Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَوْلَا (लौला): क्यों नहीं / ऐसा क्यों नहीं हुआ
- نُزِّلَ (नुज़्ज़िला): उतारा गया
- الْقَرْيَتَيْنِ (अल-क़र्यतैन): दो बस्तियों (शहरों) से — अर्थात मक्का और ताइफ़
- عَظِيمٍ (अज़ीम): बड़े प्रतिष्ठित व्यक्ति
तफ़सीर (व्याख्या):
जब मक्का के मुशरिकीन ने देखा कि अल्लाह तआला ने अपना आख़िरी ग्रंथ क़ुरआन हमारे प्यारे नबी मुहम्मद ﷺ पर उतारा है, तो उन्होंने अपने घमंड और अहंकार की वजह से यह कहा: "यह क़ुरआन अगर सच में अल्लाह की तरफ से है, तो इसे किसी बड़े और प्रतिष्ठित आदमी पर क्यों नहीं उतारा गया — या तो मक्का के किसी रईस पर या ताइफ़ के किसी सरदार पर?" उनका इशारा मक्का के वलीद बिन मुग़ीरा और ताइफ़ के उरवा बिन मसूद सक़फ़ी की तरफ था, जो अपनी दौलत और रुतबे की वजह से लोगों में बड़े समझे जाते थे।
यानी उन्होंने यह कहकर नबुव्वत के चुनाव पर एतराज़ किया कि अल्लाह ने एक यतीम, ग़रीब और बेसहारा इंसान (मुहम्मद ﷺ) को क्यों चुना? उनकी नज़र में बड़ाई दौलत, ख़ानदान और दुनियावी ओहदे से थी, जबकि अल्लाह तआला की नज़र में बड़ाई तक़वा, ईमान और अच्छे चरित्र से है।
यह उनकी बड़ी नादानी और जहालत थी कि उन्होंने अल्लाह के फैसले पर सवाल उठाया। अल्लाह तआला जिसे चाहता है अपनी रिसालत के लिए चुनता है, और उसका चुनाव पूरी हिकमत (बुद्धिमत्ता) पर आधारित होता है। अल्लाह ने अपने नबी ﷺ को इसलिए चुना कि वह सबसे अच्छे अख़्लाक़, सबसे सच्चे, सबसे अमानतदार और सबसे पाकीज़ा सीरत के मालिक थे — चाहे वह दुनियावी नज़र में ग़रीब ही क्यों न हों।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि इंसान को अल्लाह के फैसलों पर भरोसा करना चाहिए और दुनियावी ऊँचाई-नीचाई को कसौटी नहीं बनाना चाहिए। अल्लाह की रहमत और हिदायत उसी को मिलती है जो दिल से सच्चा हो, चाहे वह किसी भी घराने या माली हालत से क्यों न हो। यही वह सच्चाई है जो हमें अल्लाह के दीन की तरफ खींचती है — कि इस्लाम में बड़ाई का मापदंड तक़वा है, न कि दौलत और ओहदा।
📜 आयत 29-33 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ
अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 31
सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 31 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और कहने लगे कि ये क़ुरान इन दो बस्तियों (मक्के…सूरा आयत 31/89 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ الزخرف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अज़-ज़ुखरुफ सुनें, सूरा अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, सूरा अज़-ज़ुखरुफ mp3, सूरा अज़-ज़ुखरुफ pdf. आयत 29–33. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अज़-ज़ुखरुफ
पवित्र क़ुरआन
Sunday, October 4, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


