अश-शूरा · 34/53
अनुवाद उच्चारण — अश-शूरा
أَوْ يُوبِقْهُنَّ بِمَا كَسَبُوا وَيَعْفُ عَن كَثِيرٍ ۝٣٤
Aw yoobiqhunna bimaa kasaboo wa ya`fu `an kaseer
📖 हिंदी अर्थ
(या वह चाहे तो) उनको उनके आमाल (बद) के सबब तबाह कर दे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَوْ يُوبِقْهُنَّ (या उन्हें विनष्ट कर दे) — यानी उन जहाज़ों को डुबो कर या तबाह कर के हलाक कर दे।
  • بِمَا كَسَبُوا (उनके कमाए हुए गुनाहों की वजह से) — यानी लोगों के गुनाहों और पापों के कारण।
  • وَيَعْفُ عَن كَثِيرٍ (और बहुत से गुनाहों से दरगुज़र करता है) — यानी अल्लाह तआला बहुत से पापों को माफ़ कर देता है और उन पर सज़ा नहीं देता।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपनी क़ुदरत और इख़्तियार की निशानियाँ बयान करते हुए फ़रमाता है कि जिस तरह वह समुद्र में जहाज़ों को चलाने की ताक़त देता है, उसी तरह वह चाहे तो उन्हें हलाक कर दे। जब लोग अपने गुनाहों और नाफ़रमानियों में मुब्तिला हो जाते हैं, तो अल्लाह तआला चाहे तो उनके इन्हीं गुनाहों की सज़ा में तेज़ हवाएँ भेज कर उन जहाज़ों को डुबो दे या उन्हें तबाह कर दे। यह अल्लाह की रहमत और करम है कि वह फ़ौरन सज़ा नहीं देता, बल्कि बहुत से गुनाहों से दरगुज़र करता है और अपने बंदों को मौक़ा देता है कि वे तौबा कर लें।

यह आयत हमें अल्लाह की क़ुदरत और उसकी रहमत दोनों की याद दिलाती है। एक तरफ़ अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है — अगर वह चाहे तो एक पल में सब कुछ तबाह कर दे, कोई उसे रोक नहीं सकता। दूसरी तरफ़ उसकी रहमत बहुत वसीअ है — वह चाहता तो हर गुनाह पर फ़ौरन सज़ा देता, लेकिन वह अपने बंदों पर मेहरबानी करता है और बहुत से गुनाहों को माफ़ कर देता है।

इस आयत से हमें सबक़ लेना चाहिए कि हम अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा करें और उसकी नाफ़रमानी से बचें। जब हम देखते हैं कि समुद्र में जहाज़ चलते हैं और अपनी मंज़िल तक पहुँचते हैं, तो यह अल्लाह ही की मेहरबानी है। अगर वह चाहे तो उन्हें ग़रक़ कर दे। इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह की रहमत के तलबगार रहें, उससे माफ़ी माँगते रहें, और याद रखें कि अल्लाह की पकड़ से बचने का एक ही रास्ता है — तौबा और इस्तिग़फ़ार। अल्लाह तआला बड़ा माफ़ करने वाला और रहम करने वाला है, वह अपने बंदों के गुनाहों को माफ़ करना पसंद करता है, बशर्ते वे सच्चे दिल से उसकी तरफ़ रुजू करें।

🎧 सुनें

📜 आयत 32-36 — अश-शूरा

32وَمِنْ آيَاتِهِ الْجَوَارِ فِي الْبَحْرِ كَالْأَعْلَامِ
और उसी की (क़ुदरत) की निशानियों में से समन्दर में (चलने वाले) (बादबानी जहाज़) है जो गोया पहाड़ हैं
33إِن يَشَأْ يُسْكِنِ الرِّيحَ فَيَظْلَلْنَ رَوَاكِدَ عَلَىٰ ظَهْرِهِ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّكُلِّ صَبَّارٍ شَكُورٍ
अगर ख़ुदा चाहे तो हवा को ठहरा दे तो जहाज़ भी समन्दर की सतह पर (खड़े के खड़े) रह जाएँ बेशक तमाम सब्र और शुक्र करने वालों के वास्ते इन बातों में (ख़ुदा की क़ुदरत की) बहुत सी निशानियाँ हैं
34أَوْ يُوبِقْهُنَّ بِمَا كَسَبُوا وَيَعْفُ عَن كَثِيرٍ
(या वह चाहे तो) उनको उनके आमाल (बद) के सबब तबाह कर दे
35وَيَعْلَمَ الَّذِينَ يُجَادِلُونَ فِي آيَاتِنَا مَا لَهُم مِّن مَّحِيصٍ
और वह बहुत कुछ माफ़ करता है और जो लोग हमारी निशानियों में (ख्वाहमाख्वाह) झगड़ा करते हैं वह अच्छी तरह समझ लें कि उनको किसी तरह (अज़ाब से) छुटकारा नहीं
36فَمَا أُوتِيتُم مِّن شَيْءٍ فَمَتَاعُ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا ۖ وَمَا عِندَ اللَّهِ خَيْرٌ وَأَبْقَىٰ لِلَّذِينَ آمَنُوا وَعَلَىٰ رَبِّهِمْ يَتَوَكَّلُونَ
(लोगों) तुमको जो कुछ (माल) दिया गया है वह दुनिया की ज़िन्दगी का (चन्द रोज़) साज़ोसामान है और जो कुछ ख़ुदा के यहाँ है वह कहीं बेहतर और पायदार है (मगर ये) ख़ास उन ही लोगों के लिए है जो ईमान लाए और अपने परवरदिगार पर भरोसा रखते हैं
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अनुवाद — अश-शूरा 34

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Tuesday, August 18, 2026

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