Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- السَّاحِرُ — यहाँ इसका अर्थ "पूर्ण विद्वान" या "महान ज्ञानी" है, क्योंकि उस समय के लोग जादूगर को बहुत सम्मान की दृष्टि से देखते थे और उसे विद्वान मानते थे।
- بِمَا عَهِدَ عِندَكَ — उस वचन और प्रतिज्ञा के आधार पर जो अल्लाह ने आपसे की है, अर्थात आपकी दुआ स्वीकार होती है।
- لَمُهْتَدُونَ — हम निश्चित रूप से मार्गदर्शन प्राप्त कर लेंगे, अर्थात ईमान ले आएँगे।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब फ़िरऔन और उसकी क़ौम पर अल्लाह का अज़ाब (यातना) आया—चाहे वह सूखा, अकाल या अन्य आपदाएँ थीं—तो उन्होंने मूसा (अलैहिस्सलाम) से कहा: "ऐ जादूगर!" उन्होंने उन्हें जादूगर कहकर पुकारा, क्योंकि उनकी नज़र में जादूगर का दर्जा बहुत ऊँचा था और वे उसे बड़ा सम्मान देते थे। यह उनकी भाषा और उनके समय का तरीक़ा था, हालाँकि मूसा (अलैहिस्सलाम) जादूगर नहीं थे, बल्कि अल्लाह के नबी और रसूल थे।
उन्होंने कहा: "आप अपने रब से हमारे लिए दुआ कीजिए, उस वचन के आधार पर जो उसने आपसे किया है कि आपकी दुआ स्वीकार होती है। यदि आप दुआ करेंगे और अल्लाह हमसे यह अज़ाब हटा देगा, तो हम निश्चित रूप से मार्गदर्शन प्राप्त कर लेंगे और आपके लाए हुए धर्म पर ईमान ले आएँगे।"
यह उनकी ओर से एक वादा था, लेकिन यह वादा शर्त के साथ था—कि मूसा (अलैहिस्सलाम) दुआ करें और अज़ाब हट जाए। वे सच्चे दिल से ईमान नहीं लाना चाहते थे, बल्कि केवल मुसीबत से छुटकारा पाना चाहते थे। जब भी अज़ाब आता, वे यही कहते, और जब अज़ाब हट जाता, तो अपने वादे से मुकर जाते। यह उनकी आदत थी—कठिनाई में अल्लाह को याद करना और आसानी में उसे भूल जाना।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान जब मुसीबत में होता है, तो वह अल्लाह की ओर रुख करता है, लेकिन जब आराम मिलता है, तो उसे भूल जाता है। हमें चाहिए कि हम हमेशा अल्लाह को याद रखें—सुख में भी और दुख में भी। अल्लाह अपने नबियों की दुआ को कबूल करता है, और यह उनकी रहमत है कि वह अपने बंदों पर मेहरबानी करता है। हमें भी चाहिए कि हम अल्लाह से सच्चे दिल से तौबा करें और उसकी ओर लौटें, क्योंकि अल्लाह तौबा करने वालों को बहुत पसंद करता है और उन्हें माफ कर देता है। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि नबियों की दुआ बहुत असरदार होती है, और हमें उनके तरीक़े पर चलना चाहिए और अल्लाह से जुड़े रहना चाहिए।
📜 आयत 47-51 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ
अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 49
सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 49 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (जब) अज़ाब में गिरफ्तार हुए तो (मूसा से) कहने…सूरा आयत 49/89 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ الزخرف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अज़-ज़ुखरुफ सुनें, सूरा अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, सूरा अज़-ज़ुखरुफ mp3, सूरा अज़-ज़ुखरुफ pdf. आयत 47–51. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अज़-ज़ुखरुफ
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


