अज़-ज़ुखरुफ · 47/89
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुखरुफ
فَلَمَّا جَاءَهُم بِآيَاتِنَا إِذَا هُم مِّنْهَا يَضْحَكُونَ ۝٤٧
Falammma jaaa`ahum bi aayaatinaaa izaa hum minhaa yadhakoon
📖 हिंदी अर्थ
तो जब मूसा उन लोगों के पास हमारे मौजिज़े लेकर आए तो वह लोग उन मौजिज़ों की हँसी उड़ाने लगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بِآيَاتِنَا – हमारी निशानियाँ, चमत्कार और स्पष्ट प्रमाण।
  • يَضْحَكُونَ – वे हँसने लगे, अर्थात मज़ाक उड़ाने और उपहास करने लगे।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) फ़िरऔन और उसकी क़ौम के सरदारों के पास हमारी स्पष्ट निशानियाँ और चमत्कार लेकर पहुँचे, तो उन्होंने उन आयतों को देखकर उन पर ईमान नहीं लाया, बल्कि उनका मज़ाक उड़ाने लगे और हँसी-ठट्ठा करने लगे। यह उनकी सरकशी और घमंड की पराकाष्ठा थी कि जब सत्य उनके सामने आया, तो उन्होंने उसे गंभीरता से नहीं लिया, बल्कि उसे हँसी में उड़ा दिया। यह उन लोगों की आदत है जो हक़ (सत्य) को नकारते हैं—जब उनके पास स्पष्ट प्रमाण आते हैं, तो वे उन्हें अपनी नज़रों में छोटा करने के लिए उनका उपहास करते हैं, ताकि लोगों की नज़रों में भी वह सत्य बेकार दिखे। लेकिन यह उनकी नादानी थी, क्योंकि हँसी-मज़ाक से सत्य कभी बदलता नहीं, और न ही अल्लाह के फ़ैसले टलते हैं।

यहाँ से हमें सीख मिलती है कि जब हमारे पास अल्लाह का संदेश पहुँचे, तो हमें उसे गंभीरता से लेना चाहिए, उस पर विचार करना चाहिए और उसका अनुसरण करना चाहिए। उपहास और मज़ाक उड़ाना उन लोगों का तरीक़ा है जो सत्य से दूर भागते हैं। अल्लाह हमें हिदायत दे कि हम सत्य को क़बूल करने वाले और उस पर अमल करने वाले बनें। आमीन।



📜 आयत 45-49 — अज़-ज़ुखरुफ

45وَاسْأَلْ مَنْ أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ مِن رُّسُلِنَا أَجَعَلْنَا مِن دُونِ الرَّحْمَٰنِ آلِهَةً يُعْبَدُونَ
और हमने तुमसे पहले अपने जितने पैग़म्बर भेजे हैं उन सब से दरियाफ्त कर देखो क्या हमने ख़ुदा कि सिवा और माबूद बनाएा थे कि उनकी इबादत की जाए
46وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مُوسَىٰ بِآيَاتِنَا إِلَىٰ فِرْعَوْنَ وَمَلَئِهِ فَقَالَ إِنِّي رَسُولُ رَبِّ الْعَالَمِينَ
और हम ही ने यक़ीनन मूसा को अपनी निशानियाँ देकर फिरऔन और उसके दरबारियों के पास (पैग़म्बर बनाकर) भेजा था तो मूसा ने कहा कि मैं सारे जहॉन के पालने वाले (ख़ुदा) का रसूल हूँ
47فَلَمَّا جَاءَهُم بِآيَاتِنَا إِذَا هُم مِّنْهَا يَضْحَكُونَ
तो जब मूसा उन लोगों के पास हमारे मौजिज़े लेकर आए तो वह लोग उन मौजिज़ों की हँसी उड़ाने लगे
48وَمَا نُرِيهِم مِّنْ آيَةٍ إِلَّا هِيَ أَكْبَرُ مِنْ أُخْتِهَا ۖ وَأَخَذْنَاهُم بِالْعَذَابِ لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ
और हम जो मौजिज़ा उन को दिखाते थे वह दूसरे से बढ़ कर होता था और आख़िर हमने उनको अज़ाब में गिरफ्तार किया ताकि ये लोग बाज़ आएँ
49وَقَالُوا يَا أَيُّهَ السَّاحِرُ ادْعُ لَنَا رَبَّكَ بِمَا عَهِدَ عِندَكَ إِنَّنَا لَمُهْتَدُونَ
और (जब) अज़ाब में गिरफ्तार हुए तो (मूसा से) कहने लगे ऐ जादूगर इस एहद के मुताबिक़ जो तुम्हारे परवरदिगार ने तुमसे किया है हमारे वास्ते दुआ कर
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
89आयत
मक्कीRevelation
47आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 47

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Tuesday, August 18, 2026

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