अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- रहमत: यहाँ अर्थ है नबुव्वत (पैग़म्बरी) और आख़िरत की नेमतें।
- मआश: गुज़ारा, रोज़ी, जीविका।
- सुख़्रिय्यन: एक दूसरे के अधीन और सेवा में लगा हुआ।
तफ़सीर:
क्या ये लोग तेरे रब की रहमत (नबुव्वत) को बाँटने वाले हैं कि जिसे चाहें दे दें और जिससे चाहें रोक लें? हालाँकि ये ख़ुद इस बात की ताक़त नहीं रखते। अल्लाह ही है जिसने इनकी दुनियावी रोज़ी को इनके बीच बाँटा है — किसी को धन दिया, किसी को ग़रीबी दी, किसी को ताक़त दी, किसी को कमज़ोरी दी, किसी को ऊँचा दर्जा दिया और किसी को नीचा। यह सब कुछ अल्लाह की हिकमत से है, ताकि लोग एक दूसरे के ज़रिए अपनी ज़रूरतें पूरी करें — अमीर ग़रीब की मेहनत से काम ले और ग़री� अमीर के पैसे से अपना गुज़ारा करे। इस तरह दुनिया का निज़ाम चलता है।
और ऐ नबी! तेरे रब की रहमत — यानी जन्नत और उसकी नेमतें — उन सब चीज़ों से कहीं बेहतर है जो ये लोग दुनिया में जमा कर रहे हैं। दुनिया का माल तो फ़ानी है, जन्नत हमेशा रहने वाली है। ये लोग जो दौलत इकट्ठा करते हैं, वह उनके काम न आएगी, लेकिन अल्लाह की रहमत उसके नेक बंदों के लिए हमेशा रहने वाली नेमत है।
दावती पहलू:
इस आयत में अल्लाह तआला हमें सिखाता है कि रोज़ी और दर्जे बाँटने वाला अकेला अल्लाह है। जिस तरह उसने दुनिया की रोज़ी बाँटी है, उसी तरह नबुव्वत और हिदायत भी उसी की मर्ज़ी से आती है। जब हम यह समझ लें कि सब कुछ अल्लाह के हाथ में है, तो हमारा दिल उसी से जुड़ जाता है। हमें अपनी रोज़ी की चिंता में घुलने की ज़रूरत नहीं, बल्कि अल्लाह की रहमत — यानी ईमान, नेक अमल और जन्नत — की तरफ़ दौड़ना चाहिए। यही सबसे बड़ी कामयाबी है। जो लोग सिर्फ़ दुनिया की दौलत जमा करने में लगे हैं, वे असली ख़ज़ाने से महरूम हैं। अल्लाह की रहमत और उसकी रज़ा हर दौलत से बेहतर है।
📜 आयत 30-34 — अज़-ज़ुखरुफ
अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 32
सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 32 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये लोग तुम्हारे परवरदिगार की रहमत को (अपने तौर पर)…सूरा आयत 32/89 — अज़-ज़ुखरुफ الزخرف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़ुखरुफ सुनें, अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, अज़-ज़ुखरुफ mp3, अज़-ज़ुखरुफ pdf. आयत 30–34. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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