Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الْآزِفَةِ (आज़िफ़ा): निकट आने वाली (यानी क़ियामत), इसे 'आज़िफ़ा' इसलिए कहा गया क्योंकि यह बहुत निकट है।
- لَدَى الْحَنَاجِرِ (लदल हनाजिर): गले के पास।
- كَاظِمِينَ (काज़िमीन): ग़म और दुख से भरे हुए, चुप और साँस रोके हुए।
- حَمِيمٍ (हमीम): करीबी रिश्तेदार या सच्चा मित्र।
- شَفِيعٍ (शफ़ी): सिफ़ारिश करने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप लोगों को उस दिन से डराएँ जो बहुत निकट आ चुका है — वह दिन जिसे लोग दूर समझते हैं, लेकिन अल्लाह के यहाँ वह बिल्कुल करीब है। वह दिन है क़ियामत का। उस दिन का हौल (भय) इतना सख्त होगा कि लोगों के दिल डर के मारे अपनी जगह से उखड़कर गले तक आ जाएँगे। उनके चेहरे पीले पड़ जाएँगे, साँसें अटक जाएँगी, और वे ग़म और अफ़सोस से भरे हुए चुप खड़े होंगे। कोई किसी से बात नहीं कर पाएगा, हर कोई अपने ही दुख में डूबा होगा।
उस दिन ज़ालिमों (अत्याचारियों) के लिए न कोई करीबी रिश्तेदार होगा जो उन्हें बचा सके, न कोई सच्चा दोस्त जो उनके काम आए, और न ही कोई ऐसा सिफ़ारिशी जिसकी सिफ़ारिश क़ुबूल हो। हालाँकि दुनिया में वे अक्सर अपने रिश्तेदारों और दोस्तों पर भरोसा करते थे, लेकिन उस दिन सारे रिश्ते टूट जाएँगे और हर इंसान सिर्फ़ अपने अच्छे या बुरे कर्मों के साथ अकेला खड़ा होगा।
नसीहत और दावत का पहलू:
यह आयत हमें बहुत बड़ी हक़ीक़त से आगाह करती है। अल्लाह तआला ने हमें दुनिया में भेजकर यूँ ही नहीं छोड़ दिया, बल्कि रसूल भेजकर आगाह किया है ताकि हम उस दिन की तैयारी कर लें। यह अल्लाह की बड़ी रहमत है कि उसने पहले से ख़बर दे दी। आज हमारे पास मौक़ा है कि अपने दिलों को साफ़ करें, अपने अमल को सुधारें, और अल्लाह की रहमत और मग़फ़िरत को अपना ज़रिया बनाएँ। क़ियामत का दिन जितना भयानक है, उतना ही अल्लाह का इनाम भी बड़ा है — जो लोग उस दिन के लिए तैयारी करेंगे, उनके चेहरे उस दिन रौशन होंगे और वे जन्नत की नेअमतों में होंगे। आइए, हम आज ही अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाएँ, ताकि उस दिन हम उन लोगों में से हों जिनके दिल सुकून से भरे होंगे, न कि डर और ग़म से।
📜 आयत 16-20 — सूरा ग़ाफिर
अनुवाद — ग़ाफिर 18
सूरा ग़ाफिर आयत 18 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम उन लोगों को उस दिन से डराओ…सूरा आयत 18/85 — सूरा ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा ग़ाफिर सुनें, सूरा ग़ाफिर अनुवाद, सूरा ग़ाफिर mp3, सूरा ग़ाफिर pdf. आयत 16–20. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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