फुस्सिलत · 8/54
अनुवाद उच्चारण — फुस्सिलत
إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَهُمْ أَجْرٌ غَيْرُ مَمْنُونٍ ۝٨
Innal lazeena aamanoo wa `amilus saalihaati lahum ajrun ghairu mamnoon
📖 हिंदी अर्थ
बेशक जो लोग ईमान लाए और अच्छे अच्छे काम करते रहे और उनके लिए वह सवाब है जो कभी ख़त्म होने वाला नहीं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • آمَنُوا: ईमान लाए, अल्लाह, उसके रसूल और उसकी किताब पर पूर्ण विश्वास किया।
  • عَمِلُوا الصَّالِحَاتِ: अच्छे और नेक कर्म किए, जो अल्लाह की रज़ा के लिए हों।
  • أَجْرٌ: बदला, इनाम, प्रतिफल।
  • غَيْرُ مَمْنُونٍ: जो कभी खत्म न हो, न काटा जाए, न रोका जाए, और न ही घटाया जाए — यानी अनवरत और अपूर्ण।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस पवित्र आयत में उन लोगों को खुशखबरी सुना रहा है जो ईमान लाए और अपने ईमान को सिर्फ ज़ुबान तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे अपने अमल से साबित किया। उन्होंने नेक कर्म किए — नमाज़ क़ायम की, ज़कात दी, रोज़े रखे, हज किया, लोगों की मदद की, सच बोला, अमानत अदा की, और हर अच्छे काम को अल्लाह की रज़ा के लिए किया, बिना किसी दिखावे के।

ऐसे लोगों के लिए अल्लाह ने वादा किया है "أَجْرٌ غَيْرُ مَمْنُونٍ" — यानी ऐसा इनाम जो कभी खत्म नहीं होगा, जिसमें कोई कमी नहीं आएगी, जिसे कोई रोक नहीं सकता और न ही वह कभी काटा जाएगा। यह इनाम जन्नत है — जो हमेशा रहने वाली है, जिसकी नेमतें कभी समाप्त नहीं होतीं, और जिसका सुख कभी घटता नहीं।

यह अल्लाह का असीम करम है कि उसने अपने नेक बंदों को ऐसा इनाम देने का वादा किया जो दुनिया के किसी भी इनाम से बेहतर है। दुनिया का हर इनाम खत्म होने वाला है, हर सुख क्षणिक है, लेकिन अल्लाह का दिया हुआ इनाम हमेशा रहने वाला है।

दावती पहलू:

यह आयत हर उस इंसान के लिए एक रोशनी है जो सच्ची कामयाबी की तलाश में है। यह बताती है कि असली कामयाबी दौलत, शोहरत या दुनिया के ऊँचे पदों में नहीं है, बल्कि उस ईमान में है जो दिल में जड़ें जमाए और उस अमल में है जो अल्लाह की रज़ा के लिए किया जाए। जो इंसान इस रास्ते पर चलता है, उसका अंजाम जन्नत है — जहाँ हर दर्द खत्म, हर ग़म दूर, और हर खुशी हमेशा के लिए मौजूद है।

तो आओ, हम अपने ईमान को मज़बूत करें और अपने अमल को सुधारें, ताकि हम भी उन खुशनसीबों में शामिल हो सकें जिनके लिए यह अटूट इनाम तैयार किया गया है। अल्लाह हम सबको इस तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 6-10 — फुस्सिलत

6قُلْ إِنَّمَا أَنَا بَشَرٌ مِّثْلُكُمْ يُوحَىٰ إِلَيَّ أَنَّمَا إِلَٰهُكُمْ إِلَٰهٌ وَاحِدٌ فَاسْتَقِيمُوا إِلَيْهِ وَاسْتَغْفِرُوهُ ۗ وَوَيْلٌ لِّلْمُشْرِكِينَ
(ऐ रसूल) कह दो कि मैं भी बस तुम्हारा ही सा आदमी हूँ (मगर फ़र्क ये है कि) मुझ पर 'वही' आती है कि तुम्हारा माबूद बस (वही) यकता ख़ुदा है तो सीधे उसकी तरफ मुतावज्जे रहो और उसी से बख़शिश की दुआ माँगो, और मुशरेकों पर अफसोस है
7الَّذِينَ لَا يُؤْتُونَ الزَّكَاةَ وَهُم بِالْآخِرَةِ هُمْ كَافِرُونَ
जो ज़कात नहीं देते और आखेरत के भी क़ायल नहीं
8إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَهُمْ أَجْرٌ غَيْرُ مَمْنُونٍ
बेशक जो लोग ईमान लाए और अच्छे अच्छे काम करते रहे और उनके लिए वह सवाब है जो कभी ख़त्म होने वाला नहीं
9۞ قُلْ أَئِنَّكُمْ لَتَكْفُرُونَ بِالَّذِي خَلَقَ الْأَرْضَ فِي يَوْمَيْنِ وَتَجْعَلُونَ لَهُ أَندَادًا ۚ ذَٰلِكَ رَبُّ الْعَالَمِينَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि क्या तुम उस (ख़ुदा) से इन्कार करते हो जिसने ज़मीन को दो दिन में पैदा किया और तुम (औरों को) उसका हमसर बनाते हो, यही तो सारे जहाँ का सरपरस्त है
10وَجَعَلَ فِيهَا رَوَاسِيَ مِن فَوْقِهَا وَبَارَكَ فِيهَا وَقَدَّرَ فِيهَا أَقْوَاتَهَا فِي أَرْبَعَةِ أَيَّامٍ سَوَاءً لِّلسَّائِلِينَ
और उसी ने ज़मीन में उसके ऊपर से पहाड़ पैदा किए और उसी ने इसमें बरकत अता की और उसी ने एक मुनासिब अन्दाज़ पर इसमें सामाने माईशत का बन्दोबस्त किया (ये सब कुछ) चार दिन में और तमाम तलबगारों के लिए बराबर है
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अनुवाद — फुस्सिलत 8

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Tuesday, August 18, 2026

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