अज़-ज़ुखरुफ · 49/89
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ुखरुफ
وَقَالُوا يَا أَيُّهَ السَّاحِرُ ادْعُ لَنَا رَبَّكَ بِمَا عَهِدَ عِندَكَ إِنَّنَا لَمُهْتَدُونَ ۝٤٩
Wa qaaloo yaaa ayyuhas saahirud`u lanaa Rabbaka bimaa `ahida `indaka innanaa lamuhtadoon
📖 हिंदी अर्थ
और (जब) अज़ाब में गिरफ्तार हुए तो (मूसा से) कहने लगे ऐ जादूगर इस एहद के मुताबिक़ जो तुम्हारे परवरदिगार ने तुमसे किया है हमारे वास्ते दुआ कर

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • السَّاحِرُ — यहाँ इसका अर्थ "पूर्ण विद्वान" या "महान ज्ञानी" है, क्योंकि उस समय के लोग जादूगर को बहुत सम्मान की दृष्टि से देखते थे और उसे विद्वान मानते थे।
  • بِمَا عَهِدَ عِندَكَ — उस वचन और प्रतिज्ञा के आधार पर जो अल्लाह ने आपसे की है, अर्थात आपकी दुआ स्वीकार होती है।
  • لَمُهْتَدُونَ — हम निश्चित रूप से मार्गदर्शन प्राप्त कर लेंगे, अर्थात ईमान ले आएँगे।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब फ़िरऔन और उसकी क़ौम पर अल्लाह का अज़ाब (यातना) आया—चाहे वह सूखा, अकाल या अन्य आपदाएँ थीं—तो उन्होंने मूसा (अलैहिस्सलाम) से कहा: "ऐ जादूगर!" उन्होंने उन्हें जादूगर कहकर पुकारा, क्योंकि उनकी नज़र में जादूगर का दर्जा बहुत ऊँचा था और वे उसे बड़ा सम्मान देते थे। यह उनकी भाषा और उनके समय का तरीक़ा था, हालाँकि मूसा (अलैहिस्सलाम) जादूगर नहीं थे, बल्कि अल्लाह के नबी और रसूल थे।

उन्होंने कहा: "आप अपने रब से हमारे लिए दुआ कीजिए, उस वचन के आधार पर जो उसने आपसे किया है कि आपकी दुआ स्वीकार होती है। यदि आप दुआ करेंगे और अल्लाह हमसे यह अज़ाब हटा देगा, तो हम निश्चित रूप से मार्गदर्शन प्राप्त कर लेंगे और आपके लाए हुए धर्म पर ईमान ले आएँगे।"

यह उनकी ओर से एक वादा था, लेकिन यह वादा शर्त के साथ था—कि मूसा (अलैहिस्सलाम) दुआ करें और अज़ाब हट जाए। वे सच्चे दिल से ईमान नहीं लाना चाहते थे, बल्कि केवल मुसीबत से छुटकारा पाना चाहते थे। जब भी अज़ाब आता, वे यही कहते, और जब अज़ाब हट जाता, तो अपने वादे से मुकर जाते। यह उनकी आदत थी—कठिनाई में अल्लाह को याद करना और आसानी में उसे भूल जाना।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान जब मुसीबत में होता है, तो वह अल्लाह की ओर रुख करता है, लेकिन जब आराम मिलता है, तो उसे भूल जाता है। हमें चाहिए कि हम हमेशा अल्लाह को याद रखें—सुख में भी और दुख में भी। अल्लाह अपने नबियों की दुआ को कबूल करता है, और यह उनकी रहमत है कि वह अपने बंदों पर मेहरबानी करता है। हमें भी चाहिए कि हम अल्लाह से सच्चे दिल से तौबा करें और उसकी ओर लौटें, क्योंकि अल्लाह तौबा करने वालों को बहुत पसंद करता है और उन्हें माफ कर देता है। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि नबियों की दुआ बहुत असरदार होती है, और हमें उनके तरीक़े पर चलना चाहिए और अल्लाह से जुड़े रहना चाहिए।



📜 आयत 47-51 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ

47فَلَمَّا جَاءَهُم بِآيَاتِنَا إِذَا هُم مِّنْهَا يَضْحَكُونَ
तो जब मूसा उन लोगों के पास हमारे मौजिज़े लेकर आए तो वह लोग उन मौजिज़ों की हँसी उड़ाने लगे
48وَمَا نُرِيهِم مِّنْ آيَةٍ إِلَّا هِيَ أَكْبَرُ مِنْ أُخْتِهَا ۖ وَأَخَذْنَاهُم بِالْعَذَابِ لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ
और हम जो मौजिज़ा उन को दिखाते थे वह दूसरे से बढ़ कर होता था और आख़िर हमने उनको अज़ाब में गिरफ्तार किया ताकि ये लोग बाज़ आएँ
49وَقَالُوا يَا أَيُّهَ السَّاحِرُ ادْعُ لَنَا رَبَّكَ بِمَا عَهِدَ عِندَكَ إِنَّنَا لَمُهْتَدُونَ
और (जब) अज़ाब में गिरफ्तार हुए तो (मूसा से) कहने लगे ऐ जादूगर इस एहद के मुताबिक़ जो तुम्हारे परवरदिगार ने तुमसे किया है हमारे वास्ते दुआ कर
50فَلَمَّا كَشَفْنَا عَنْهُمُ الْعَذَابَ إِذَا هُمْ يَنكُثُونَ
(अगर अब की छूटे) तो हम ज़रूर ऊपर आ जाएँगे फिर जब हमने उनसे अज़ाब को हटा दिया तो वह फौरन (अपना) अहद तोड़ बैठे
51وَنَادَىٰ فِرْعَوْنُ فِي قَوْمِهِ قَالَ يَا قَوْمِ أَلَيْسَ لِي مُلْكُ مِصْرَ وَهَٰذِهِ الْأَنْهَارُ تَجْرِي مِن تَحْتِي ۖ أَفَلَا تُبْصِرُونَ
और फिरऔन ने अपने लोगों में पुकार कर कहा ऐ मेरी क़ौम क्या (ये) मुल्क मिस्र हमारा नहीं और (क्या) ये नहरें जो हमारे (शाही महल के) नीचे बह रही हैं (हमारी नहीं) तो क्या तुमको इतना भी नहीं सूझता
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
89आयत
मक्कीअवतरण स्थान
49आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 49

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Saturday, October 3, 2026

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