अज़-ज़ुखरुफ · 12/89
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ुखरुफ
وَالَّذِي خَلَقَ الْأَزْوَاجَ كُلَّهَا وَجَعَلَ لَكُم مِّنَ الْفُلْكِ وَالْأَنْعَامِ مَا تَرْكَبُونَ ۝١٢
Wallazee khalaqal azwaaja kullahaa wa ja`ala lakum minal fulki wal-an`aami maa tarkaboon
📖 हिंदी अर्थ
और जिसने हर किस्म की चीज़े पैदा कीं और तुम्हारे लिए कश्तियां बनायीं और चारपाए (पैदा किए) जिन पर तुम सवार होते हो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • الأَزْوَاجَ: अर्थात प्रकार, क़िस्में, जोड़े (नर-मादा, रात-दिन, आसमान-ज़मीन आदि)।
  • الفُلْكِ: जहाज़ (समुद्र में चलने वाली नावें)।
  • الأَنْعَامِ: चौपाए जानवर (ऊँट, गाय, बकरी, भेड़ आदि)।
  • تَرْكَبُونَ: जिन पर तुम सवारी करते हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हमें उस महान शक्ति की याद दिलाती है जिसने इस पूरी कायनात (ब्रह्मांड) को बनाया और हर चीज़ को जोड़ों (क़िस्मों) में पैदा किया। अल्लाह तआला ने रात और दिन, नर और मादा, गर्मी और सर्दी, पहाड़ और मैदान — हर चीज़ को एक ख़ास निज़ाम (व्यवस्था) के साथ बनाया। यह सब उसकी क़ुदरत (शक्ति) के निशान हैं।

फिर अल्लाह ने अपनी सबसे बड़ी नेमत (कृपा) का ज़िक्र किया — उसने इंसानों के लिए जहाज़ बनाए ताकि वे समुद्र के पार जा सकें, और चौपाए जानवर (ऊँट, घोड़े, खच्चर, गधे) बनाए ताकि वे ज़मीन पर सफ़र कर सकें। यानी अल्लाह ने इंसान के सफ़र के दोनों रास्ते आसान कर दिए — एक पानी का और एक ज़मीन का।

सोचिए! जहाज़ इंसान की बनाई हुई चीज़ है, लेकिन उसे बनाने की तरकीब (तकनीक) और समुद्र को अपने क़ाबू में रखने वाला अल्लाह ही है। वही हवा को चलाता है, वही पानी को सहारा देता है, वही जानवरों को इंसान के वश में करता है। अगर अल्लाह की मर्ज़ी न हो, तो न जहाज़ चल सकता है और न जानवर सवारी दे सकते हैं।

यह आयत हमें सिखाती है कि जब हम किसी सफ़र पर निकलें — चाहे समुद्र हो या ज़मीन — तो हमें अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए और उसी पर भरोसा रखना चाहिए। क्योंकि असली क़ुदरत (शक्ति) उसी के हाथ में है। यह हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि हम अपनी ज़िंदगी के हर सफ़र में अल्लाह को याद रखें, उसका शुक्र करें और उसकी नेमतों का सही इस्तेमाल करें।

अल्लाह ने ये सब चीज़ें हमारे लिए इसलिए बनाईं ताकि हम उसकी क़ुदरत को पहचानें और उसकी इबादत करें। यही हमारी कामयाबी का रास्ता है — कि हम अल्लाह के एहसानों को याद करें और उसके बताए हुए तरीक़े पर चलें। जो इंसान इन निशानियों पर ग़ौर करता है, वह कभी अल्लाह को भूलकर किसी और की इबादत नहीं कर सकता।



📜 आयत 10-14 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ

10الَّذِي جَعَلَ لَكُمُ الْأَرْضَ مَهْدًا وَجَعَلَ لَكُمْ فِيهَا سُبُلًا لَّعَلَّكُمْ تَهْتَدُونَ
जिसने तुम लोगों के वास्ते ज़मीन का बिछौना बनाया और (फिर) उसमें तुम्हारे नफ़े के लिए रास्ते बनाए ताकि तुम राह मालूम करो
11وَالَّذِي نَزَّلَ مِنَ السَّمَاءِ مَاءً بِقَدَرٍ فَأَنشَرْنَا بِهِ بَلْدَةً مَّيْتًا ۚ كَذَٰلِكَ تُخْرَجُونَ
और जिसने एक (मुनासिब) अन्दाजे क़े साथ आसमान से पानी बरसाया फिर हम ही ने उसके (ज़रिए) से मुर्दा (परती) शहर को ज़िन्दा (आबाद) किया उसी तरह तुम भी (क़यामत के दिन क़ब्रों से) निकाले जाओगे
12وَالَّذِي خَلَقَ الْأَزْوَاجَ كُلَّهَا وَجَعَلَ لَكُم مِّنَ الْفُلْكِ وَالْأَنْعَامِ مَا تَرْكَبُونَ
और जिसने हर किस्म की चीज़े पैदा कीं और तुम्हारे लिए कश्तियां बनायीं और चारपाए (पैदा किए) जिन पर तुम सवार होते हो
13لِتَسْتَوُوا عَلَىٰ ظُهُورِهِ ثُمَّ تَذْكُرُوا نِعْمَةَ رَبِّكُمْ إِذَا اسْتَوَيْتُمْ عَلَيْهِ وَتَقُولُوا سُبْحَانَ الَّذِي سَخَّرَ لَنَا هَٰذَا وَمَا كُنَّا لَهُ مُقْرِنِينَ
ताकि तुम उसकी पीठ पर चढ़ो और जब उस पर (अच्छी तरह) सीधे हो बैठो तो अपने परवरदिगार का एहसान माना करो और कहो कि वह (ख़ुदा हर ऐब से) पाक है जिसने इसको हमारा ताबेदार बनाया हालॉकि हम तो ऐसे (ताक़तवर) न थे कि उस पर क़ाबू पाते
14وَإِنَّا إِلَىٰ رَبِّنَا لَمُنقَلِبُونَ
और हमको तो यक़ीनन अपने परवरदिगार की तरफ लौट कर जाना है
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
89आयत
मक्कीअवतरण स्थान
12आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 12

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Saturday, October 3, 2026

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