फुस्सिलत · 24/54
अनुवाद उच्चारण — फुस्सिलत
فَإِن يَصْبِرُوا فَالنَّارُ مَثْوًى لَّهُمْ ۖ وَإِن يَسْتَعْتِبُوا فَمَا هُم مِّنَ الْمُعْتَبِينَ ۝٢٤
Fa-iny yasbiroo fan Naaru maswal lahum wa iny-yasta`tiboo famaa hum minal mu`tabeen
📖 हिंदी अर्थ
फिर अगर ये लोग सब्र भी करें तो भी इनका ठिकाना दोज़ख़ ही है और अगर तौबा करें तो भी इनकी तौबा क़ुबूल न की जाएगी

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَصْبِرُوا: सब्र करें, सहन करें।
  • مَثْوًى: ठिकाना, निवास स्थान।
  • يَسْتَعْتِبُوا: रिआयत या माफ़ी की दरख़्वास्त करें, यानी अल्लाह की नाराज़गी दूर करने और उसकी ख़ुशी हासिल करने की गुज़ारिश करें।
  • الْمُعْتَبِينَ: वे लोग जिनकी दरख़्वास्त क़बूल की जाए और जिन्हें माफ़ कर दिया जाए।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के हाल का बयान कर रही है जिन्होंने दुनिया में अल्लाह की आयतों को झुठलाया और अपने गुनाहों पर अड़े रहे। क़यामत के दिन जब उनके ख़िलाफ़ उनके कान, आँखें और खालें गवाही देंगी, तो वे सज़ा से बचने की कोई सूरत न पाएँगे। अल्लाह फ़रमाता है कि अगर ये लोग आज़ाब (अज़ाब) पर सब्र करें, तो भी उनका ठिकाना जहन्नुम की आग ही है—वहाँ वे हमेशा रहेंगे, और सब्र करना या न करना उनके लिए बराबर है, क्योंकि सज़ा टलने वाली नहीं। और अगर वे माफ़ी की दरख़्वास्त करें, अल्लाह से रिआयत चाहें, या दुनिया में वापस भेजे जाने की गुज़ारिश करें ताकि अच्छे काम कर सकें, तो उनकी यह दरख़्वास्त हरगिज़ क़बूल नहीं की जाएगी। न उन्हें माफ़ किया जाएगा, न उनकी कोई बहाना-तराशी काम आएगी, और न ही उन्हें अल्लाह की रज़ा और जन्नत नसीब होगी। यानी उनके लिए हर तरफ़ से मायूसी और हलाकत ही है।

दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें चेतावनी देती है कि आज का दिन अमल का है, और कल का दिन हिसाब का। जो लोग आज अल्लाह की नाफ़रमानी में जी रहे हैं, वे कल पछताएँगे, लेकिन पछताना और माफ़ी माँगना उस वक़्त बेकार होगा। अल्लाह ने हमें दुनिया में ज़िंदगी दी है ताकि हम तौबा करें, अपने गुनाहों से बाज़ आएँ और अच्छे काम करें। यह बहुत बड़ी रहमत है कि आज का दरवाज़ा खुला है—जो चाहे रुजू कर ले, अल्लाह उसे माफ़ कर देता है। लेकिन क़यामत का दिन आने के बाद कोई मौक़ा नहीं मिलेगा। इसलिए ऐ बंदे! अभी से अपनी ज़िंदगी को संवार ले, अल्लाह की रहमत का सहारा ले, और उसकी नाराज़गी से बचने की कोशिश कर। यही कामयाबी की राह है। अल्लाह हम सबको समझ दे और सीधी राह पर चलाए। आमीन।



📜 आयत 22-26 — फुस्सिलत

22وَمَا كُنتُمْ تَسْتَتِرُونَ أَن يَشْهَدَ عَلَيْكُمْ سَمْعُكُمْ وَلَا أَبْصَارُكُمْ وَلَا جُلُودُكُمْ وَلَٰكِن ظَنَنتُمْ أَنَّ اللَّهَ لَا يَعْلَمُ كَثِيرًا مِّمَّا تَعْمَلُونَ
और (तुम्हारी तो ये हालत थी कि) तुम लोग इस ख्याल से (अपने गुनाहों की) पर्दा दारी भी तो नहीं करते थे कि तुम्हारे कान और तुम्हारी ऑंखे और तुम्हारे आज़ा तुम्हारे बरख़िलाफ गवाही देंगे बल्कि तुम इस ख्याल मे (भूले हुए) थे कि ख़ुदा को तुम्हारे बहुत से कामों की ख़बर ही नहीं
23وَذَٰلِكُمْ ظَنُّكُمُ الَّذِي ظَنَنتُم بِرَبِّكُمْ أَرْدَاكُمْ فَأَصْبَحْتُم مِّنَ الْخَاسِرِينَ
और तुम्हारी इस बदख्याली ने जो तुम अपने परवरदिगार के बारे में रखते थे तुम्हें तबाह कर छोड़ा आख़िर तुम घाटे में रहे
24فَإِن يَصْبِرُوا فَالنَّارُ مَثْوًى لَّهُمْ ۖ وَإِن يَسْتَعْتِبُوا فَمَا هُم مِّنَ الْمُعْتَبِينَ
फिर अगर ये लोग सब्र भी करें तो भी इनका ठिकाना दोज़ख़ ही है और अगर तौबा करें तो भी इनकी तौबा क़ुबूल न की जाएगी
25۞ وَقَيَّضْنَا لَهُمْ قُرَنَاءَ فَزَيَّنُوا لَهُم مَّا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ وَحَقَّ عَلَيْهِمُ الْقَوْلُ فِي أُمَمٍ قَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِهِم مِّنَ الْجِنِّ وَالْإِنسِ ۖ إِنَّهُمْ كَانُوا خَاسِرِينَ
और हमने (गोया ख़ुद शैतान को) उनका हमनशीन मुक़र्रर कर दिया था तो उन्होने उनके अगले पिछले तमाम उमूर उनकी नज़रों में भले कर दिखाए तो जिन्नात और इन्सानो की उम्मतें जो उनसे पहले गुज़र चुकी थीं उनके शुमूल (साथ) में (अज़ाब का) वायदा उनके हक़ में भी पूरा हो कर रहा बेशक ये लोग अपने घाटे के दरपै थे
26وَقَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا لَا تَسْمَعُوا لِهَٰذَا الْقُرْآنِ وَالْغَوْا فِيهِ لَعَلَّكُمْ تَغْلِبُونَ
और कुफ्फ़ार कहने लगे कि इस क़ुरान को सुनो ही नहीं और जब पढ़ें (तो) इसके (बीच) में ग़ुल मचा दिया करो ताकि (इस तरकीब से) तुम ग़ालिब आ जाओ
फुस्सिलतकुरान सूची
54आयत
मक्कीRevelation
24आयत

अनुवाद — फुस्सिलत 24

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Tuesday, August 18, 2026

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