फुस्सिलत · 6/54
अनुवाद उच्चारण — फुस्सिलत
قُلْ إِنَّمَا أَنَا بَشَرٌ مِّثْلُكُمْ يُوحَىٰ إِلَيَّ أَنَّمَا إِلَٰهُكُمْ إِلَٰهٌ وَاحِدٌ فَاسْتَقِيمُوا إِلَيْهِ وَاسْتَغْفِرُوهُ ۗ وَوَيْلٌ لِّلْمُشْرِكِينَ ۝٦
Qul innamaaa ana basharum mislukum yoohaaa ilaiya annamaaa ilaahukum Ilaahunw Waahidun fastaqeemooo ilaihi wastagfirooh; wa wailul lil mushrikeen
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) कह दो कि मैं भी बस तुम्हारा ही सा आदमी हूँ (मगर फ़र्क ये है कि) मुझ पर 'वही' आती है कि तुम्हारा माबूद बस (वही) यकता ख़ुदा है तो सीधे उसकी तरफ मुतावज्जे रहो और उसी से बख़शिश की दुआ माँगो, और मुशरेकों पर अफसोस है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَاسْتَقِيمُوا إِلَيْهِ: उसकी ओर सीधे रास्ते पर चलो, उसी की ओर पूरी तरह रुजू हो जाओ, उसकी इबादत और आज्ञाकारिता में दृढ़ रहो।
  • اسْتَغْفِرُوهُ: उससे अपने गुनाहों की माफ़ी माँगो।
  • وَيْلٌ: विनाश, बुरा अंजाम, या कठोर यातना।

तफसीर:

ऐ नबी! आप इन लोगों से कह दीजिए कि मैं कोई फरिश्ता या जिन्न नहीं हूँ, बल्कि मैं तुम्हारी तरह एक इंसान हूँ। मुझमें कोई खुदाई या फरिश्तों वाली खासियत नहीं है। मेरी पहचान और मेरा दर्जा सिर्फ इसी बात से है कि अल्लाह की तरफ से मेरी तरफ वही (प्रकाशना) आती है। अगर वह वही न आती तो मैं भी तुम्हारी तरह एक आम इंसान होता और तुम्हें दावत न देता। इस वही के ज़रिए मुझे बताया गया है कि तुम्हारा सच्चा माबूद (पूज्य) सिर्फ एक ही है — वह अल्लाह जो अकेला है, उसका कोई साझीदार नहीं। वही इबादत के लायक़ है, उसके अलावा जिन्हें तुम पुकारते हो वे सब झूठे और बेबस हैं।

इसलिए तुम सब उसी की तरफ सीधे रास्ते पर चलो — यानी अपने दिलों को उसकी तरफ मोड़ो, अपने अमल को उसकी रज़ा के मुताबिक बनाओ, और उसकी इबादत में किसी को साझी न बनाओ। साथ ही अपनी कमियों और गुनाहों की माफ़ी उसी से माँगो, क्योंकि वही माफ़ करने वाला और दयालु है। जो लोग उसकी तरफ रुजू होंगे और उससे माफ़ी माँगेंगे, अल्लाह उनके गुनाह मिटा देगा और उन्हें अपनी रहमत से नवाज़ेगा।

और जो लोग शिर्क करते हैं — यानी अल्लाह के साथ दूसरों को पूजते हैं, मूर्तियों और झूठे माबूदों को पुकारते हैं — उनके लिए विनाश और बुरा अंजाम है। वे न तो अल्लाह की इबादत में खरे हैं, न ही लोगों के भले में काम आते हैं। वे आख़िरत पर ईमान नहीं रखते, न जन्नत और जहन्नम पर यक़ीन रखते हैं, और न ही अल्लाह की राह में खर्च करते हैं। उनका अंजाम जहन्नम की आग और सख्त अज़ाब है।

दावत और नसीहत:

यह आयत हमें सिखाती है कि नबी भी इंसान थे, लेकिन उन्हें अल्लाह की तरफ से वही मिली। यह हमारे लिए बहुत बड़ी नेमत है कि हमें सच्चा रास्ता मिला। हमें चाहिए कि अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत और उसकी रज़ा के मुताबिक बनाएँ, उसी से माफ़ी माँगते रहें, और शिर्क से बचें। अल्लाह बहुत मेहरबान है — जो भी उसकी तरफ सच्चे दिल से मुड़ता है, वह उसे अपनी रहमत से भर देता है। आओ, हम सब अपने दिलों को अल्लाह की तरफ मोड़ें, उससे माफ़ी माँगें और सीधे रास्ते पर चलें — यही हमारी कामयाबी और खुशी का रास्ता है।



📜 आयत 4-8 — फुस्सिलत

4بَشِيرًا وَنَذِيرًا فَأَعْرَضَ أَكْثَرُهُمْ فَهُمْ لَا يَسْمَعُونَ
ं(नेको कारों को) ख़़ुशख़बरी देने वाली और (बदकारों को) डराने वाली है इस पर भी उनमें से अक्सर ने मुँह फेर लिया और वह सुनते ही नहीं
5وَقَالُوا قُلُوبُنَا فِي أَكِنَّةٍ مِّمَّا تَدْعُونَا إِلَيْهِ وَفِي آذَانِنَا وَقْرٌ وَمِن بَيْنِنَا وَبَيْنِكَ حِجَابٌ فَاعْمَلْ إِنَّنَا عَامِلُونَ
और कहने लगे जिस चीज़ की तरफ तुम हमें बुलाते हो उससे तो हमारे दिल पर्दों में हैं (कि दिल को नहीं लगती) और हमारे कानों में गिर्दानी (बहरापन है) कि कुछ सुनायी नहीं देता और हमारे तुम्हारे दरमियान एक पर्दा (हायल) है तो तुम (अपना) काम करो हम (अपना) काम करते हैं
6قُلْ إِنَّمَا أَنَا بَشَرٌ مِّثْلُكُمْ يُوحَىٰ إِلَيَّ أَنَّمَا إِلَٰهُكُمْ إِلَٰهٌ وَاحِدٌ فَاسْتَقِيمُوا إِلَيْهِ وَاسْتَغْفِرُوهُ ۗ وَوَيْلٌ لِّلْمُشْرِكِينَ
(ऐ रसूल) कह दो कि मैं भी बस तुम्हारा ही सा आदमी हूँ (मगर फ़र्क ये है कि) मुझ पर 'वही' आती है कि तुम्हारा माबूद बस (वही) यकता ख़ुदा है तो सीधे उसकी तरफ मुतावज्जे रहो और उसी से बख़शिश की दुआ माँगो, और मुशरेकों पर अफसोस है
7الَّذِينَ لَا يُؤْتُونَ الزَّكَاةَ وَهُم بِالْآخِرَةِ هُمْ كَافِرُونَ
जो ज़कात नहीं देते और आखेरत के भी क़ायल नहीं
8إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَهُمْ أَجْرٌ غَيْرُ مَمْنُونٍ
बेशक जो लोग ईमान लाए और अच्छे अच्छे काम करते रहे और उनके लिए वह सवाब है जो कभी ख़त्म होने वाला नहीं
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अनुवाद — फुस्सिलत 6

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Tuesday, August 18, 2026

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