ग़ाफिर · 18/85
अनुवाद उच्चारण — सूरा ग़ाफिर
وَأَنذِرْهُمْ يَوْمَ الْآزِفَةِ إِذِ الْقُلُوبُ لَدَى الْحَنَاجِرِ كَاظِمِينَ ۚ مَا لِلظَّالِمِينَ مِنْ حَمِيمٍ وَلَا شَفِيعٍ يُطَاعُ ۝١٨
Wa anzirhum yawmal aazifati izil quloobu ladal hanaajiri kaazimeen; maa lizzaalimeena min hameeminw wa laa shafee`iny-yutaa
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम उन लोगों को उस दिन से डराओ जो अनक़रीब आने वाला है जब लोगों के कलेजे घुट घुट के (मारे डर के) मुँह को आ जाएंगें (उस वक्त) न तो सरकशों का कोई सच्चा दोस्त होगा और न कोई ऐसा सिफारिशी जिसकी बात मान ली जाए

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْآزِفَةِ (आज़िफ़ा): निकट आने वाली (यानी क़ियामत), इसे 'आज़िफ़ा' इसलिए कहा गया क्योंकि यह बहुत निकट है।
  • لَدَى الْحَنَاجِرِ (लदल हनाजिर): गले के पास।
  • كَاظِمِينَ (काज़िमीन): ग़म और दुख से भरे हुए, चुप और साँस रोके हुए।
  • حَمِيمٍ (हमीम): करीबी रिश्तेदार या सच्चा मित्र।
  • شَفِيعٍ (शफ़ी): सिफ़ारिश करने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप लोगों को उस दिन से डराएँ जो बहुत निकट आ चुका है — वह दिन जिसे लोग दूर समझते हैं, लेकिन अल्लाह के यहाँ वह बिल्कुल करीब है। वह दिन है क़ियामत का। उस दिन का हौल (भय) इतना सख्त होगा कि लोगों के दिल डर के मारे अपनी जगह से उखड़कर गले तक आ जाएँगे। उनके चेहरे पीले पड़ जाएँगे, साँसें अटक जाएँगी, और वे ग़म और अफ़सोस से भरे हुए चुप खड़े होंगे। कोई किसी से बात नहीं कर पाएगा, हर कोई अपने ही दुख में डूबा होगा।

उस दिन ज़ालिमों (अत्याचारियों) के लिए न कोई करीबी रिश्तेदार होगा जो उन्हें बचा सके, न कोई सच्चा दोस्त जो उनके काम आए, और न ही कोई ऐसा सिफ़ारिशी जिसकी सिफ़ारिश क़ुबूल हो। हालाँकि दुनिया में वे अक्सर अपने रिश्तेदारों और दोस्तों पर भरोसा करते थे, लेकिन उस दिन सारे रिश्ते टूट जाएँगे और हर इंसान सिर्फ़ अपने अच्छे या बुरे कर्मों के साथ अकेला खड़ा होगा।

नसीहत और दावत का पहलू:

यह आयत हमें बहुत बड़ी हक़ीक़त से आगाह करती है। अल्लाह तआला ने हमें दुनिया में भेजकर यूँ ही नहीं छोड़ दिया, बल्कि रसूल भेजकर आगाह किया है ताकि हम उस दिन की तैयारी कर लें। यह अल्लाह की बड़ी रहमत है कि उसने पहले से ख़बर दे दी। आज हमारे पास मौक़ा है कि अपने दिलों को साफ़ करें, अपने अमल को सुधारें, और अल्लाह की रहमत और मग़फ़िरत को अपना ज़रिया बनाएँ। क़ियामत का दिन जितना भयानक है, उतना ही अल्लाह का इनाम भी बड़ा है — जो लोग उस दिन के लिए तैयारी करेंगे, उनके चेहरे उस दिन रौशन होंगे और वे जन्नत की नेअमतों में होंगे। आइए, हम आज ही अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाएँ, ताकि उस दिन हम उन लोगों में से हों जिनके दिल सुकून से भरे होंगे, न कि डर और ग़म से।



📜 आयत 16-20 — सूरा ग़ाफिर

16يَوْمَ هُم بَارِزُونَ ۖ لَا يَخْفَىٰ عَلَى اللَّهِ مِنْهُمْ شَيْءٌ ۚ لِّمَنِ الْمُلْكُ الْيَوْمَ ۖ لِلَّهِ الْوَاحِدِ الْقَهَّارِ
जिस दिन वह लोग (क़ब्रों) से निकल पड़ेंगे (और) उनको कोई चीज़ ख़ुदा से पोशीदा नहीं रहेगी (और निदा आएगी) आज किसकी बादशाहत है ( फिर ख़ुदा ख़़ुद कहेगा ) ख़ास ख़ुदा की जो अकेला (और) ग़ालिब है
17الْيَوْمَ تُجْزَىٰ كُلُّ نَفْسٍ بِمَا كَسَبَتْ ۚ لَا ظُلْمَ الْيَوْمَ ۚ إِنَّ اللَّهَ سَرِيعُ الْحِسَابِ
आज हर शख्स को उसके किए का बदला दिया जाएगा, आज किसी पर कुछ भी ज़ुल्म न किया जाएगा बेशक ख़ुदा बहुत जल्द हिसाब लेने वाला है
18وَأَنذِرْهُمْ يَوْمَ الْآزِفَةِ إِذِ الْقُلُوبُ لَدَى الْحَنَاجِرِ كَاظِمِينَ ۚ مَا لِلظَّالِمِينَ مِنْ حَمِيمٍ وَلَا شَفِيعٍ يُطَاعُ
(ऐ रसूल) तुम उन लोगों को उस दिन से डराओ जो अनक़रीब आने वाला है जब लोगों के कलेजे घुट घुट के (मारे डर के) मुँह को आ जाएंगें (उस वक्त) न तो सरकशों का कोई सच्चा दोस्त होगा और न कोई ऐसा सिफारिशी जिसकी बात मान ली जाए
19يَعْلَمُ خَائِنَةَ الْأَعْيُنِ وَمَا تُخْفِي الصُّدُورُ
ख़ुदा तो ऑंखों की दुज़दीदा (ख़यानत की) निगाह को भी जानता है और उन बातों को भी जो (लोगों के) सीनों में पोशीदा है
20وَاللَّهُ يَقْضِي بِالْحَقِّ ۖ وَالَّذِينَ يَدْعُونَ مِن دُونِهِ لَا يَقْضُونَ بِشَيْءٍ ۗ إِنَّ اللَّهَ هُوَ السَّمِيعُ الْبَصِيرُ
और ख़ुदा ठीक ठीक हुक्म देता है, और उसके सिवा जिनकी ये लोग इबादत करते हैं वह तो कुछ भी हुक्म नहीं दे सकते, इसमें शक नहीं कि ख़ुदा सुनने वाला देखने वाला है
ग़ाफिरकुरान सूची
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मक्कीअवतरण स्थान
18आयत

अनुवाद — ग़ाफिर 18

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Thursday, October 1, 2026

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