फुस्सिलत · 7/54
अनुवाद उच्चारण — सूरा फुस्सिलत
الَّذِينَ لَا يُؤْتُونَ الزَّكَاةَ وَهُم بِالْآخِرَةِ هُمْ كَافِرُونَ ۝٧
Allazeena laa yu`toonaz Zakaata wa hum bil-Aakhiratihum kaafiroon
📖 हिंदी अर्थ
जो ज़कात नहीं देते और आखेरत के भी क़ायल नहीं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَا يُؤْتُونَ الزَّكَاةَ: जो ज़कात नहीं देते। इसका एक अर्थ यह भी है कि जो लोग "ला इलाहा इल्लल्लाह" का कलमा नहीं कहते, यानी अपने आपको शिर्क से पाक नहीं करते।
  • بِالْآخِرَةِ: आख़िरत (प्रलोक) पर।
  • كَافِرُونَ: कुफ़्र करने वाले, न मानने वाले।

संपूर्ण व्याख्या:

अल्लाह तआला इस आयत में उन लोगों का हाल बयान कर रहा है जो अपने रब की इबादत से मुँह मोड़ते हैं और उसकी नेमतों का शुक्र अदा नहीं करते। ये वे लोग हैं जो ज़कात अदा नहीं करते—या तो वे अपने माल की ज़कात नहीं देते, या फिर इसका गहरा अर्थ यह है कि वे अपने नफ़्स को शिर्क से पाक नहीं करते, यानी तौहीद के ज़रिए अपने दिलों को गंदगी से साफ़ नहीं करते। वे न अल्लाह की इबादत के लिए झुकते हैं, न अपने भाई-बहनों के हक़ अदा करते हैं। उनके अंदर न ख़ालिक़ (रचयिता) के प्रति इख़लास है, न मख़लूक़ (सृष्टि) के प्रति नेकी और भलाई।

और सबसे बड़ी बात यह कि वे आख़िरत को नहीं मानते। उन्हें न जन्नत का यक़ीन है, न जहन्नम का डर। वे इस बात पर ईमान नहीं रखते कि एक दिन उन्हें मरने के बाद जीवित होकर अपने अमलों का हिसाब देना है। यही उनका कुफ़्र है—आख़िरत का इनकार ही उनके सारे आमाल को बर्बाद कर देता है।

दावती पहलू:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें एक अहम सबक़ सिखाती है। जो व्यक्ति ज़कात नहीं देता, उसका दिल दुनिया की मुहब्बत में डूबा होता है, और जो आख़िरत पर ईमान नहीं रखता, उसकी ज़िंदगी का कोई मक़सद नहीं बचता। इसके विपरीत, जो मोमिन है, वह अपने माल को अल्लाह की राह में ख़र्च करता है, अपने नफ़्स को शिर्क और बुराइयों से पाक रखता है, और आख़िरत के दिन पर पक्का यक़ीन रखते हुए नेक अमल करता है। यही वह रास्ता है जो हमें जन्नत तक पहुँचाता है।

आओ, हम अपने दिलों को तौहीद की रोशनी से रोशन करें, अपने मालों में अल्लाह का हक़ (ज़कात) अदा करें, और आख़िरत के उस दिन की तैयारी करें जब कोई माल और औलाद काम न आएगी, सिवाय उसके जो साफ़ दिल के साथ अल्लाह के पास आएगा। याद रखिए, ज़कात सिर्फ़ एक इबादत नहीं, बल्कि हमारे दिल की पवित्रता और समाज की भलाई का ज़रिया है। अल्लाह हमें अमल की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 5-9 — सूरा फुस्सिलत

5وَقَالُوا قُلُوبُنَا فِي أَكِنَّةٍ مِّمَّا تَدْعُونَا إِلَيْهِ وَفِي آذَانِنَا وَقْرٌ وَمِن بَيْنِنَا وَبَيْنِكَ حِجَابٌ فَاعْمَلْ إِنَّنَا عَامِلُونَ
और कहने लगे जिस चीज़ की तरफ तुम हमें बुलाते हो उससे तो हमारे दिल पर्दों में हैं (कि दिल को नहीं लगती) और हमारे कानों में गिर्दानी (बहरापन है) कि कुछ सुनायी नहीं देता और हमारे तुम्हारे दरमियान एक पर्दा (हायल) है तो तुम (अपना) काम करो हम (अपना) काम करते हैं
6قُلْ إِنَّمَا أَنَا بَشَرٌ مِّثْلُكُمْ يُوحَىٰ إِلَيَّ أَنَّمَا إِلَٰهُكُمْ إِلَٰهٌ وَاحِدٌ فَاسْتَقِيمُوا إِلَيْهِ وَاسْتَغْفِرُوهُ ۗ وَوَيْلٌ لِّلْمُشْرِكِينَ
(ऐ रसूल) कह दो कि मैं भी बस तुम्हारा ही सा आदमी हूँ (मगर फ़र्क ये है कि) मुझ पर 'वही' आती है कि तुम्हारा माबूद बस (वही) यकता ख़ुदा है तो सीधे उसकी तरफ मुतावज्जे रहो और उसी से बख़शिश की दुआ माँगो, और मुशरेकों पर अफसोस है
7الَّذِينَ لَا يُؤْتُونَ الزَّكَاةَ وَهُم بِالْآخِرَةِ هُمْ كَافِرُونَ
जो ज़कात नहीं देते और आखेरत के भी क़ायल नहीं
8إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَهُمْ أَجْرٌ غَيْرُ مَمْنُونٍ
बेशक जो लोग ईमान लाए और अच्छे अच्छे काम करते रहे और उनके लिए वह सवाब है जो कभी ख़त्म होने वाला नहीं
9۞ قُلْ أَئِنَّكُمْ لَتَكْفُرُونَ بِالَّذِي خَلَقَ الْأَرْضَ فِي يَوْمَيْنِ وَتَجْعَلُونَ لَهُ أَندَادًا ۚ ذَٰلِكَ رَبُّ الْعَالَمِينَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि क्या तुम उस (ख़ुदा) से इन्कार करते हो जिसने ज़मीन को दो दिन में पैदा किया और तुम (औरों को) उसका हमसर बनाते हो, यही तो सारे जहाँ का सरपरस्त है
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अनुवाद — फुस्सिलत 7

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Tuesday, September 29, 2026

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