फुस्सिलत · 25/54
अनुवाद उच्चारण — फुस्सिलत
۞ وَقَيَّضْنَا لَهُمْ قُرَنَاءَ فَزَيَّنُوا لَهُم مَّا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ وَحَقَّ عَلَيْهِمُ الْقَوْلُ فِي أُمَمٍ قَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِهِم مِّنَ الْجِنِّ وَالْإِنسِ ۖ إِنَّهُمْ كَانُوا خَاسِرِينَ ۝٢٥
Wa qaiyadnaa lahum quranaaa`a fazaiyanoo lahum maa baina aideehim wa maa khalfahum wa haqqa `alaihimul qawlu feee umamin qad khalat min qablihim minal jinni wal insi innahum kaanoo khaasireen
📖 हिंदी अर्थ
और हमने (गोया ख़ुद शैतान को) उनका हमनशीन मुक़र्रर कर दिया था तो उन्होने उनके अगले पिछले तमाम उमूर उनकी नज़रों में भले कर दिखाए तो जिन्नात और इन्सानो की उम्मतें जो उनसे पहले गुज़र चुकी थीं उनके शुमूल (साथ) में (अज़ाब का) वायदा उनके हक़ में भी पूरा हो कर रहा बेशक ये लोग अपने घाटे के दरपै थे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • قَيَّضْنَا: हमने नियुक्त किया, मुक़र्रर किया।
  • قُرَنَاءَ: साथी, हमनवा (शैतानों को)।
  • زَيَّنُوا: सुंदर बनाकर दिखाया, अच्छा प्रतीत कराया।
  • مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ: उनके सामने के कार्य (दुनिया के मामले)।
  • مَا خَلْفَهُمْ: उनके पीछे के मामले (आख़िरत)।
  • حَقَّ عَلَيْهِمُ الْقَوْلُ: उन पर अज़ाब का फ़ैसला साबित हो गया।
  • خَلَتْ: गुज़र चुकी हैं।
  • خَاسِرِينَ: घाटे में रहने वाले, नुक़सान उठाने वाले।

तफ़सीर:

यह आयत उन ज़ालिमों और काफ़िरों के हाल का वर्णन करती है जिन्होंने हक़ (सत्य) को झुठलाया और रसूलों की दावत को क़बूल नहीं किया। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हमने उनके लिए ऐसे साथी (शैतान) नियुक्त कर दिए जो उन्हें हर क़दम पर गुमराह करते रहे। इन शैतानी साथियों ने उनके सामने के कामों को यानी दुनिया के मामलों को ख़ूबसूरत बनाकर दिखाया — उन्हें लज़्ज़तों, शहवतों और गुनाहों में डुबोया, और हराम कामों को उनकी नज़र में पसंदीदा बनाया। साथ ही, उन्होंने उनके पीछे के मामलों को यानी आख़िरत के मामले को भी भुला दिया — उन्हें यक़ीन दिलाया कि न कोई हश्र है, न कोई हिसाब, न कोई जज़ा या सज़ा। इस तरह उन्होंने उन्हें मरने के बाद की ज़िंदगी से ग़ाफ़िल कर दिया और आख़िरत की तैयारी से महरूम कर दिया।

इसी वजह से उन पर अज़ाब का फ़ैसला साबित हो गया, और वे उन उम्मतों के साथ शामिल हो गए जो उनसे पहले जिन्नों और इंसानों में से गुज़र चुकी थीं — यानी काफ़िर और मुन्किर उम्मतें। ये सब घाटे में रहने वाले थे, क्योंकि उन्होंने दुनिया में अपने अच्छे कर्मों को बर्बाद कर दिया, और आख़िरत में अपनी जानों और अपने अहल-ओ-अयाल को खो दिया। वे जहन्नुम में जाने वालों में शामिल हुए और हमेशा के लिए अज़ाब में रहेंगे।

दावती पहलू:

यह आयत हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि इंसान को अपने साथियों और दोस्तों के चुनाव में बेहद होशियार रहना चाहिए। बुरे साथी इंसान को धीरे-धीरे गुनाह की तरफ ले जाते हैं, गुनाह को प्यारा बनाते हैं और आख़िरत की याद को दिल से मिटा देते हैं। इसलिए हमें अच्छे और नेक लोगों की सोहबत इख्तियार करनी चाहिए, जो हमें अल्लाह की याद दिलाएं, अच्छे कामों की तरफ बुलाएं और आख़िरत की तैयारी की तरफ रहनुमाई करें। याद रखें, जो लोग दुनिया में अल्लाह से ग़ाफ़िल रहते हैं, वे आख़िरत में सबसे बड़े घाटे में होंगे। अल्लाह तआला हमें बुरे साथियों के शर से बचाए और हमें नेक लोगों की सोहबत नसीब फ़रमाए। आमीन।



📜 आयत 23-27 — फुस्सिलत

23وَذَٰلِكُمْ ظَنُّكُمُ الَّذِي ظَنَنتُم بِرَبِّكُمْ أَرْدَاكُمْ فَأَصْبَحْتُم مِّنَ الْخَاسِرِينَ
और तुम्हारी इस बदख्याली ने जो तुम अपने परवरदिगार के बारे में रखते थे तुम्हें तबाह कर छोड़ा आख़िर तुम घाटे में रहे
24فَإِن يَصْبِرُوا فَالنَّارُ مَثْوًى لَّهُمْ ۖ وَإِن يَسْتَعْتِبُوا فَمَا هُم مِّنَ الْمُعْتَبِينَ
फिर अगर ये लोग सब्र भी करें तो भी इनका ठिकाना दोज़ख़ ही है और अगर तौबा करें तो भी इनकी तौबा क़ुबूल न की जाएगी
25۞ وَقَيَّضْنَا لَهُمْ قُرَنَاءَ فَزَيَّنُوا لَهُم مَّا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ وَحَقَّ عَلَيْهِمُ الْقَوْلُ فِي أُمَمٍ قَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِهِم مِّنَ الْجِنِّ وَالْإِنسِ ۖ إِنَّهُمْ كَانُوا خَاسِرِينَ
और हमने (गोया ख़ुद शैतान को) उनका हमनशीन मुक़र्रर कर दिया था तो उन्होने उनके अगले पिछले तमाम उमूर उनकी नज़रों में भले कर दिखाए तो जिन्नात और इन्सानो की उम्मतें जो उनसे पहले गुज़र चुकी थीं उनके शुमूल (साथ) में (अज़ाब का) वायदा उनके हक़ में भी पूरा हो कर रहा बेशक ये लोग अपने घाटे के दरपै थे
26وَقَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا لَا تَسْمَعُوا لِهَٰذَا الْقُرْآنِ وَالْغَوْا فِيهِ لَعَلَّكُمْ تَغْلِبُونَ
और कुफ्फ़ार कहने लगे कि इस क़ुरान को सुनो ही नहीं और जब पढ़ें (तो) इसके (बीच) में ग़ुल मचा दिया करो ताकि (इस तरकीब से) तुम ग़ालिब आ जाओ
27فَلَنُذِيقَنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا عَذَابًا شَدِيدًا وَلَنَجْزِيَنَّهُمْ أَسْوَأَ الَّذِي كَانُوا يَعْمَلُونَ
तो हम भी काफ़िरों को सख्त अज़ाब के मज़े चखाएँगे और इनकी कारस्तानियों की बहुत बड़ी सज़ा ये दोज़ख़ है
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अनुवाद — फुस्सिलत 25

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Tuesday, August 18, 2026

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