ग़ाफिर · 79/85
अनुवाद उच्चारण — ग़ाफिर
اللَّهُ الَّذِي جَعَلَ لَكُمُ الْأَنْعَامَ لِتَرْكَبُوا مِنْهَا وَمِنْهَا تَأْكُلُونَ ۝٧٩
Allaahul lazee ja`ala lakumul an`aama litarkaboo minhaa wa minhaa taakuloon
📖 हिंदी अर्थ
ख़ुदा ही तो वह है जिसने तुम्हारे लिए चारपाए पैदा किए ताकि तुम उनमें से किसी पर सवार होते हो और किसी को खाते हो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْأَنْعَامَ (अल-अन'आम): चौपाये जानवर, जिनमें ऊँट, गाय, बकरी और भेड़ शामिल हैं।
  • لِتَرْكَبُوا مِنْهَا (लितर्कबू मिन्हा): ताकि उनमें से कुछ पर तुम सवारी करो।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ही वह (सर्वशक्तिमान) है जिसने तुम्हारे लिए चौपाये जानवर पैदा किए — ये उसकी महान नेमतों (अनुग्रहों) में से एक हैं। उसने इन्हें इसलिए बनाया ताकि तुम उनमें से कुछ (जैसे ऊँट) पर सवारी करो और यात्रा के कठिन रास्तों को पार करो, और उनमें से कुछ (जैसे गाय, बकरी, भेड़) का गोश्त खाओ। यही नहीं, बल्कि इन जानवरों से तुम्हें दूध, ऊन, खाल और कई अन्य फ़ायदे भी मिलते हैं। यह अल्लाह की रहमत और कुदरत (शक्ति) का अद्भुत नमूना है कि उसने इन निःशब्द प्राणियों को इंसान की ख़िदमत के लिए समर्पित कर दिया।

जब तुम इन जानवरों को देखते हो, तो उनमें अल्लाह की कुदरत के निशानात (संकेत) मौजूद हैं — वही अल्लाह जिसने इन्हें पैदा किया, वही तुम्हारा रिज़्क़ (आजीविका) का इंतज़ाम करता है। यह सब कुछ इसलिए है कि तुम उसका शुक्र अदा करो और उसकी नेमतों को पहचानो। क्या तुमने कभी सोचा है कि ये जानवर, जो तुम्हारे काम आते हैं, किसने बनाए? किसने उन्हें तुम्हारे वश में कर दिया? यही तो अल्लाह की महानता है — वह जो चाहता है, बनाता है और जिसे चाहता है, तुम्हारे अधीन कर देता है।

इस आयत में अल्लाह तआला हमें अपनी नेमतों को याद दिलाता है ताकि हमारा दिल उसकी मोहब्बत से भर जाए और हम उसके सामने सजदा करें। यह नेमत सिर्फ़ खाने और सवारी तक सीमित नहीं, बल्कि इन जानवरों के माध्यम से अल्लाह ने इंसान की ज़िंदगी को आसान बना दिया — दूर की यात्राएँ, व्यापार, भोजन, वस्त्र — सब कुछ इन्हीं से जुड़ा है। तो क्या हमें उस परम दयालु का शुक्रगुज़ार नहीं होना चाहिए जिसने यह सब कुछ हमारे लिए मुहैया किया?

याद रखो, यह सब अल्लाह की रहमत का सबूत है और उसकी वह नेमत है जो कभी ख़त्म नहीं होती। जो इंसान इन नेमतों को पहचान लेता है और अल्लाह का शुक्र अदा करता है, अल्लाह उसे और ज़्यादा देता है। इसलिए अपने रब की नेमतों को कभी भूलो मत और हर हाल में उसका शुक्र अदा करते रहो — क्योंकि शुक्र ही वह चाबी है जो नेमतों को बढ़ाती है और दिल को सुकून देती है।



📜 आयत 77-81 — ग़ाफिर

77فَاصْبِرْ إِنَّ وَعْدَ اللَّهِ حَقٌّ ۚ فَإِمَّا نُرِيَنَّكَ بَعْضَ الَّذِي نَعِدُهُمْ أَوْ نَتَوَفَّيَنَّكَ فَإِلَيْنَا يُرْجَعُونَ
तो (ऐ रसूल) तुम सब्र करो ख़ुदा का वायदा यक़ीनी सच्चा है तो जिस (अज़ाब) की हम उन्हें धमकी देते हैं अगर हम तुमको उसमें कुछ दिखा दें या तुम ही को (इसके क़ब्ल) दुनिया से उठा लें तो (आख़िर फिर) उनको हमारी तरफ लौट कर आना है,
78وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا رُسُلًا مِّن قَبْلِكَ مِنْهُم مَّن قَصَصْنَا عَلَيْكَ وَمِنْهُم مَّن لَّمْ نَقْصُصْ عَلَيْكَ ۗ وَمَا كَانَ لِرَسُولٍ أَن يَأْتِيَ بِآيَةٍ إِلَّا بِإِذْنِ اللَّهِ ۚ فَإِذَا جَاءَ أَمْرُ اللَّهِ قُضِيَ بِالْحَقِّ وَخَسِرَ هُنَالِكَ الْمُبْطِلُونَ
और तुमसे पहले भी हमने बहुत से पैग़म्बर भेजे उनमें से कुछ तो ऐसे हैं जिनके हालात हमने तुमसे बयान कर दिए, और कुछ ऐसे हैं जिनके हालात तुमसे नहीं दोहराए और किसी पैग़म्बर की ये मजाल न थी कि ख़ुदा के ऐख्तेयार दिए बग़ैर कोई मौजिज़ा दिखा सकें फिर जब ख़ुदा का हुक्म (अज़ाब) आ पहुँचा तो ठीक ठीक फैसला कर दिया गया और अहले बातिल ही इस घाटे में रहे,
79اللَّهُ الَّذِي جَعَلَ لَكُمُ الْأَنْعَامَ لِتَرْكَبُوا مِنْهَا وَمِنْهَا تَأْكُلُونَ
ख़ुदा ही तो वह है जिसने तुम्हारे लिए चारपाए पैदा किए ताकि तुम उनमें से किसी पर सवार होते हो और किसी को खाते हो
80وَلَكُمْ فِيهَا مَنَافِعُ وَلِتَبْلُغُوا عَلَيْهَا حَاجَةً فِي صُدُورِكُمْ وَعَلَيْهَا وَعَلَى الْفُلْكِ تُحْمَلُونَ
और तुम्हारे लिए उनमें (और भी) फायदे हैं और ताकि तुम उन पर (चढ़ कर) अपनी दिली मक़सद तक पहुँचो और उन पर और (नीज़) कश्तियों पर सवार फिरते हो
81وَيُرِيكُمْ آيَاتِهِ فَأَيَّ آيَاتِ اللَّهِ تُنكِرُونَ
और वह तुमको अपनी (कुदरत की) निशानियाँ दिखाता है तो तुम ख़ुदा की किन किन निशानियों को न मानोगे
ग़ाफिरकुरान सूची
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मक्कीRevelation
79आयत

अनुवाद — ग़ाफिर 79

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Tuesday, August 18, 2026

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