ़ कर दे और जिसने (किसी को) ख़ुदा का शरीक बनाया तो उसने बड़े गुनाह का तूफान बॉधा
49أَلَمْ تَرَ إِلَى الَّذِينَ يُزَكُّونَ أَنفُسَهُم ۚ بَلِ اللَّهُ يُزَكِّي مَن يَشَاءُ وَلَا يُظْلَمُونَ فَتِيلًا
(ऐ रसूल) क्या तुमने उन लोगों के हाल पर नज़र नहीं की जो आप बड़े मुक़द्दस बनते हैं (मगर उससे क्या होता है) बल्कि ख़ुदा जिसे चाहता है मुक़द्दस बनाता है और ज़ुल्म तो किसी पर धागे के बराबर हो ही गा नहीं
50انظُرْ كَيْفَ يَفْتَرُونَ عَلَى اللَّهِ الْكَذِبَ ۖ وَكَفَىٰ بِهِ إِثْمًا مُّبِينًا
(ऐ रसूल) ज़रा देखो तो ये लोग ख़ुदा पर कैसे कैसे झूठ तूफ़ान जोड़ते हैं और खुल्लम खुल्ला गुनाह के वास्ते तो यही काफ़ी है
51أَلَمْ تَرَ إِلَى الَّذِينَ أُوتُوا نَصِيبًا مِّنَ الْكِتَابِ يُؤْمِنُونَ بِالْجِبْتِ وَالطَّاغُوتِ وَيَقُولُونَ لِلَّذِينَ كَفَرُوا هَٰؤُلَاءِ أَهْدَىٰ مِنَ الَّذِينَ آمَنُوا سَبِيلًا
(ऐ रसूल) क्या तुमने उन लोगों के (हाल पर) नज़र नहीं की जिन्हें किताबे ख़ुदा का कुछ हिस्सा दिया गया था और (फिर) शैतान और बुतों का कलमा पढ़ने लगे और जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया है उनकी निस्बत कहने लगे कि ये तो ईमान लाने वालों से ज्यादा राहे रास्त पर हैं
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अनुवाद — अन-निसा 49

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Tuesday, August 18, 2026

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