अज़-ज़ुखरुफ · 48/89
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुखरुफ
وَمَا نُرِيهِم مِّنْ آيَةٍ إِلَّا هِيَ أَكْبَرُ مِنْ أُخْتِهَا ۖ وَأَخَذْنَاهُم بِالْعَذَابِ لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ ۝٤٨
Wa maa nureehim min aayatin illaa hiya akbaru min ukhtihaa wa akhaznaahum bil`azaabi la`allahum yarji`oon
📖 हिंदी अर्थ
और हम जो मौजिज़ा उन को दिखाते थे वह दूसरे से बढ़ कर होता था और आख़िर हमने उनको अज़ाब में गिरफ्तार किया ताकि ये लोग बाज़ आएँ
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • आयत: निशानी, चमत्कार, प्रमाण
  • अख़्तिहा: उसकी बहन (यहाँ अर्थ: पिछली निशानी)
  • अज़ाब: यातना, पीड़ा
  • यरजिऊन: वापस लौटें (अपनी गलती से तौबा करें)

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला फ़िरऔन और उसकी क़ौम के बारे में बयान फ़रमा रहा है कि हमने उन्हें जो भी निशानी (चमत्कार) दिखाई, वह पिछली निशानी से बड़ी और अधिक स्पष्ट थी। यानी हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) के ज़रिए जो मोजिज़े दिखाए गए—जैसे लाठी का अजगर बनना, हाथ का चमकना, तूफान, टिड्डियाँ, जूँ, मेंढक और खून—हर एक निशानी पिछली से अधिक सशक्त और सच्चाई की गवाह थी।

इसके बावजूद जब वे हठधर्मी और इनकार पर अड़े रहे, तो अल्लाह ने उन्हें अज़ाब (यातना) में पकड़ा—कभी काल (अकाल) के ज़रिए, कभी तूफान और बीमारियों के ज़रिए—ताकि वे अपनी ग़लती का एहसास करें, अपने कुफ्र से तौबा करें और अल्लाह की तरफ लौट आएं।

यह अल्लाह की रहमत और मेहरबानी का सबूत है कि वह बार-बार अपने बंदों को समझाने के लिए निशानियाँ दिखाता है और उन्हें सज़ा देकर भी उनकी भलाई चाहता है, ताकि वे सीधे रास्ते पर आ जाएं। लेकिन फ़िरऔन और उसके साथियों ने इन निशानियों को जादू कहा और अपने कुफ्र पर अड़े रहे।

यह क़िस्सा हमारे लिए सबक़ है कि अल्लाह की निशानियों पर ग़ौर करें, उसकी तरफ लौटें और अपनी ज़िंदगी में उसके हुक्मों को मानें। अल्लाह तआला अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है—वह चाहता है कि हम उसकी रहमत की तरफ लौटें, क्योंकि उसका दरवाज़ा हमेशा खुला है। जो भी सच्चे दिल से उसकी तरफ लौटता है, अल्लाह उसे माफ़ कर देता है और उसकी ज़िंदगी में बरकत डालता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 46-50 — अज़-ज़ुखरुफ

46وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مُوسَىٰ بِآيَاتِنَا إِلَىٰ فِرْعَوْنَ وَمَلَئِهِ فَقَالَ إِنِّي رَسُولُ رَبِّ الْعَالَمِينَ
और हम ही ने यक़ीनन मूसा को अपनी निशानियाँ देकर फिरऔन और उसके दरबारियों के पास (पैग़म्बर बनाकर) भेजा था तो मूसा ने कहा कि मैं सारे जहॉन के पालने वाले (ख़ुदा) का रसूल हूँ
47فَلَمَّا جَاءَهُم بِآيَاتِنَا إِذَا هُم مِّنْهَا يَضْحَكُونَ
तो जब मूसा उन लोगों के पास हमारे मौजिज़े लेकर आए तो वह लोग उन मौजिज़ों की हँसी उड़ाने लगे
48وَمَا نُرِيهِم مِّنْ آيَةٍ إِلَّا هِيَ أَكْبَرُ مِنْ أُخْتِهَا ۖ وَأَخَذْنَاهُم بِالْعَذَابِ لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ
और हम जो मौजिज़ा उन को दिखाते थे वह दूसरे से बढ़ कर होता था और आख़िर हमने उनको अज़ाब में गिरफ्तार किया ताकि ये लोग बाज़ आएँ
49وَقَالُوا يَا أَيُّهَ السَّاحِرُ ادْعُ لَنَا رَبَّكَ بِمَا عَهِدَ عِندَكَ إِنَّنَا لَمُهْتَدُونَ
और (जब) अज़ाब में गिरफ्तार हुए तो (मूसा से) कहने लगे ऐ जादूगर इस एहद के मुताबिक़ जो तुम्हारे परवरदिगार ने तुमसे किया है हमारे वास्ते दुआ कर
50فَلَمَّا كَشَفْنَا عَنْهُمُ الْعَذَابَ إِذَا هُمْ يَنكُثُونَ
(अगर अब की छूटे) तो हम ज़रूर ऊपर आ जाएँगे फिर जब हमने उनसे अज़ाब को हटा दिया तो वह फौरन (अपना) अहद तोड़ बैठे
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
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48आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 48

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Tuesday, August 18, 2026

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