ग़ाफिर · 19/85
अनुवाद उच्चारण — सूरा ग़ाफिर
يَعْلَمُ خَائِنَةَ الْأَعْيُنِ وَمَا تُخْفِي الصُّدُورُ ۝١٩
Ya`lamu khaaa`inatal a`yuni wa maa tukhfis sudoor
📖 हिंदी अर्थ
ख़ुदा तो ऑंखों की दुज़दीदा (ख़यानत की) निगाह को भी जानता है और उन बातों को भी जो (लोगों के) सीनों में पोशीदा है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • خَائِنَةَ الْأَعْيُنِ: आँखों की ख़यानत, यानी चोरी-छिपे की नज़रें, जो देखने की अनुमति न हो उसे छुपकर देखना।
  • مَا تُخْفِي الصُّدُورُ: वह सब कुछ जो सीने (दिल) छुपाते हैं, यानी वे भेद और बातें जो इंसान अपने दिल में छुपाए रखता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला उस ज़ात का नाम है जो हर चीज़ से बाख़बर है, और उसके इल्म से कोई चीज़ छुपी नहीं है। वह उन नज़रों को भी जानता है जो आँखें चुराकर डालती हैं — वह नज़रें जो इंसान शर्म या डर की वजह से खुलेआम नहीं डालता, बल्कि छुपकर, इशारे से या किनारे से देखता है। चाहे वह नज़र किसी औरत की तरफ हो या किसी और चीज़ की तरफ जिसे देखना जायज़ नहीं, अल्लाह उसे जानता है। इसी तरह, वह उन सारी बातों से भी वाक़िफ है जो इंसान के दिल में छुपी होती हैं — चाहे वह नेक इरादे हों या बुरे, चाहे वह ईमान हो या निफ़ाक़, चाहे वह ख़ैर की तमन्ना हो या शर की साज़िश। दिलों के राज़, सीनों के भेद, और ज़मीर की गहराइयों में छुपी हर बात अल्लाह के इल्म से बाहर नहीं है।

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह का इल्म हर चीज़ को घेरे हुए है — न सिर्फ़ ज़ाहिरी आमाल को, बल्कि उन छुपी हुई चीज़ों को भी जो इंसान दूसरों से छुपाता है। एक नज़र जो चोरी से डाली जाती है, वह भी अल्लाह के सामने रौशन है, और दिल में छुपा हुआ हर इरादा भी उसके इल्म में है। यह बात इंसान के लिए बड़ी नसीहत है कि वह हर वक़्त याद रखे कि उसका रब उसे देख रहा है और उसके दिल के राज़ भी जानता है। जब इंसान को यह यक़ीन हो जाए कि अल्लाह सब कुछ जानता है, तो वह गुनाह से बचता है, अपनी नज़रों को नीची रखता है, और अपने दिल को साफ़ रखने की कोशिश करता है।

यह आयत मोमिन के लिए एक प्यारी ख़बर भी है — कि अल्लाह उसकी छुपी हुई नेकियों को भी जानता है, उसकी छुपी हुई इबादतों को भी देखता है, और उसके दिल की सच्ची नीयतों को भी पहचानता है। जो इंसान अकेले में अल्लाह से डरता है और छुपकर नेकी करता है, अल्लाह उसे ज़रूर उसका अज्र देगा। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी नज़रों को हराम से बचाएँ, अपने दिलों को साफ़ रखें, और यह यक़ीन रखें कि हमारा रब हमारे हर अमल और हर इरादे से बाख़बर है। यही ईमान की निशानी है और यही तक़वा की बुनियाद है।



📜 आयत 17-21 — सूरा ग़ाफिर

17الْيَوْمَ تُجْزَىٰ كُلُّ نَفْسٍ بِمَا كَسَبَتْ ۚ لَا ظُلْمَ الْيَوْمَ ۚ إِنَّ اللَّهَ سَرِيعُ الْحِسَابِ
आज हर शख्स को उसके किए का बदला दिया जाएगा, आज किसी पर कुछ भी ज़ुल्म न किया जाएगा बेशक ख़ुदा बहुत जल्द हिसाब लेने वाला है
18وَأَنذِرْهُمْ يَوْمَ الْآزِفَةِ إِذِ الْقُلُوبُ لَدَى الْحَنَاجِرِ كَاظِمِينَ ۚ مَا لِلظَّالِمِينَ مِنْ حَمِيمٍ وَلَا شَفِيعٍ يُطَاعُ
(ऐ रसूल) तुम उन लोगों को उस दिन से डराओ जो अनक़रीब आने वाला है जब लोगों के कलेजे घुट घुट के (मारे डर के) मुँह को आ जाएंगें (उस वक्त) न तो सरकशों का कोई सच्चा दोस्त होगा और न कोई ऐसा सिफारिशी जिसकी बात मान ली जाए
19يَعْلَمُ خَائِنَةَ الْأَعْيُنِ وَمَا تُخْفِي الصُّدُورُ
ख़ुदा तो ऑंखों की दुज़दीदा (ख़यानत की) निगाह को भी जानता है और उन बातों को भी जो (लोगों के) सीनों में पोशीदा है
20وَاللَّهُ يَقْضِي بِالْحَقِّ ۖ وَالَّذِينَ يَدْعُونَ مِن دُونِهِ لَا يَقْضُونَ بِشَيْءٍ ۗ إِنَّ اللَّهَ هُوَ السَّمِيعُ الْبَصِيرُ
और ख़ुदा ठीक ठीक हुक्म देता है, और उसके सिवा जिनकी ये लोग इबादत करते हैं वह तो कुछ भी हुक्म नहीं दे सकते, इसमें शक नहीं कि ख़ुदा सुनने वाला देखने वाला है
21۞ أَوَلَمْ يَسِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَيَنظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الَّذِينَ كَانُوا مِن قَبْلِهِمْ ۚ كَانُوا هُمْ أَشَدَّ مِنْهُمْ قُوَّةً وَآثَارًا فِي الْأَرْضِ فَأَخَذَهُمُ اللَّهُ بِذُنُوبِهِمْ وَمَا كَانَ لَهُم مِّنَ اللَّهِ مِن وَاقٍ
क्या उन लोगों ने रूए ज़मीन पर चल फिर कर नहीं देखा कि जो लोग उनसे पहले थे उनका अन्जाम क्या हुआ (हालाँकि) वह लोग कुवत (शान और उम्र सब) में और ज़मीन पर अपनी निशानियाँ (यादगारें इमारतें) वग़ैरह छोड़ जाने में भी उनसे कहीं बढ़ चढ़ के थे तो ख़ुदा ने उनके गुनाहों की वजह से उनकी ले दे की, और ख़ुदा (के ग़ज़ब से) उनका कोई बचाने वाला भी न था
ग़ाफिरकुरान सूची
85आयत
मक्कीअवतरण स्थान
19आयत

अनुवाद — ग़ाफिर 19

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Monday, September 28, 2026

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