अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَا تَسْمَعُوا – सुनो मत, कान न दो
- وَالْغَوْا – शोर मचाओ, चिल्लाओ, बकवास बोलो (यानी कुरान की तिलावत के दौरान ऊँची आवाज़ में बेतुकी बातें करो ताकि उसकी आवाज़ दब जाए)
- لَعَلَّكُمْ تَغْلِبُونَ – ताकि तुम ग़ालिब आ जाओ, कामयाब हो जाओ
तफसीर (व्याख्या):
जब अल्लाह के रसूल ﷺ कुरान की तिलावत करते और लोगों को उसकी ओर बुलाते, तो काफ़िरों को कोई जवाब नहीं सूझता था। वे सच्चाई के सामने बेबस थे, क्योंकि कुरान की दलीलें इतनी मज़बूत थीं कि उनके पास कोई तर्क नहीं था। इसलिए उन्होंने आपस में साज़िश रची और एक-दूसरे को नसीहत दी कि "इस कुरान को हरगिज़ न सुनो, और जब मुहम्मद ﷺ इसे पढ़ें तो ज़ोर-ज़ोर से शोर मचाओ, चिल्लाओ, तालियाँ बजाओ, बेतुकी बातें करो, कविताएँ पढ़ो — ताकि लोगों का ध्यान भटक जाए और उनके कानों तक कुरान की आवाज़ न पहुँचे।" उनका ख़याल था कि इस तरह वे रसूल ﷺ को हरा देंगे और उनकी दावत को बेअसर कर देंगे।
यह उनकी नादानी और सच्चाई से भागने की कोशिश थी। वे यह भूल गए कि अल्लाह का कलाम (कुरान) कोई इंसानी बात नहीं है जो शोर से दब जाए। कुरान तो दिलों पर राज करता है, और अल्लाह की हिफ़ाज़त में है। जितना वे शोर मचाते, कुरान की सच्चाई उतनी ही रोशन होती जाती। आज भी दुनिया भर में लाखों लोग कुरान सुनकर हिदायत पाते हैं, और उन काफ़िरों की साज़िशें इतिहास के पन्नों में दफ़न हो चुकी हैं।
इस आयत से हमें सीख मिलती है कि सच्चाई को दबाने की कोशिश करने वाले चाहे कितनी भी तरकीबें अपनाएँ, अल्लाह का दीन हमेशा बुलंद रहता है। और हम मुसलमानों को चाहिए कि कुरान को पूरे ध्यान और अदब से सुनें, क्योंकि यही हमारी कामयाबी की कुंजी है। जो लोग कुरान से मुँह मोड़ते हैं, वे असल में अपने ही नुक़सान का सामान करते हैं। अल्लाह हमें कुरान को समझने, सुनने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 24-28 — फुस्सिलत
अनुवाद — फुस्सिलत 26
सूरा फुस्सिलत आयत 26 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और कुफ्फ़ार कहने लगे कि इस क़ुरान को सुनो ही…सूरा आयत 26/54 — फुस्सिलत فصلت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: फुस्सिलत सुनें, फुस्सिलत अनुवाद, फुस्सिलत mp3, फुस्सिलत pdf. आयत 24–28. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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