Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يُزَكُّونَ أَنفُسَهُمْ: अपने आपको पाक-साफ़ कहते हैं, अपनी प्रशंसा करते हैं और अपने कर्मों को अच्छा बताते हैं।
- فَتِيلًا: खजूर की गुठली के खांचे में लगा हुआ बारीक धागा, जो अत्यंत तुच्छ और मामूली चीज़ के लिए उदाहरण के रूप में प्रयोग होता है।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! क्या आपने उन लोगों पर ध्यान नहीं दिया जो स्वयं अपनी प्रशंसा करते हैं और अपने आपको पवित्र और नेक ठहराते हैं? यह उनका अहंकार और आत्म-मुग्धता है, क्योंकि वास्तविक पवित्रता और प्रशंसा केवल अल्लाह के हाथ में है। अल्लाह ही है जो अपने बंदों में से जिसे चाहता है, अपने ज्ञान और न्याय के आधार पर पवित्र और सम्मानित करता है, क्योंकि वही हर दिल के भेद और हर कर्म की सच्चाई को जानता है। कोई व्यक्ति अपने आपको पवित्र कहकर अल्लाह के यहाँ अपना दर्जा नहीं बढ़ा सकता। साथ ही, अल्लाह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता; चाहे उनके अच्छे कर्म कितने ही कम क्यों न हों, उन्हें उनका पूरा बदला दिया जाएगा, यहाँ तक कि खजूर की गुठली के खांचे में लगे बारीक धागे के बराबर भी उन्हें कमी नहीं दी जाएगी।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- यह आयत हमें सिखाती है कि अपनी प्रशंसा करना और अपने आपको बड़ा या पवित्र समझना इस्लाम में पसंदीदा नहीं है। इंसान को चाहिए कि वह विनम्रता अपनाए और अपने कर्मों को अल्लाह पर छोड़ दे।
- सच्ची पवित्रता और सम्मान अल्लाह की ओर से मिलता है, जो उसे अपने बंदों को उनकी नीयत और अमल के अनुसार प्रदान करता है। इसलिए हमें अपनी स्थिति को बेहतर बनाने के लिए अल्लाह से ही दुआ करनी चाहिए।
- अल्लाह का न्याय पूर्ण है; वह किसी के साथ ज़ुल्म नहीं करता। यह बात हमें आश्वस्त करती है कि हमारा हर अच्छा काम, चाहे वह कितना ही छोटा क्यों न हो, अल्लाह के यहाँ अमूल्य है और उसका बदला ज़रूर मिलेगा। यह हमें अच्छे कर्म करने की प्रेरणा देती है।
- आत्म-प्रशंसा से बचना चाहिए, क्योंकि यह अहंकार और घमंड की ओर ले जाती है, जबकि इस्लाम में नम्रता और अल्लाह के आगे झुकना सबसे बड़ा गुण है।
📜 आयत 47-51 — सूरा अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 49
सूरा अन-निसा आयत 49 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) क्या तुमने उन लोगों के हाल पर नज़र…सूरा आयत 49/176 — सूरा अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-निसा सुनें, सूरा अन-निसा अनुवाद, सूरा अन-निसा mp3, सूरा अन-निसा pdf. आयत 47–51. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


