अज़-ज़ुखरुफ · 14/89
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ुखरुफ
وَإِنَّا إِلَىٰ رَبِّنَا لَمُنقَلِبُونَ ۝١٤
Wa innaaa ilaa Rabbinaa lamunqaliboon
📖 हिंदी अर्थ
और हमको तो यक़ीनन अपने परवरदिगार की तरफ लौट कर जाना है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لَمُنقَلِبُونَ: हम लौटकर जाने वाले हैं, पलटकर अपने रब की ओर जाने वाले हैं।

तफ़सीर:

जब इंसान किसी सवारी (जानवर, गाड़ी, जहाज़ या किसी भी वाहन) पर सवार होता है, तो उसे चाहिए कि वह अल्लाह की उस महान नेमत को याद करे जिसने इन चीज़ों को उसके वश में कर दिया। यह अल्लाह ही की देन है कि हम इन सवारियों का इस्तेमाल कर पाते हैं, वरना ये हमारे बस की बात नहीं थी। इसलिए हमें कहना चाहिए: "अल-हम्दु लिल्लाह जिसने इसे हमारे लिए वश में किया और हम इसे अपने बल पर नहीं पा सकते थे।"

फिर इसके साथ ही हमें यह भी याद रखना चाहिए कि जिस तरह हम इन सवारियों पर सवार होकर एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं, उसी तरह हमें एक दिन इस दुनिया से रुख़सत होकर अपने रब की ओर लौटना है। यह जीवन का सफ़र है, और इस सफ़र की मंज़िल अल्लाह की बारगाह है। मौत के बाद हम सब उसी की ओर पलटकर जाने वाले हैं, और वहाँ हमसे हमारे आमाल का हिसाब लिया जाएगा।

यह आयत हमें सिखाती है कि जब भी हम किसी नेमत का इस्तेमाल करें, तो उसके देने वाले को याद करें और उसका शुक्र अदा करें। साथ ही यह भी याद रखें कि यह दुनिया हमारा आख़िरी ठिकाना नहीं, बल्कि हमें एक दिन अपने रब की ओर लौटकर जाना है। यही ईमान की निशानी है कि इंसान हर हाल में अल्लाह को याद रखे — नेमत के वक़्त भी और मुसीबत के वक़्त भी।

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह ही असली नेमत देने वाला है, और वही हमारा रब है। उसी की इबादत करनी चाहिए और उसी की तरफ़ लौटना है। यही हमारी कामयाबी है कि हम इस दुनिया में अल्लाह की इबादत करें और उसकी नेमतों का शुक्र अदा करें, ताकि आख़िरत में उसकी रहमत और जन्नत के हक़दार बनें।



📜 आयत 12-16 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ

12وَالَّذِي خَلَقَ الْأَزْوَاجَ كُلَّهَا وَجَعَلَ لَكُم مِّنَ الْفُلْكِ وَالْأَنْعَامِ مَا تَرْكَبُونَ
और जिसने हर किस्म की चीज़े पैदा कीं और तुम्हारे लिए कश्तियां बनायीं और चारपाए (पैदा किए) जिन पर तुम सवार होते हो
13لِتَسْتَوُوا عَلَىٰ ظُهُورِهِ ثُمَّ تَذْكُرُوا نِعْمَةَ رَبِّكُمْ إِذَا اسْتَوَيْتُمْ عَلَيْهِ وَتَقُولُوا سُبْحَانَ الَّذِي سَخَّرَ لَنَا هَٰذَا وَمَا كُنَّا لَهُ مُقْرِنِينَ
ताकि तुम उसकी पीठ पर चढ़ो और जब उस पर (अच्छी तरह) सीधे हो बैठो तो अपने परवरदिगार का एहसान माना करो और कहो कि वह (ख़ुदा हर ऐब से) पाक है जिसने इसको हमारा ताबेदार बनाया हालॉकि हम तो ऐसे (ताक़तवर) न थे कि उस पर क़ाबू पाते
14وَإِنَّا إِلَىٰ رَبِّنَا لَمُنقَلِبُونَ
और हमको तो यक़ीनन अपने परवरदिगार की तरफ लौट कर जाना है
15وَجَعَلُوا لَهُ مِنْ عِبَادِهِ جُزْءًا ۚ إِنَّ الْإِنسَانَ لَكَفُورٌ مُّبِينٌ
और उन लोगों ने उसके बन्दों में से उसके लिए औलाद क़रार दी है इसमें शक़ नहीं कि इन्सान खुल्लम खुल्ला बड़ा ही नाशक्रा है
16أَمِ اتَّخَذَ مِمَّا يَخْلُقُ بَنَاتٍ وَأَصْفَاكُم بِالْبَنِينَ
क्या उसने अपनी मख़लूक़ात में से ख़ुद तो बेटियाँ ली हैं और तुमको चुनकर बेटे दिए हैं
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
89आयत
मक्कीअवतरण स्थान
14आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 14

सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 14 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमको तो यक़ीनन अपने परवरदिगार की तरफ लौट कर…

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Saturday, October 3, 2026

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