Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الْأَنْعَامَ (अल-अन'आम): चौपाये जानवर, जिनमें ऊँट, गाय, बकरी और भेड़ शामिल हैं।
- لِتَرْكَبُوا مِنْهَا (लितर्कबू मिन्हा): ताकि उनमें से कुछ पर तुम सवारी करो।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ही वह (सर्वशक्तिमान) है जिसने तुम्हारे लिए चौपाये जानवर पैदा किए — ये उसकी महान नेमतों (अनुग्रहों) में से एक हैं। उसने इन्हें इसलिए बनाया ताकि तुम उनमें से कुछ (जैसे ऊँट) पर सवारी करो और यात्रा के कठिन रास्तों को पार करो, और उनमें से कुछ (जैसे गाय, बकरी, भेड़) का गोश्त खाओ। यही नहीं, बल्कि इन जानवरों से तुम्हें दूध, ऊन, खाल और कई अन्य फ़ायदे भी मिलते हैं। यह अल्लाह की रहमत और कुदरत (शक्ति) का अद्भुत नमूना है कि उसने इन निःशब्द प्राणियों को इंसान की ख़िदमत के लिए समर्पित कर दिया।
जब तुम इन जानवरों को देखते हो, तो उनमें अल्लाह की कुदरत के निशानात (संकेत) मौजूद हैं — वही अल्लाह जिसने इन्हें पैदा किया, वही तुम्हारा रिज़्क़ (आजीविका) का इंतज़ाम करता है। यह सब कुछ इसलिए है कि तुम उसका शुक्र अदा करो और उसकी नेमतों को पहचानो। क्या तुमने कभी सोचा है कि ये जानवर, जो तुम्हारे काम आते हैं, किसने बनाए? किसने उन्हें तुम्हारे वश में कर दिया? यही तो अल्लाह की महानता है — वह जो चाहता है, बनाता है और जिसे चाहता है, तुम्हारे अधीन कर देता है।
इस आयत में अल्लाह तआला हमें अपनी नेमतों को याद दिलाता है ताकि हमारा दिल उसकी मोहब्बत से भर जाए और हम उसके सामने सजदा करें। यह नेमत सिर्फ़ खाने और सवारी तक सीमित नहीं, बल्कि इन जानवरों के माध्यम से अल्लाह ने इंसान की ज़िंदगी को आसान बना दिया — दूर की यात्राएँ, व्यापार, भोजन, वस्त्र — सब कुछ इन्हीं से जुड़ा है। तो क्या हमें उस परम दयालु का शुक्रगुज़ार नहीं होना चाहिए जिसने यह सब कुछ हमारे लिए मुहैया किया?
याद रखो, यह सब अल्लाह की रहमत का सबूत है और उसकी वह नेमत है जो कभी ख़त्म नहीं होती। जो इंसान इन नेमतों को पहचान लेता है और अल्लाह का शुक्र अदा करता है, अल्लाह उसे और ज़्यादा देता है। इसलिए अपने रब की नेमतों को कभी भूलो मत और हर हाल में उसका शुक्र अदा करते रहो — क्योंकि शुक्र ही वह चाबी है जो नेमतों को बढ़ाती है और दिल को सुकून देती है।
📜 आयत 77-81 — सूरा ग़ाफिर
अनुवाद — ग़ाफिर 79
सूरा ग़ाफिर आयत 79 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ख़ुदा ही तो वह है जिसने तुम्हारे लिए चारपाए पैदा…सूरा आयत 79/85 — सूरा ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा ग़ाफिर सुनें, सूरा ग़ाफिर अनुवाद, सूरा ग़ाफिर mp3, सूरा ग़ाफिर pdf. आयत 77–81. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 29, 2026
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