ग़ाफिर · 47/85
अनुवाद उच्चारण — सूरा ग़ाफिर
وَإِذْ يَتَحَاجُّونَ فِي النَّارِ فَيَقُولُ الضُّعَفَاءُ لِلَّذِينَ اسْتَكْبَرُوا إِنَّا كُنَّا لَكُمْ تَبَعًا فَهَلْ أَنتُم مُّغْنُونَ عَنَّا نَصِيبًا مِّنَ النَّارِ ۝٤٧
Wa iz yatahaaajjoona fin Naari fa-yaqoolud du`afaaa`u lillazeenas takbarooo innaa kunnaa lakum taba`an fahal antum mughnoona annaa naseebam minan Naar
📖 हिंदी अर्थ
और ये लोग जिस वक्त ज़हन्नुम में बाहम झगड़ेंगें तो कम हैसियत लोग बड़े आदमियों से कहेंगे कि हम तुम्हारे ताबे थे तो क्या तुम इस वक्त (दोज़ख़ की) आग का कुछ हिस्सा हमसे हटा सकते हो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَتَحَاجُّونَ: आपस में झगड़ना, बहस करना, एक-दूसरे पर दोषारोपण करना।
  • الضُّعَفَاءُ: कमज़ोर लोग, जो दुनिया में कमज़ोर और पद-दर्जे में नीचे थे।
  • اسْتَكْبَرُوا: अहंकार किया, बड़प्पन जताया, सिर उठाया।
  • تَبَعًا: अनुयायी, पीछे चलने वाले, आज्ञा मानने वाले।
  • مُغْنُونَ: बचाने वाले, दूर करने वाले, कुछ हिस्सा अपने ऊपर लेने वाले।
  • نَصِيبًا: हिस्सा, भाग।

विस्तृत तफ़सीर:

ऐ नबी! आप उस समय को याद करें जब जहन्नुम की आग में फंसे हुए लोग आपस में झगड़ेंगे और एक-दूसरे को कोसेंगे। उस भयानक दिन का दृश्य अत्यंत भयावह होगा—हर तरफ आग की लपटें, चीख-पुकार, और अफसोस का माहौल। तब कमज़ोर और पद-दर्जे में नीचे लोग, जो दुनिया में अपने बड़ों और सरदारों के पीछे चले थे, उन अहंकारी नेताओं की ओर मुखातिब होंगे और कहेंगे: "हम तो दुनिया में तुम्हारे अनुयायी थे, तुम्हारे कहने पर चलते थे, तुमने हमें गुमराह किया और हमने तुम्हारी बात मान ली। आज हम इस आग में जल रहे हैं, तो क्या तुम हमारी ओर से इस आग का कुछ हिस्सा अपने ऊपर ले सकते हो? क्या तुम हमें इस यातना से कुछ बचा सकते हो?"

यह वह समय होगा जब सारे रिश्ते-नाते, सारी दोस्तियाँ और सारी वफ़ादारियाँ टूट जाएँगी। न तो कोई किसी का सहारा बनेगा और न ही कोई किसी की मदद कर सकेगा। अहंकारी नेता भी उस दिन अपने अनुयायियों की कोई मदद नहीं कर पाएँगे, क्योंकि हर व्यक्ति अपने ही कर्मों में फंसा होगा।

यह दृश्य हमें सोचने पर मजबूर करता है कि आज हम जिन लोगों की बात मानते हैं, जिनके पीछे चलते हैं, क्या वे हमें क़ियामत के दिन किसी काम आ सकेंगे? क्या वे हमारी गलतियों का बोझ उठा सकेंगे? हरगिज़ नहीं! आज हमें अपने लिए ऐसे साथी चुनने हैं जो हमें अल्लाह की राह दिखाएँ, उसकी इबादत की तरफ बुलाएँ, और उसके दीन पर चलने में हमारी मदद करें।

यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अंधी पैरवी से बचना चाहिए। हमें खुद अक़्ल से काम लेना चाहिए, कुरआन और सुन्नत की रोशनी में अपने कदम उठाने चाहिए। जो लोग हमें अल्लाह की याद से दूर करें, हमें गुनाह की तरफ ले जाएँ, वे दुनिया में भले ही हमारे प्यारे लगें, लेकिन आख़िरत में वे हमारे दुश्मन होंगे।

अल्लाह तआला हमें सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे, और उस दिन के अज़ाब से बचाए, जब कोई किसी के काम न आएगा। आमीन।



📜 आयत 45-49 — सूरा ग़ाफिर

45فَوَقَاهُ اللَّهُ سَيِّئَاتِ مَا مَكَرُوا ۖ وَحَاقَ بِآلِ فِرْعَوْنَ سُوءُ الْعَذَابِ
तो ख़ुदा ने उसे उनकी तद्बीरों की बुराई से महफूज़ रखा और फिरऔनियों को बड़े अज़ाब ने ( हर तरफ ) से घेर लिया
46النَّارُ يُعْرَضُونَ عَلَيْهَا غُدُوًّا وَعَشِيًّا ۖ وَيَوْمَ تَقُومُ السَّاعَةُ أَدْخِلُوا آلَ فِرْعَوْنَ أَشَدَّ الْعَذَابِ
और अब तो कब्र में दोज़ख़ की आग है कि वह लोग (हर) सुबह व शाम उसके सामने ला खड़े किए जाते हैं और जिस दिन क़यामत बरपा होगी (हुक्म होगा) फिरऔन के लोगों को सख्त से सख्त अज़ाब में झोंक दो
47وَإِذْ يَتَحَاجُّونَ فِي النَّارِ فَيَقُولُ الضُّعَفَاءُ لِلَّذِينَ اسْتَكْبَرُوا إِنَّا كُنَّا لَكُمْ تَبَعًا فَهَلْ أَنتُم مُّغْنُونَ عَنَّا نَصِيبًا مِّنَ النَّارِ
और ये लोग जिस वक्त ज़हन्नुम में बाहम झगड़ेंगें तो कम हैसियत लोग बड़े आदमियों से कहेंगे कि हम तुम्हारे ताबे थे तो क्या तुम इस वक्त (दोज़ख़ की) आग का कुछ हिस्सा हमसे हटा सकते हो
48قَالَ الَّذِينَ اسْتَكْبَرُوا إِنَّا كُلٌّ فِيهَا إِنَّ اللَّهَ قَدْ حَكَمَ بَيْنَ الْعِبَادِ
तो बड़े लोग कहेंगें (अब तो) हम (तुम) सबके सब आग में पड़े हैं ख़ुदा (को) तो बन्दों के बारे में (जो कुछ) फैसला (करना था) कर चुका
49وَقَالَ الَّذِينَ فِي النَّارِ لِخَزَنَةِ جَهَنَّمَ ادْعُوا رَبَّكُمْ يُخَفِّفْ عَنَّا يَوْمًا مِّنَ الْعَذَابِ
और जो लोग आग में (जल रहे) होंगे जहन्नुम के दरोग़ाओं से दरख्वास्त करेंगे कि अपने परवरदिगार से अर्ज़ करो कि एक दिन तो हमारे अज़ाब में तख़फ़ीफ़ कर दें
ग़ाफिरकुरान सूची
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मक्कीअवतरण स्थान
47आयत

अनुवाद — ग़ाफिर 47

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Wednesday, September 30, 2026

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