अज़-ज़ुखरुफ · 11/89
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुखरुफ
وَالَّذِي نَزَّلَ مِنَ السَّمَاءِ مَاءً بِقَدَرٍ فَأَنشَرْنَا بِهِ بَلْدَةً مَّيْتًا ۚ كَذَٰلِكَ تُخْرَجُونَ ۝١١
Wallazee nazzala minas samaaa`i maaa`am biqadarin fa anshamaa bihee baldatam maitaa` kazaalika tukhrajoon
📖 हिंदी अर्थ
और जिसने एक (मुनासिब) अन्दाजे क़े साथ आसमान से पानी बरसाया फिर हम ही ने उसके (ज़रिए) से मुर्दा (परती) शहर को ज़िन्दा (आबाद) किया उसी तरह तुम भी (क़यामत के दिन क़ब्रों से) निकाले जाओगे
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بِقَدَرٍ – एक निश्चित मात्रा और अनुमान के साथ, न अधिक और न कम, बल्कि जितनी ज़रूरत हो उतना।
  • فَأَنشَرْنَا – हमने जीवित किया, उगाया और फैलाया।
  • بَلْدَةً مَّيْتًا – वह भूमि जो सूखी, बंजर और हरियाली से रहित हो, जिसमें कोई पौधा न हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हमें उस महान शक्ति की याद दिलाती है जो आसमान से एक निश्चित मात्रा में पानी उतारती है। वह पानी न तो इतना अधिक होता है कि तूफान और बाढ़ ले आए, और न ही इतना कम कि ज़मीन की प्यास न बुझे। बल्कि वह ठीक उसी अनुपात में उतरता है जितनी ज़रूरत होती है — इंसानों के लिए, जानवरों के लिए, और खेती-बाड़ी के लिए। यह अल्लाह की असीम दया और उसकी सटीक व्यवस्था का प्रमाण है।

फिर अल्लाह तआला कहता है कि उसी पानी के ज़रिए हमने एक मुर्दा (बंजर) ज़मीन को जीवित कर दिया — वह ज़मीन जहाँ कोई हरियाली नहीं थी, वहाँ अचानक खेत, पेड़-पौधे और फसलें उग आईं। यह दृश्य अपने आप में एक जीती-जागती मिसाल है कि जिस तरह हम मुर्दा ज़मीन को पानी से जीवित करते हैं, उसी तरह हम क़यामत के दिन सभी इंसानों को उनकी क़ब्रों से जीवित करके निकालेंगे।

यह आयत हमारे दिलों में यक़ीन (विश्वास) पैदा करती है कि जिस अल्लाह ने बंजर ज़मीन को हरा-भरा करने की ताक़त रखी है, वह निश्चित रूप से हमें दोबारा जीवित करने पर भी पूरी तरह क़ादिर (सक्षम) है। जब हम बारिश के बाद धरती को लहलहाते देखते हैं, तो यह दृश्य हमें याद दिलाता है कि मौत के बाद जीवन उतना ही आसान है जितना सूखी ज़मीन का हरा-भरा हो जाना।

इस आयत में एक गहरा सबक है — जिस तरह पानी मुर्दा ज़मीन को जीवन देता है, उसी तरह ईमान और क़ुरआन की हिदायत मुर्दा दिलों को जीवन देती है। जो दिल गुनाहों से सूख चुका है, वह तौबा और अल्लाह की रहमत से फिर से तर और लहलहा सकता है। यह हमारे लिए एक बड़ी खुशखबरी है कि अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा हमेशा खुला है — बस ज़रूरत है उसकी तरफ़ पलटने की।

याद रखिए! जिस तरह बारिश के बाद धरती खिल उठती है, उसी तरह क़यामत के दिन हम सब अपनी क़ब्रों से निकलकर अपने रब के सामने हाज़िर होंगे। यह कोई दूर की बात नहीं, बल्कि उतनी ही यक़ीनी है जितनी हर साल बारिश के बाद धरती का हरा-भरा हो जाना। इसलिए हमें चाहिए कि इस ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत में गुज़ारें, ताकि उस दिन हम कामयाब हो सकें।

🎧 सुनें

📜 आयत 9-13 — अज़-ज़ुखरुफ

9وَلَئِن سَأَلْتَهُم مَّنْ خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ لَيَقُولُنَّ خَلَقَهُنَّ الْعَزِيزُ الْعَلِيمُ
और (ऐ रसूल) अगर तुम उनसे पूछो कि सारे आसमान व ज़मीन को किसने पैदा किया तो वह ज़रूर कह देंगे कि उनको बड़े वाक़िफ़कार ज़बरदस्त (ख़ुदा ने) पैदा किया है
10الَّذِي جَعَلَ لَكُمُ الْأَرْضَ مَهْدًا وَجَعَلَ لَكُمْ فِيهَا سُبُلًا لَّعَلَّكُمْ تَهْتَدُونَ
जिसने तुम लोगों के वास्ते ज़मीन का बिछौना बनाया और (फिर) उसमें तुम्हारे नफ़े के लिए रास्ते बनाए ताकि तुम राह मालूम करो
11وَالَّذِي نَزَّلَ مِنَ السَّمَاءِ مَاءً بِقَدَرٍ فَأَنشَرْنَا بِهِ بَلْدَةً مَّيْتًا ۚ كَذَٰلِكَ تُخْرَجُونَ
और जिसने एक (मुनासिब) अन्दाजे क़े साथ आसमान से पानी बरसाया फिर हम ही ने उसके (ज़रिए) से मुर्दा (परती) शहर को ज़िन्दा (आबाद) किया उसी तरह तुम भी (क़यामत के दिन क़ब्रों से) निकाले जाओगे
12وَالَّذِي خَلَقَ الْأَزْوَاجَ كُلَّهَا وَجَعَلَ لَكُم مِّنَ الْفُلْكِ وَالْأَنْعَامِ مَا تَرْكَبُونَ
और जिसने हर किस्म की चीज़े पैदा कीं और तुम्हारे लिए कश्तियां बनायीं और चारपाए (पैदा किए) जिन पर तुम सवार होते हो
13لِتَسْتَوُوا عَلَىٰ ظُهُورِهِ ثُمَّ تَذْكُرُوا نِعْمَةَ رَبِّكُمْ إِذَا اسْتَوَيْتُمْ عَلَيْهِ وَتَقُولُوا سُبْحَانَ الَّذِي سَخَّرَ لَنَا هَٰذَا وَمَا كُنَّا لَهُ مُقْرِنِينَ
ताकि तुम उसकी पीठ पर चढ़ो और जब उस पर (अच्छी तरह) सीधे हो बैठो तो अपने परवरदिगार का एहसान माना करो और कहो कि वह (ख़ुदा हर ऐब से) पाक है जिसने इसको हमारा ताबेदार बनाया हालॉकि हम तो ऐसे (ताक़तवर) न थे कि उस पर क़ाबू पाते
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अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 11

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Tuesday, August 18, 2026

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