ग़ाफिर · 48/85
अनुवाद उच्चारण — सूरा ग़ाफिर
قَالَ الَّذِينَ اسْتَكْبَرُوا إِنَّا كُلٌّ فِيهَا إِنَّ اللَّهَ قَدْ حَكَمَ بَيْنَ الْعِبَادِ ۝٤٨
Qaalal lazeenas takbarooo innaa kullun feehaaa innal laaha qad hakama baynal`ibaad
📖 हिंदी अर्थ
तो बड़े लोग कहेंगें (अब तो) हम (तुम) सबके सब आग में पड़े हैं ख़ुदा (को) तो बन्दों के बारे में (जो कुछ) फैसला (करना था) कर चुका

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • اسْتَكْبَرُوا – अभिमान किया, घमंड किया
  • حَكَمَ – फैसला किया, न्याय किया

तफ़सीर:

जब अभिमानी नेता और सरदार जहन्नुम की आग में जल रहे होंगे, और उनके अनुयायी उनसे मदद की गुहार लगाएँगे कि हम पर तुम्हारा कोई हक़ नहीं था, तुमने हमें गुमराह किया, हमारे कुछ अज़ाब का बोझ उठाओ — तब वे अभिमानी नेता जवाब देंगे और कहेंगे: "हम सब इस आग में हैं — हम भी और तुम भी। हममें से कोई किसी के काम नहीं आ सकता, न हम तुम्हारा बोझ उठा सकते हैं और न तुम हमारा। अल्लाह ने अपने बंदों के बीच फैसला कर दिया है — उसने हममें से हर एक को उसके कर्मों के अनुसार वही अज़ाब दिया है जिसका वह हक़दार था।"

यह वह क्षण होगा जब सारे भ्रम टूट जाएँगे, सारे रिश्ते और वफ़ादारियाँ बेकार हो जाएँगी। अभिमानी नेता खुद भी उसी अज़ाब में डूबे होंगे और अपने अनुयायियों की कोई मदद नहीं कर सकेंगे। अल्लाह का फैसला अत्यंत न्यायपूर्ण होगा — हर व्यक्ति को उसके किए का पूरा बदला मिलेगा, न कम, न ज़्यादा।

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह का न्याय अटल और पूर्ण है। जो लोग दुनिया में दूसरों को गुमराह करते हैं, वे आख़िरत में उन गुमराह लोगों की कोई मदद नहीं कर सकेंगे। हर इंसान अपने कर्मों का ज़िम्मेदार है, और अल्लाह के दरबार में हर एक से अकेले ही पूछताछ होगी।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम किसके पीछे चल रहे हैं? क्या हम उन लोगों की बात मान रहे हैं जो हमें अल्लाह की राह से भटकाते हैं? याद रखिए, क़यामत के दिन कोई किसी का सहारा नहीं बनेगा। आज हमें चाहिए कि अल्लाह की राह पर चलें, उसकी इबादत करें, और उसके रसूल ﷺ की सुन्नत को अपनाएँ — ताकि उस दिन हम उन लोगों में से हों जिन्हें अल्लाह ने जन्नत का फैसला सुनाया होगा, न कि जहन्नुम का। अल्लाह हम सबको सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 46-50 — सूरा ग़ाफिर

46النَّارُ يُعْرَضُونَ عَلَيْهَا غُدُوًّا وَعَشِيًّا ۖ وَيَوْمَ تَقُومُ السَّاعَةُ أَدْخِلُوا آلَ فِرْعَوْنَ أَشَدَّ الْعَذَابِ
और अब तो कब्र में दोज़ख़ की आग है कि वह लोग (हर) सुबह व शाम उसके सामने ला खड़े किए जाते हैं और जिस दिन क़यामत बरपा होगी (हुक्म होगा) फिरऔन के लोगों को सख्त से सख्त अज़ाब में झोंक दो
47وَإِذْ يَتَحَاجُّونَ فِي النَّارِ فَيَقُولُ الضُّعَفَاءُ لِلَّذِينَ اسْتَكْبَرُوا إِنَّا كُنَّا لَكُمْ تَبَعًا فَهَلْ أَنتُم مُّغْنُونَ عَنَّا نَصِيبًا مِّنَ النَّارِ
और ये लोग जिस वक्त ज़हन्नुम में बाहम झगड़ेंगें तो कम हैसियत लोग बड़े आदमियों से कहेंगे कि हम तुम्हारे ताबे थे तो क्या तुम इस वक्त (दोज़ख़ की) आग का कुछ हिस्सा हमसे हटा सकते हो
48قَالَ الَّذِينَ اسْتَكْبَرُوا إِنَّا كُلٌّ فِيهَا إِنَّ اللَّهَ قَدْ حَكَمَ بَيْنَ الْعِبَادِ
तो बड़े लोग कहेंगें (अब तो) हम (तुम) सबके सब आग में पड़े हैं ख़ुदा (को) तो बन्दों के बारे में (जो कुछ) फैसला (करना था) कर चुका
49وَقَالَ الَّذِينَ فِي النَّارِ لِخَزَنَةِ جَهَنَّمَ ادْعُوا رَبَّكُمْ يُخَفِّفْ عَنَّا يَوْمًا مِّنَ الْعَذَابِ
और जो लोग आग में (जल रहे) होंगे जहन्नुम के दरोग़ाओं से दरख्वास्त करेंगे कि अपने परवरदिगार से अर्ज़ करो कि एक दिन तो हमारे अज़ाब में तख़फ़ीफ़ कर दें
50قَالُوا أَوَلَمْ تَكُ تَأْتِيكُمْ رُسُلُكُم بِالْبَيِّنَاتِ ۖ قَالُوا بَلَىٰ ۚ قَالُوا فَادْعُوا ۗ وَمَا دُعَاءُ الْكَافِرِينَ إِلَّا فِي ضَلَالٍ
वह जवाब देंगे कि क्या तुम्हारे पास तुम्हारे पैग़म्बर साफ व रौशन मौजिज़े लेकर नहीं आए थे वह कहेंगे (हाँ) आए तो थे, तब फरिश्ते तो कहेंगे फिर तुम ख़़ुद (क्यों) न दुआ करो, हालाँकि काफ़िरों की दुआ तो बस बेकार ही है
ग़ाफिरकुरान सूची
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मक्कीअवतरण स्थान
48आयत

अनुवाद — ग़ाफिर 48

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Wednesday, September 30, 2026

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