Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- خَائِنَةَ الْأَعْيُنِ: आँखों की ख़यानत, यानी चोरी-छिपे की नज़रें, जो देखने की अनुमति न हो उसे छुपकर देखना।
- مَا تُخْفِي الصُّدُورُ: वह सब कुछ जो सीने (दिल) छुपाते हैं, यानी वे भेद और बातें जो इंसान अपने दिल में छुपाए रखता है।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला उस ज़ात का नाम है जो हर चीज़ से बाख़बर है, और उसके इल्म से कोई चीज़ छुपी नहीं है। वह उन नज़रों को भी जानता है जो आँखें चुराकर डालती हैं — वह नज़रें जो इंसान शर्म या डर की वजह से खुलेआम नहीं डालता, बल्कि छुपकर, इशारे से या किनारे से देखता है। चाहे वह नज़र किसी औरत की तरफ हो या किसी और चीज़ की तरफ जिसे देखना जायज़ नहीं, अल्लाह उसे जानता है। इसी तरह, वह उन सारी बातों से भी वाक़िफ है जो इंसान के दिल में छुपी होती हैं — चाहे वह नेक इरादे हों या बुरे, चाहे वह ईमान हो या निफ़ाक़, चाहे वह ख़ैर की तमन्ना हो या शर की साज़िश। दिलों के राज़, सीनों के भेद, और ज़मीर की गहराइयों में छुपी हर बात अल्लाह के इल्म से बाहर नहीं है।
यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह का इल्म हर चीज़ को घेरे हुए है — न सिर्फ़ ज़ाहिरी आमाल को, बल्कि उन छुपी हुई चीज़ों को भी जो इंसान दूसरों से छुपाता है। एक नज़र जो चोरी से डाली जाती है, वह भी अल्लाह के सामने रौशन है, और दिल में छुपा हुआ हर इरादा भी उसके इल्म में है। यह बात इंसान के लिए बड़ी नसीहत है कि वह हर वक़्त याद रखे कि उसका रब उसे देख रहा है और उसके दिल के राज़ भी जानता है। जब इंसान को यह यक़ीन हो जाए कि अल्लाह सब कुछ जानता है, तो वह गुनाह से बचता है, अपनी नज़रों को नीची रखता है, और अपने दिल को साफ़ रखने की कोशिश करता है।
यह आयत मोमिन के लिए एक प्यारी ख़बर भी है — कि अल्लाह उसकी छुपी हुई नेकियों को भी जानता है, उसकी छुपी हुई इबादतों को भी देखता है, और उसके दिल की सच्ची नीयतों को भी पहचानता है। जो इंसान अकेले में अल्लाह से डरता है और छुपकर नेकी करता है, अल्लाह उसे ज़रूर उसका अज्र देगा। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी नज़रों को हराम से बचाएँ, अपने दिलों को साफ़ रखें, और यह यक़ीन रखें कि हमारा रब हमारे हर अमल और हर इरादे से बाख़बर है। यही ईमान की निशानी है और यही तक़वा की बुनियाद है।
📜 आयत 17-21 — सूरा ग़ाफिर
अनुवाद — ग़ाफिर 19
सूरा ग़ाफिर आयत 19 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ख़ुदा तो ऑंखों की दुज़दीदा (ख़यानत की) निगाह को भी…सूरा आयत 19/85 — सूरा ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा ग़ाफिर सुनें, सूरा ग़ाफिर अनुवाद, सूरा ग़ाफिर mp3, सूरा ग़ाफिर pdf. आयत 17–21. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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