फुस्सिलत · 42/54
अनुवाद उच्चारण — फुस्सिलत
لَّا يَأْتِيهِ الْبَاطِلُ مِن بَيْنِ يَدَيْهِ وَلَا مِنْ خَلْفِهِ ۖ تَنزِيلٌ مِّنْ حَكِيمٍ حَمِيدٍ ۝٤٢
Laa yaateehil baatilu mim baini yadaihi wa laa min khalfihee tanzeelum min Hakeemin Hameed
📖 हिंदी अर्थ
कि झूठ न तो उसके आगे फटक सकता है और न उसके पीछे से और खूबियों वाले दाना (ख़ुदा) की बारगाह से नाज़िल हुई है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • الباطل: असत्य, झूठ, विकृति, या ऐसी कोई चीज़ जो सत्य को मिटा दे।
  • من بين يديه: इसके सामने से, अर्थात इससे पहले की किताबों की ओर से।
  • من خلفه: इसके पीछे से, अर्थात इसके बाद आने वाले विचारों या आलोचनाओं की ओर से।
  • تنزيل: उतारा हुआ, अवतरित।
  • حكيم: अत्यंत तत्वदर्शी, जो हर काम हिकमत (बुद्धिमत्ता) से करे।
  • حميد: प्रशंसित, जो अपने गुणों के कारण हर प्रकार की प्रशंसा का हकदार हो।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत क़ुरआन की महानता और उसकी सुरक्षा का अद्भुत वर्णन करती है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यह क़ुरआन ऐसी किताब है जिसके पास न आगे से कोई बातिल (असत्य) आ सकता है और न पीछे से। यानी न तो इससे पहले की किताबों में कोई ऐसी बात है जो इसे झुठला सके या इसकी सच्चाई पर कोई शक डाल सके, और न ही भविष्य में कोई ऐसा विचार, तर्क या आलोचना आ सकती है जो इसे बातिल कर सके।

क़ुरआन हर तरह की मिलावट, कमी, ज़्यादती, बदलाव और तहरीफ़ से महफूज़ है। अल्लाह ने इसे अपनी कुदरत से हर उस चीज़ से बचा रखा है जो इसे नुक़्सान पहुँचा सके। यह एक ऐसी किताब है जो क़यामत तक ऐसी ही रहेगी जैसी उतारी गई थी।

फिर अल्लाह फ़रमाता है कि यह क़ुरआन उस अल्लाह की तरफ से उतारा गया है जो हकीम (अत्यंत तत्वदर्शी) है और हमीद (प्रशंसित) है। वह हर काम हिकमत से करता है, और उसकी हर मख़लूक़ उसकी तारीफ़ करती है। यह क़ुरआन भी उसी की हिकमत का नतीजा है — इसमें जो भी हुक्म, अक़ीदा, अख़लाक़ और क़ानून हैं, सब अल्लाह की हिकमत पर आधारित हैं और इंसानियत के लिए बेहतरीन हैं।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि क़ुरआन एक ऐसा खज़ाना है जिसे अल्लाह ने खुद सुरक्षित किया है। जिस किताब की हिफ़ाज़त खुद अल्लाह कर रहा हो, उस पर भरोसा करना कितनी बड़ी नेमत है! आज दुनिया की तमाम किताबें बदलती रहती हैं, लेकिन क़ुरआन का हर हर्फ़ वैसा ही है जैसा 1400 साल पहले था। यही इसकी सच्चाई की सबसे बड़ी गवाही है।

इसलिए हमें चाहिए कि इस किताब को पढ़ें, समझें और इस पर अमल करें। जो लोग इस पर अमल करते हैं, अल्लाह उन्हें दुनिया और आख़िरत में इज़्ज़त देता है। यह किताब हर उस इंसान के लिए रहनुमा है जो सच्चाई की तलाश में है। आइए, हम इस किताब को अपनी ज़िंदगी का नक्शा बनाएँ और इसकी रोशनी में चलें — यही हमारी कामयाबी है।

🎧 सुनें

📜 आयत 40-44 — फुस्सिलत

40إِنَّ الَّذِينَ يُلْحِدُونَ فِي آيَاتِنَا لَا يَخْفَوْنَ عَلَيْنَا ۗ أَفَمَن يُلْقَىٰ فِي النَّارِ خَيْرٌ أَم مَّن يَأْتِي آمِنًا يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۚ اعْمَلُوا مَا شِئْتُمْ ۖ إِنَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌ
जो लोग हमारी आयतों में हेर फेर पैदा करते हैं वह हरगिज़ हमसे पोशीदा नहीं हैं भला जो शख्स दोज़ख़ में डाला जाएगा वह बेहतर है या वह शख्स जो क़यामत के दिन बेख़ौफ व ख़तर आएगा (ख़ैर) जो चाहो सो करो (मगर) जो कुछ तुम करते हो वह (ख़ुदा) उसको देख रहा है
41إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا بِالذِّكْرِ لَمَّا جَاءَهُمْ ۖ وَإِنَّهُ لَكِتَابٌ عَزِيزٌ
जिन लोगों ने नसीहत को जब वह उनके पास आयी न माना (वह अपना नतीजा देख लेंगे) और ये क़ुरान तो यक़ीनी एक आली मरतबा किताब है
42لَّا يَأْتِيهِ الْبَاطِلُ مِن بَيْنِ يَدَيْهِ وَلَا مِنْ خَلْفِهِ ۖ تَنزِيلٌ مِّنْ حَكِيمٍ حَمِيدٍ
कि झूठ न तो उसके आगे फटक सकता है और न उसके पीछे से और खूबियों वाले दाना (ख़ुदा) की बारगाह से नाज़िल हुई है
43مَّا يُقَالُ لَكَ إِلَّا مَا قَدْ قِيلَ لِلرُّسُلِ مِن قَبْلِكَ ۚ إِنَّ رَبَّكَ لَذُو مَغْفِرَةٍ وَذُو عِقَابٍ أَلِيمٍ
(ऐ रसूल) तुमसे से भी बस वही बातें कहीं जाती हैं जो तुमसे और रसूलों से कही जा चुकी हैं बेशक तुम्हारा परवरदिगार बख्शने वाला भी है और दर्दनाक अज़ाब वाला भी है
44وَلَوْ جَعَلْنَاهُ قُرْآنًا أَعْجَمِيًّا لَّقَالُوا لَوْلَا فُصِّلَتْ آيَاتُهُ ۖ أَأَعْجَمِيٌّ وَعَرَبِيٌّ ۗ قُلْ هُوَ لِلَّذِينَ آمَنُوا هُدًى وَشِفَاءٌ ۖ وَالَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ فِي آذَانِهِمْ وَقْرٌ وَهُوَ عَلَيْهِمْ عَمًى ۚ أُولَٰئِكَ يُنَادَوْنَ مِن مَّكَانٍ بَعِيدٍ
और अगर हम इस क़ुरान को अरबी ज़बान के सिवा दूसरी ज़बान में नाज़िल करते तो ये लोग ज़रूर कह न बैठते कि इसकी आयतें (हमारी) ज़बान में क्यों तफ़सीलदार बयान नहीं की गयी क्या (खूब क़ुरान तो) अजमी और (मुख़ातिब) अरबी (ऐ रसूल) तुम कह दो कि ईमानदारों के लिए तो ये (कुरान अज़सरतापा) हिदायत और (हर मर्ज़ की) शिफ़ा है और जो लोग ईमान नहीं रखते उनके कानों (के हक़) में गिरानी (बहरापन) है और वह (कुरान) उनके हक़ में नाबीनाई (का सबब) है तो गिरानी की वजह से गोया वह लोग बड़ी दूर की जगह से पुकारे जाते है
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Tuesday, August 18, 2026

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