अश-शूरा · 35/53
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शूरा
وَيَعْلَمَ الَّذِينَ يُجَادِلُونَ فِي آيَاتِنَا مَا لَهُم مِّن مَّحِيصٍ ۝٣٥
Wa ya`lamal lazeena yujaadiloona feee Aayaatinaa maa lahum mim mahees
📖 हिंदी अर्थ
और वह बहुत कुछ माफ़ करता है और जो लोग हमारी निशानियों में (ख्वाहमाख्वाह) झगड़ा करते हैं वह अच्छी तरह समझ लें कि उनको किसी तरह (अज़ाब से) छुटकारा नहीं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يُجَادِلُونَ – जो लोग झगड़ते हैं, विवाद करते हैं
  • آيَاتِنَا – हमारी आयतें, हमारे निशानियाँ (जो हमारी वहदानियत और क़ुदरत पर दलालत करती हैं)
  • مَحِيص – बचने की जगह, भागने का रास्ता, कोई पनाह या छुटकारा

तफ़सीर:

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जब वह अपनी क़ुदरत के नमूने दरिया में चलने वाले जहाज़ों के ज़रिए दिखाता है, और फिर चाहे तो हवा को रोक दे या तूफ़ान भेज दे, तो यह सब कुछ इस लिए होता है ताकि वे लोग जो हमारी आयतों में बातिल के साथ झगड़ते हैं और उन्हें बेकार करने की कोशिश करते हैं, वे जान लें कि उनके लिए अल्लाह के अज़ाब से बचने का कोई रास्ता नहीं, कोई पनाहगाह नहीं। जब सख्त मुसीबत आती है, तो वे देखते हैं कि सारे झूठे माबूद और सारी दुनियावी ताकतें बेकार हैं, और उन्हें सिर्फ अल्लाह ही की तरफ दौड़ना पड़ता है। मगर जब वह मुसीबत टल जाती है, तो वे फिर अपनी जिद और झगड़े पर लौट आते हैं।

यह आयत उन लोगों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो अल्लाह की आयतों को झुठलाते हैं और उनके खिलाफ झगड़ा करते हैं। अल्लाह तआला फरमाता है कि उनके लिए कोई भागने की जगह नहीं, न ज़मीन में कोई पनाह है और न आसमान में। अल्लाह की पकड़ से बचना नामुमकिन है। यह उनके लिए एक बड़ी नसीहत है कि वे अपनी जिद छोड़ दें और हक को कबूल कर लें, क्योंकि अल्लाह की कुदरत के आगे कोई ताकत नहीं चल सकती।

प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की निशानियों पर गौर करें, उनसे सबक लें, और उनमें झगड़ा न करें। जो लोग हक के खिलाफ जिद करते हैं, वे अंजाम में सिर्फ नुकसान उठाते हैं। अल्लाह की रहमत यह है कि उसने हमें कुरान और सुन्नत के जरिए सीधा रास्ता दिखाया है। हमें चाहिए कि इस रास्ते पर चलें और अल्लाह की पकड़ से डरें, क्योंकि उसकी पकड़ से बचने की कोई जगह नहीं। जो लोग अल्लाह की आयतों पर ईमान लाते हैं और उन पर अमल करते हैं, उनके लिए जन्नत की खुशखबरी है, और जो झगड़ते हैं, उनके लिए अज़ाब का डर है।



📜 आयत 33-37 — सूरा अश-शूरा

33إِن يَشَأْ يُسْكِنِ الرِّيحَ فَيَظْلَلْنَ رَوَاكِدَ عَلَىٰ ظَهْرِهِ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّكُلِّ صَبَّارٍ شَكُورٍ
अगर ख़ुदा चाहे तो हवा को ठहरा दे तो जहाज़ भी समन्दर की सतह पर (खड़े के खड़े) रह जाएँ बेशक तमाम सब्र और शुक्र करने वालों के वास्ते इन बातों में (ख़ुदा की क़ुदरत की) बहुत सी निशानियाँ हैं
34أَوْ يُوبِقْهُنَّ بِمَا كَسَبُوا وَيَعْفُ عَن كَثِيرٍ
(या वह चाहे तो) उनको उनके आमाल (बद) के सबब तबाह कर दे
35وَيَعْلَمَ الَّذِينَ يُجَادِلُونَ فِي آيَاتِنَا مَا لَهُم مِّن مَّحِيصٍ
और वह बहुत कुछ माफ़ करता है और जो लोग हमारी निशानियों में (ख्वाहमाख्वाह) झगड़ा करते हैं वह अच्छी तरह समझ लें कि उनको किसी तरह (अज़ाब से) छुटकारा नहीं
36فَمَا أُوتِيتُم مِّن شَيْءٍ فَمَتَاعُ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا ۖ وَمَا عِندَ اللَّهِ خَيْرٌ وَأَبْقَىٰ لِلَّذِينَ آمَنُوا وَعَلَىٰ رَبِّهِمْ يَتَوَكَّلُونَ
(लोगों) तुमको जो कुछ (माल) दिया गया है वह दुनिया की ज़िन्दगी का (चन्द रोज़) साज़ोसामान है और जो कुछ ख़ुदा के यहाँ है वह कहीं बेहतर और पायदार है (मगर ये) ख़ास उन ही लोगों के लिए है जो ईमान लाए और अपने परवरदिगार पर भरोसा रखते हैं
37وَالَّذِينَ يَجْتَنِبُونَ كَبَائِرَ الْإِثْمِ وَالْفَوَاحِشَ وَإِذَا مَا غَضِبُوا هُمْ يَغْفِرُونَ
और जो लोग बड़े बड़े गुनाहों और बेहयाई की बातों से बचे रहते हैं और ग़ुस्सा आ जाता है तो माफ कर देते हैं
अश-शूराकुरान सूची
53आयत
मक्कीअवतरण स्थान
35आयत

अनुवाद — अश-शूरा 35

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Saturday, October 3, 2026

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