अज़-ज़ुखरुफ · 26/89
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुखरुफ
وَإِذْ قَالَ إِبْرَاهِيمُ لِأَبِيهِ وَقَوْمِهِ إِنَّنِي بَرَاءٌ مِّمَّا تَعْبُدُونَ ۝٢٦
Wa iz qaala Ibraaheemu liabeehi wa qawmiheee innane baraaa`um mimmaa ta`budo
📖 हिंदी अर्थ
(और वह वख्त याद करो) जब इब्राहीम ने अपने (मुँह बोले) बाप (आज़र) और अपनी क़ौम से कहा कि जिन चीज़ों को तुम लोग पूजते हो मैं यक़ीनन उससे बेज़ार हूँ
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بَرَاءٌ: बरी, अलग, किसी चीज़ से कोई संबंध न रखने वाला, पूर्ण रूप से मुक्त।
  • تَعْبُدُونَ: तुम पूजा करते हो, इबादत करते हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप उस समय को याद कीजिए जब हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने अपने बाप और अपनी क़ौम से कहा था: "मैं उन चीज़ों से बिल्कुल बरी और अलग हूँ जिन्हें तुम पूजते हो।" यह वह ऐतिहासिक घोषणा थी जो तौहीद (एकेश्वरवाद) की नींव पर खड़े हुए एक सच्चे बंदे ने अपने घर और समाज के सामने की।

हज़रत इब्राहीम ने अपने पिता और अपनी क़ौम के सामने साफ़ और दो टूक बात रखी कि मैं तुम्हारे उन माबूदों से बिल्कुल बरी हूँ जिन्हें तुमने खुद बना रखा है। यह कोई साधारण बात नहीं थी, बल्कि यह एक ऐसा ऐलान था जिसने बातिल (असत्य) की नींव हिला दी। उन्होंने यह नहीं कहा कि "मैं तुम्हारी पूजा से अलग हूँ" बल्कि कहा कि "मैं उन चीज़ों से ही बरी हूँ जिन्हें तुम पूजते हो।" यानी उन्होंने न सिर्फ़ शिर्क (बहुदेववाद) को छोड़ा बल्कि उससे पूर्ण रूप से विरक्ति और घृणा का इज़हार किया।

यह आयत हमें सिखाती है कि एक मोमिन का फ़र्ज़ है कि वह बातिल से किसी भी तरह का समझौता न करे। चाहे उसके सामने उसका अपना बाप हो या उसकी पूरी क़ौम, सच्चाई की राह पर चलते हुए उसे हर उस चीज़ से बरी होने का ऐलान करना चाहिए जो अल्लाह के सिवा पूजी जाती है।

यह वही रास्ता है जिस पर चलकर हज़रत इब्राहीम ने दुनिया को यह पैग़ाम दिया कि सच्ची इज़्ज़त और कामयाबी सिर्फ़ अल्लाह की इबादत में है। जब एक इंसान अपने दिल को हर उस चीज़ से पाक कर लेता है जो अल्लाह के सिवा है, तो अल्लाह उसे ऐसी ताक़त और हिम्मत देता है कि वह अकेले भी पूरी दुनिया के मुक़ाबले में डटा रहता है।

आज हमें भी इसी सबक़ पर अमल करने की ज़रूरत है। हमें अपने जीवन में हर उस चीज़ से बरी होना है जो अल्लाह की रज़ा के खिलाफ है — चाहे वह रस्में हों, रिवाज हों, या कोई और चीज़। जब हम सच्चे दिल से अल्लाह की तरफ़ लौटेंगे और बातिल से कट जाएँगे, तो अल्लाह हमें भी उसी तरह दुनिया और आख़िरत में इज़्ज़त देगा जैसे उसने अपने खलील (दोस्त) हज़रत इब्राहीम को दी।

🎧 सुनें

📜 आयत 24-28 — अज़-ज़ुखरुफ

24۞ قَالَ أَوَلَوْ جِئْتُكُم بِأَهْدَىٰ مِمَّا وَجَدتُّمْ عَلَيْهِ آبَاءَكُمْ ۖ قَالُوا إِنَّا بِمَا أُرْسِلْتُم بِهِ كَافِرُونَ
(इस पर) उनके पैग़म्बर ने कहा भी जिस तरीक़े पर तुमने अपने बाप दादाओं को पाया अगरचे मैं तुम्हारे पास इससे बेहतर राहे रास्त पर लाने वाला दीन लेकर आया हूँ (तो भी न मानोगे) वह बोले (कुछ हो मगर) हम तो उस दीन को जो तुम देकर भेजे गए हो मानने वाले नहीं
25فَانتَقَمْنَا مِنْهُمْ ۖ فَانظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُكَذِّبِينَ
तो हमने उनसे बदला लिया (तो ज़रा) देखो तो कि झुठलाने वालों का क्या अन्जाम हुआ
26وَإِذْ قَالَ إِبْرَاهِيمُ لِأَبِيهِ وَقَوْمِهِ إِنَّنِي بَرَاءٌ مِّمَّا تَعْبُدُونَ
(और वह वख्त याद करो) जब इब्राहीम ने अपने (मुँह बोले) बाप (आज़र) और अपनी क़ौम से कहा कि जिन चीज़ों को तुम लोग पूजते हो मैं यक़ीनन उससे बेज़ार हूँ
27إِلَّا الَّذِي فَطَرَنِي فَإِنَّهُ سَيَهْدِينِ
मगर उसकी इबादत करता हूँ, जिसने मुझे पैदा किया तो वही बहुत जल्द मेरी हिदायत करेगा
28وَجَعَلَهَا كَلِمَةً بَاقِيَةً فِي عَقِبِهِ لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ
और उसी (ईमान) को इब्राहीम ने अपनी औलाद में हमेशा बाक़ी रहने वाली बात छोड़ गए ताकि वह (ख़ुदा की तरफ रूजू) करें
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
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अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 26

सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 26 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (और वह वख्त याद करो) जब इब्राहीम ने अपने (मुँह…

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Tuesday, August 18, 2026

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