अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- قَصَصْنَا: हमने आपको बताया / सुनाया।
- لَمْ نَقْصُصْ: हमने नहीं बताया।
- بِإِذْنِ اللهِ: अल्लाह की आज्ञा और इच्छा से।
- قُضِيَ: फैसला कर दिया गया।
- الْمُبْطِلُونَ: बातिल (झूठ) पर चलने वाले, असत्य के पक्षधर।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! हमने आपसे पहले भी कई रसूल भेजे — कुछ ऐसे थे जिनके हालात हमने आपको क़ुरआन में सुनाए, जैसे नूह, इब्राहीम, मूसा, ईसा (अलैहिमुस्सलाम) — और कुछ ऐसे भी थे जिनके नाम और किस्से हमने आपको नहीं बताए। यह अल्लाह की हिकमत है कि उसने कुछ रसूलों की दास्तानें बयान कीं और कुछ को छुपाए रखा, ताकि लोगों के लिए इबरत और नसीहत हो। हर रसूल का एक ही काम था — अल्लाह का पैग़ाम पहुँचाना और उसकी वही पर चलना।
और यह भी सुन लो कि किसी रसूल के लिए यह संभव नहीं था कि वह अपनी तरफ़ से कोई मो'जिज़ा या निशानी ले आए, जब तक कि अल्लाह खुद उसे इजाज़त न दे। मो'जिज़ात अल्लाह के हाथ में हैं, रसूलों के हाथ में नहीं। जो लोग नबी से बड़े-बड़े निशाने माँगते थे, वह दरअसल अपनी ज़िद और सरकशी की वजह से माँगते थे, न कि हिदायत की ख्वाहिश से। अल्लाह ने जब चाहा, रसूलों को मो'जिज़ात दिए — और जब न चाहा, तो नहीं दिए। यह पूरी तरह अल्लाह की मर्ज़ी पर मुनहसिर है।
फिर जब अल्लाह का फैसला आ जाता है — यानी अज़ाब का वक़्त आ जाता है — तो वह रसूलों और उनके झुठलाने वालों के दरमियान इन्साफ़ के साथ फैसला कर देता है। सच्चे रसूल और उनके साथी नजात पाते हैं, और झूठे लोग हलाकत के सिवा कुछ नहीं पाते। उस वक़्त बातिल पर चलने वाले, जिन्होंने अल्लाह पर झूठ बोला और उसके सिवा दूसरों की इबादत की, पूरी तरह घाटे में रहते हैं — न उनका कोई साथी काम आता है, न उनके बनाए हुए झूठे माबूद।
दावती पहलू (नसीहत):
यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह का दीन हमेशा से एक ही रहा है — हर ज़माने में रसूल आए, और सबको एक ही पैग़ाम दिया गया। आज हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम उसी पैग़ाम को समझें और उस पर अमल करें। अल्लाह ने हमें क़ुरआन दिया, जिसमें पिछले रसूलों के किस्से मौजूद हैं — यह हमारे लिए रहनुमाई और नसीहत है। हमें उन लोगों की तरह नहीं बनना है जो निशानियाँ माँगते रहे और हिदायत से महरूम रहे। बल्कि हमें उन लोगों में शामिल होना है जो अल्लाह के फैसले पर यक़ीन रखते हैं, उसकी इबादत करते हैं और सच्चाई पर साबित क़दम रहते हैं। याद रखिए — अल्लाह का फैसला जब आएगा, तो सच्चे लोग ही कामयाब होंगे, और बातिल पेशा लोग घाटे में रहेंगे। आइए, हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक बनाएँ, ताकि उस दिन हम घाटे में न रहें, बल्कि कामयाबी पाएँ।
📜 आयत 76-80 — ग़ाफिर
अनुवाद — ग़ाफिर 78
सूरा ग़ाफिर आयत 78 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और तुमसे पहले भी हमने बहुत से पैग़म्बर भेजे उनमें…सूरा आयत 78/85 — ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ग़ाफिर सुनें, ग़ाफिर अनुवाद, ग़ाफिर mp3, ग़ाफिर pdf. आयत 76–80. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








