अज़-ज़ुखरुफ · 13/89
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ुखरुफ
لِتَسْتَوُوا عَلَىٰ ظُهُورِهِ ثُمَّ تَذْكُرُوا نِعْمَةَ رَبِّكُمْ إِذَا اسْتَوَيْتُمْ عَلَيْهِ وَتَقُولُوا سُبْحَانَ الَّذِي سَخَّرَ لَنَا هَٰذَا وَمَا كُنَّا لَهُ مُقْرِنِينَ ۝١٣
Litastawoo `alaa zuhoorihee summa tazkuroo ni`mata Rabbikum izastawaitum `alaihi wa taqooloo Subhaanal lazee sakhkhara lana haaza wa maa kunnaa lahoo muqrineen
📖 हिंदी अर्थ
ताकि तुम उसकी पीठ पर चढ़ो और जब उस पर (अच्छी तरह) सीधे हो बैठो तो अपने परवरदिगार का एहसान माना करो और कहो कि वह (ख़ुदा हर ऐब से) पाक है जिसने इसको हमारा ताबेदार बनाया हालॉकि हम तो ऐसे (ताक़तवर) न थे कि उस पर क़ाबू पाते

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لِتَسْتَوُوا – ताकि तुम सवार होकर सीधे बैठ जाओ (स्थिर हो जाओ)
  • ظُهُورِهِ – उसकी पीठ पर (सवारी की पीठ पर)
  • سَخَّرَ – वश में किया, अधीन किया
  • مُقْرِنِينَ – इसे वश में करने की शक्ति रखने वाले, इस पर काबू पाने वाले

विस्तृत तफसीर:

अल्लाह तआला ने अपने बंदों पर यह बड़ा एहसान किया है कि उसने ज़मीन पर चलने वाले जानवरों, ऊँटों, घोड़ों, गधों, खच्चरों और फिर नावों, जहाज़ों और अन्य सवारियों को इंसान के अधीन कर दिया। यह अल्लाह की बड़ी कृपा है कि जब इंसान इन सवारियों पर सवार होता है और उनकी पीठ पर सीधा बैठ जाता है, तो वह उन्हें अपने इशारे पर चलाता है, जहाँ चाहता है ले जाता है और जब चाहता है रोक लेता है। यह सब अल्लाह की तरफ से एक अज़ीम नेमत है।

इस आयत में अल्लाह तआला हमें सिखा रहा है कि जब तुम सवारी पर सवार होकर सीधे बैठ जाओ, तो उस वक़्त अल्लाह की नेमत को याद करो और यह दुआ पढ़ो: "सुब्हानल्लाज़ी सख्खरा लना हाज़ा व मा कुन्ना लहू मुक़रिनीन" यानी "पाक है वह ज़ात जिसने इसे हमारे वश में किया, और हम इसे वश में करने की शक्ति नहीं रखते थे।"

इस दुआ में दो बड़ी बातें हैं:

  1. अल्लाह की तारीफ़ और उसकी पाकी बयान करना कि वह हर ऐब से पाक है।
  2. अपनी कमज़ोरी और अल्लाह की कुदरत का इक़रार करना कि हम खुद इस सवारी को काबू में नहीं कर सकते थे, यह अल्लाह ही की मेहरबानी है जिसने इसे हमारे लिए वश में किया।

यह दुआ इंसान को अल्लाह का शुक्रगुज़ार बनाती है और उसके दिल में अल्लाह की अज़मत का एहसास पैदा करती है। जब इंसान यह महसूस करता है कि यह ऊँट, यह घोड़ा, यह गाड़ी, यह जहाज़ — सब अल्लाह की देन है और अल्लाह ने ही इन्हें हमारे ताबे में किया है, तो उसका दिल अल्लाह की मुहब्बत से भर जाता है और वह उसकी इबादत की तरफ रग़बत करता है।

इसके बाद अल्लाह तआला हमें यह भी सिखाता है कि हम यह कहें: "और हमें अपने रब की तरफ लौटकर जाना है" — यानी इस दुनिया का सफ़र खत्म होने वाला है, हमें एक दिन अपने रब के सामने पेश होना है। यह बात इंसान को दुनिया की चकाचौंध में ग़ाफिल नहीं होने देती और उसे आख़िरत की याद दिलाती रहती है।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि हर नेमत अल्लाह की तरफ से है। चाहे वह सवारी हो, घर हो, नौकरी हो, सेहत हो या कोई और चीज़ — सब अल्लाह की देन है। इसलिए हमें हर नेमत पर अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए और उसकी याद में अपनी ज़ुबान को तर रखना चाहिए। यही शुक्र अदा करने का तरीका है कि अल्लाह की नेमत देखकर उसकी तारीफ़ करें और उसके आगे सर झुकाएँ। अल्लाह तआला हम सबको यह तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 11-15 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ

11وَالَّذِي نَزَّلَ مِنَ السَّمَاءِ مَاءً بِقَدَرٍ فَأَنشَرْنَا بِهِ بَلْدَةً مَّيْتًا ۚ كَذَٰلِكَ تُخْرَجُونَ
और जिसने एक (मुनासिब) अन्दाजे क़े साथ आसमान से पानी बरसाया फिर हम ही ने उसके (ज़रिए) से मुर्दा (परती) शहर को ज़िन्दा (आबाद) किया उसी तरह तुम भी (क़यामत के दिन क़ब्रों से) निकाले जाओगे
12وَالَّذِي خَلَقَ الْأَزْوَاجَ كُلَّهَا وَجَعَلَ لَكُم مِّنَ الْفُلْكِ وَالْأَنْعَامِ مَا تَرْكَبُونَ
और जिसने हर किस्म की चीज़े पैदा कीं और तुम्हारे लिए कश्तियां बनायीं और चारपाए (पैदा किए) जिन पर तुम सवार होते हो
13لِتَسْتَوُوا عَلَىٰ ظُهُورِهِ ثُمَّ تَذْكُرُوا نِعْمَةَ رَبِّكُمْ إِذَا اسْتَوَيْتُمْ عَلَيْهِ وَتَقُولُوا سُبْحَانَ الَّذِي سَخَّرَ لَنَا هَٰذَا وَمَا كُنَّا لَهُ مُقْرِنِينَ
ताकि तुम उसकी पीठ पर चढ़ो और जब उस पर (अच्छी तरह) सीधे हो बैठो तो अपने परवरदिगार का एहसान माना करो और कहो कि वह (ख़ुदा हर ऐब से) पाक है जिसने इसको हमारा ताबेदार बनाया हालॉकि हम तो ऐसे (ताक़तवर) न थे कि उस पर क़ाबू पाते
14وَإِنَّا إِلَىٰ رَبِّنَا لَمُنقَلِبُونَ
और हमको तो यक़ीनन अपने परवरदिगार की तरफ लौट कर जाना है
15وَجَعَلُوا لَهُ مِنْ عِبَادِهِ جُزْءًا ۚ إِنَّ الْإِنسَانَ لَكَفُورٌ مُّبِينٌ
और उन लोगों ने उसके बन्दों में से उसके लिए औलाद क़रार दी है इसमें शक़ नहीं कि इन्सान खुल्लम खुल्ला बड़ा ही नाशक्रा है
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
89आयत
मक्कीअवतरण स्थान
13आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 13

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Saturday, October 3, 2026

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