ग़ाफिर · 78/85
अनुवाद उच्चारण — ग़ाफिर
وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا رُسُلًا مِّن قَبْلِكَ مِنْهُم مَّن قَصَصْنَا عَلَيْكَ وَمِنْهُم مَّن لَّمْ نَقْصُصْ عَلَيْكَ ۗ وَمَا كَانَ لِرَسُولٍ أَن يَأْتِيَ بِآيَةٍ إِلَّا بِإِذْنِ اللَّهِ ۚ فَإِذَا جَاءَ أَمْرُ اللَّهِ قُضِيَ بِالْحَقِّ وَخَسِرَ هُنَالِكَ الْمُبْطِلُونَ ۝٧٨
Wa laqad arsalnaa Rusulam min qablika minhum man qasasnaa `alaika wa minhum mal lam naqsus `alaik; wa maa kaana li Rasoolin any yaatiya bi Aayatin illaa bi iznil laah; fa izaa jaaa`a amrul laahi qudiya bilhaqqi wa khasira hunaalikal mubtiloon
📖 हिंदी अर्थ
और तुमसे पहले भी हमने बहुत से पैग़म्बर भेजे उनमें से कुछ तो ऐसे हैं जिनके हालात हमने तुमसे बयान कर दिए, और कुछ ऐसे हैं जिनके हालात तुमसे नहीं दोहराए और किसी पैग़म्बर की ये मजाल न थी कि ख़ुदा के ऐख्तेयार दिए बग़ैर कोई मौजिज़ा दिखा सकें फिर जब ख़ुदा का हुक्म (अज़ाब) आ पहुँचा तो ठीक ठीक फैसला कर दिया गया और अहले बातिल ही इस घाटे में रहे,

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • قَصَصْنَا: हमने आपको बताया / सुनाया।
  • لَمْ نَقْصُصْ: हमने नहीं बताया।
  • بِإِذْنِ اللهِ: अल्लाह की आज्ञा और इच्छा से।
  • قُضِيَ: फैसला कर दिया गया।
  • الْمُبْطِلُونَ: बातिल (झूठ) पर चलने वाले, असत्य के पक्षधर।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! हमने आपसे पहले भी कई रसूल भेजे — कुछ ऐसे थे जिनके हालात हमने आपको क़ुरआन में सुनाए, जैसे नूह, इब्राहीम, मूसा, ईसा (अलैहिमुस्सलाम) — और कुछ ऐसे भी थे जिनके नाम और किस्से हमने आपको नहीं बताए। यह अल्लाह की हिकमत है कि उसने कुछ रसूलों की दास्तानें बयान कीं और कुछ को छुपाए रखा, ताकि लोगों के लिए इबरत और नसीहत हो। हर रसूल का एक ही काम था — अल्लाह का पैग़ाम पहुँचाना और उसकी वही पर चलना।

और यह भी सुन लो कि किसी रसूल के लिए यह संभव नहीं था कि वह अपनी तरफ़ से कोई मो'जिज़ा या निशानी ले आए, जब तक कि अल्लाह खुद उसे इजाज़त न दे। मो'जिज़ात अल्लाह के हाथ में हैं, रसूलों के हाथ में नहीं। जो लोग नबी से बड़े-बड़े निशाने माँगते थे, वह दरअसल अपनी ज़िद और सरकशी की वजह से माँगते थे, न कि हिदायत की ख्वाहिश से। अल्लाह ने जब चाहा, रसूलों को मो'जिज़ात दिए — और जब न चाहा, तो नहीं दिए। यह पूरी तरह अल्लाह की मर्ज़ी पर मुनहसिर है।

फिर जब अल्लाह का फैसला आ जाता है — यानी अज़ाब का वक़्त आ जाता है — तो वह रसूलों और उनके झुठलाने वालों के दरमियान इन्साफ़ के साथ फैसला कर देता है। सच्चे रसूल और उनके साथी नजात पाते हैं, और झूठे लोग हलाकत के सिवा कुछ नहीं पाते। उस वक़्त बातिल पर चलने वाले, जिन्होंने अल्लाह पर झूठ बोला और उसके सिवा दूसरों की इबादत की, पूरी तरह घाटे में रहते हैं — न उनका कोई साथी काम आता है, न उनके बनाए हुए झूठे माबूद।


दावती पहलू (नसीहत):

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह का दीन हमेशा से एक ही रहा है — हर ज़माने में रसूल आए, और सबको एक ही पैग़ाम दिया गया। आज हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम उसी पैग़ाम को समझें और उस पर अमल करें। अल्लाह ने हमें क़ुरआन दिया, जिसमें पिछले रसूलों के किस्से मौजूद हैं — यह हमारे लिए रहनुमाई और नसीहत है। हमें उन लोगों की तरह नहीं बनना है जो निशानियाँ माँगते रहे और हिदायत से महरूम रहे। बल्कि हमें उन लोगों में शामिल होना है जो अल्लाह के फैसले पर यक़ीन रखते हैं, उसकी इबादत करते हैं और सच्चाई पर साबित क़दम रहते हैं। याद रखिए — अल्लाह का फैसला जब आएगा, तो सच्चे लोग ही कामयाब होंगे, और बातिल पेशा लोग घाटे में रहेंगे। आइए, हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक बनाएँ, ताकि उस दिन हम घाटे में न रहें, बल्कि कामयाबी पाएँ।



📜 आयत 76-80 — ग़ाफिर

76ادْخُلُوا أَبْوَابَ جَهَنَّمَ خَالِدِينَ فِيهَا ۖ فَبِئْسَ مَثْوَى الْمُتَكَبِّرِينَ
अब जहन्नुम के दरवाज़े में दाख़िल हो जाओ (और) हमेशा उसी में (पड़े) रहो, ग़रज़ तकब्बुर करने वालों का भी (क्या) बुरा ठिकाना है
77فَاصْبِرْ إِنَّ وَعْدَ اللَّهِ حَقٌّ ۚ فَإِمَّا نُرِيَنَّكَ بَعْضَ الَّذِي نَعِدُهُمْ أَوْ نَتَوَفَّيَنَّكَ فَإِلَيْنَا يُرْجَعُونَ
तो (ऐ रसूल) तुम सब्र करो ख़ुदा का वायदा यक़ीनी सच्चा है तो जिस (अज़ाब) की हम उन्हें धमकी देते हैं अगर हम तुमको उसमें कुछ दिखा दें या तुम ही को (इसके क़ब्ल) दुनिया से उठा लें तो (आख़िर फिर) उनको हमारी तरफ लौट कर आना है,
78وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا رُسُلًا مِّن قَبْلِكَ مِنْهُم مَّن قَصَصْنَا عَلَيْكَ وَمِنْهُم مَّن لَّمْ نَقْصُصْ عَلَيْكَ ۗ وَمَا كَانَ لِرَسُولٍ أَن يَأْتِيَ بِآيَةٍ إِلَّا بِإِذْنِ اللَّهِ ۚ فَإِذَا جَاءَ أَمْرُ اللَّهِ قُضِيَ بِالْحَقِّ وَخَسِرَ هُنَالِكَ الْمُبْطِلُونَ
और तुमसे पहले भी हमने बहुत से पैग़म्बर भेजे उनमें से कुछ तो ऐसे हैं जिनके हालात हमने तुमसे बयान कर दिए, और कुछ ऐसे हैं जिनके हालात तुमसे नहीं दोहराए और किसी पैग़म्बर की ये मजाल न थी कि ख़ुदा के ऐख्तेयार दिए बग़ैर कोई मौजिज़ा दिखा सकें फिर जब ख़ुदा का हुक्म (अज़ाब) आ पहुँचा तो ठीक ठीक फैसला कर दिया गया और अहले बातिल ही इस घाटे में रहे,
79اللَّهُ الَّذِي جَعَلَ لَكُمُ الْأَنْعَامَ لِتَرْكَبُوا مِنْهَا وَمِنْهَا تَأْكُلُونَ
ख़ुदा ही तो वह है जिसने तुम्हारे लिए चारपाए पैदा किए ताकि तुम उनमें से किसी पर सवार होते हो और किसी को खाते हो
80وَلَكُمْ فِيهَا مَنَافِعُ وَلِتَبْلُغُوا عَلَيْهَا حَاجَةً فِي صُدُورِكُمْ وَعَلَيْهَا وَعَلَى الْفُلْكِ تُحْمَلُونَ
और तुम्हारे लिए उनमें (और भी) फायदे हैं और ताकि तुम उन पर (चढ़ कर) अपनी दिली मक़सद तक पहुँचो और उन पर और (नीज़) कश्तियों पर सवार फिरते हो
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मक्कीRevelation
78आयत

अनुवाद — ग़ाफिर 78

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Tuesday, August 18, 2026

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