Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- النَّارُ (आग): यहाँ अर्थ है जहन्नम की आग।
- يُعْرَضُونَ عَلَيْهَا (उन्हें उसके सामने पेश किया जाएगा): अर्थात उन्हें आग पर प्रस्तुत किया जाएगा, जैसे किसी को तलवार के सामने पेश किया जाए, यानी उन्हें आग में जलाया जाएगा।
- غُدُوًّا وَعَشِيًّا (सुबह और शाम): अर्थात दिन के आरंभ और अंत में।
- آلَ فِرْعَوْنَ (फ़िरऔन की संगत): फ़िरऔन के अनुयायी और उसकी क़ौम।
- أَشَدَّ الْعَذَابِ (सबसे सख्त अज़ाब): सबसे भयंकर और स्थायी यातना।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला फ़िरऔन और उसकी क़ौम के अंजाम को बयान कर रहे हैं। पहले उन्होंने दुनिया में समुद्र में डूबकर हलाक होने का अज़ाब चखा, और अब उनकी रूहें क़ब्र में भी अज़ाब में हैं। उन्हें क़ब्र में आग पर पेश किया जाता है — सुबह और शाम — यानी उन्हें लगातार आग की यातना दी जाती है। यह उनके लिए एक स्थायी स्थिति है जो क़यामत तक जारी रहेगी। फिर जब क़यामत का दिन आएगा, तो अल्लाह तआला फ़रिश्तों को हुक्म देगा: "फ़िरऔन की संगत को सबसे सख्त अज़ाब में डाल दो।" यानी उन्हें जहन्नम की सबसे भयंकर यातना में डाला जाएगा, जो कभी ख़त्म नहीं होगी।
यह आयत क़ब्र के अज़ाब का एक स्पष्ट प्रमाण है। यहाँ अल्लाह तआला बता रहे हैं कि मरने के बाद, क़यामत से पहले भी, काफ़िरों को अज़ाब दिया जाता है। यह सिर्फ़ फ़िरऔन की क़ौम के लिए नहीं, बल्कि हर उस इंसान के लिए सबक़ है जो अल्लाह की नाफ़रमानी करता है और उसके रसूलों को झुठलाता है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें अल्लाह के अज़ाब से डराती है और बताती है कि अल्लाह की पकड़ कितनी सख्त है। फ़िरऔन जैसा शक्तिशाली और सत्ताधारी इंसान, जो खुद को भगवान कहता था, आज अपनी क़ब्र में सुबह-शाम आग की यातना झेल रहा है। यह हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि हम दुनिया की चमक-दमक और ताक़त पर घमंड न करें। अल्लाह की रहमत और माफ़ी का दरवाज़ा खुला है — जो कोई भी तौबा करके सीधे रास्ते पर आ जाए, अल्लाह उसे माफ़ कर देता है। लेकिन जो अल्लाह के आगे सरकशी करे और उसके हुक्मों को ठुकराए, उसका अंजाम फ़िरऔन जैसा ही होगा। हमें चाहिए कि हम अल्लाह के हुक्मों पर अमल करें, नमाज़ पढ़ें, और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाएं, ताकि हम उस अज़ाब से बच सकें जिसका ज़िक्र इस आयत में किया गया है। अल्लाह हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 44-48 — सूरा ग़ाफिर
अनुवाद — ग़ाफिर 46
सूरा ग़ाफिर आयत 46 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अब तो कब्र में दोज़ख़ की आग है कि…सूरा आयत 46/85 — सूरा ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा ग़ाफिर सुनें, सूरा ग़ाफिर अनुवाद, सूरा ग़ाफिर mp3, सूरा ग़ाफिर pdf. आयत 44–48. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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