Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَصْبِرُوا: सब्र करें, सहन करें।
- مَثْوًى: ठिकाना, निवास स्थान।
- يَسْتَعْتِبُوا: रिआयत या माफ़ी की दरख़्वास्त करें, यानी अल्लाह की नाराज़गी दूर करने और उसकी ख़ुशी हासिल करने की गुज़ारिश करें।
- الْمُعْتَبِينَ: वे लोग जिनकी दरख़्वास्त क़बूल की जाए और जिन्हें माफ़ कर दिया जाए।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों के हाल का बयान कर रही है जिन्होंने दुनिया में अल्लाह की आयतों को झुठलाया और अपने गुनाहों पर अड़े रहे। क़यामत के दिन जब उनके ख़िलाफ़ उनके कान, आँखें और खालें गवाही देंगी, तो वे सज़ा से बचने की कोई सूरत न पाएँगे। अल्लाह फ़रमाता है कि अगर ये लोग आज़ाब (अज़ाब) पर सब्र करें, तो भी उनका ठिकाना जहन्नुम की आग ही है—वहाँ वे हमेशा रहेंगे, और सब्र करना या न करना उनके लिए बराबर है, क्योंकि सज़ा टलने वाली नहीं। और अगर वे माफ़ी की दरख़्वास्त करें, अल्लाह से रिआयत चाहें, या दुनिया में वापस भेजे जाने की गुज़ारिश करें ताकि अच्छे काम कर सकें, तो उनकी यह दरख़्वास्त हरगिज़ क़बूल नहीं की जाएगी। न उन्हें माफ़ किया जाएगा, न उनकी कोई बहाना-तराशी काम आएगी, और न ही उन्हें अल्लाह की रज़ा और जन्नत नसीब होगी। यानी उनके लिए हर तरफ़ से मायूसी और हलाकत ही है।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें चेतावनी देती है कि आज का दिन अमल का है, और कल का दिन हिसाब का। जो लोग आज अल्लाह की नाफ़रमानी में जी रहे हैं, वे कल पछताएँगे, लेकिन पछताना और माफ़ी माँगना उस वक़्त बेकार होगा। अल्लाह ने हमें दुनिया में ज़िंदगी दी है ताकि हम तौबा करें, अपने गुनाहों से बाज़ आएँ और अच्छे काम करें। यह बहुत बड़ी रहमत है कि आज का दरवाज़ा खुला है—जो चाहे रुजू कर ले, अल्लाह उसे माफ़ कर देता है। लेकिन क़यामत का दिन आने के बाद कोई मौक़ा नहीं मिलेगा। इसलिए ऐ बंदे! अभी से अपनी ज़िंदगी को संवार ले, अल्लाह की रहमत का सहारा ले, और उसकी नाराज़गी से बचने की कोशिश कर। यही कामयाबी की राह है। अल्लाह हम सबको समझ दे और सीधी राह पर चलाए। आमीन।
📜 आयत 22-26 — सूरा फुस्सिलत
अनुवाद — फुस्सिलत 24
सूरा फुस्सिलत आयत 24 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर अगर ये लोग सब्र भी करें तो भी इनका…सूरा आयत 24/54 — सूरा फुस्सिलत فصلت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा फुस्सिलत सुनें, सूरा फुस्सिलत अनुवाद, सूरा फुस्सिलत mp3, सूरा फुस्सिलत pdf. आयत 22–26. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा फुस्सिलत
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


