अज़-ज़ुखरुफ · 69/89
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ुखरुफ
الَّذِينَ آمَنُوا بِآيَاتِنَا وَكَانُوا مُسْلِمِينَ ۝٦٩
Allazeena aamanoo bi Aayaatinaa wa kaanoo muslimeen
📖 हिंदी अर्थ
(यह) वह लोग हैं जो हमारी आयतों पर ईमान लाए और (हमारे) फ़रमाबरदार थे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • آمَنُوا — ईमान लाए, विश्वास किया
  • بِآيَاتِنَا — हमारी निशानियों पर (क़ुरआन और अल्लाह की भेजी हुई शिक्षाओं पर)
  • كَانُوا مُسْلِمِينَ — पूर्ण रूप से अल्लाह के आज्ञाकारी और उसके प्रति समर्पित रहे

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों का वर्णन करती है जिन्हें अल्लाह तआला अपनी विशेष रहमत और कृपा से नवाज़ेगा। ये वे लोग हैं जिन्होंने अल्लाह की आयतों पर सच्चा ईमान रखा — चाहे वे आयतें क़ुरआन की हों या अल्लाह की बनाई हुई कायनात की निशानियाँ। उन्होंने केवल ज़ुबान से ईमान का दावा नहीं किया, बल्कि अपने दिलों को अल्लाह के भय और प्रेम से भरा, और अपने अमल को उसकी रज़ा के अनुसार ढाला।

"और वे मुसलमान थे" — यानी वे अल्लाह के आगे पूर्ण रूप से सिर झुकाने वाले थे। वे उसके हुक्मों को बिना किसी हिचकिचाहट के मानते थे, उसके निषेधों से बचते थे, और अपनी ज़िंदगी के हर पहलू में उसकी मर्ज़ी को सबसे ऊपर रखते थे। उनका इस्लाम सिर्फ नाम का नहीं था, बल्कि उनके दिल, ज़ुबान और अमल — तीनों उस पर एकमत थे।

एक रिवायत में आता है कि जब क़यामत के दिन सभी लोग घबराए हुए होंगे, तो एक पुकारने वाला पुकारेगा: "ऐ अल्लाह के बंदो!" — यह सुनकर हर कोई उम्मीद से सर उठाएगा। फिर जब यह कहा जाएगा कि "जिन्होंने हमारी आयतों पर ईमान लाए और मुसलमान रहे" — तो ग़ैर-मुस्लिम निराश हो जाएँगे, और मोमिनों के चेहरे खुशी से चमक उठेंगे। उन्हें पुकारा जाएगा: "जन्नत में दाख़िल हो जाओ, तुम और तुम्हारे साथी, तुम्हें नेमतें दी जाएँगी और तुम खुश होंगे।"

दीनी पैग़ाम:

यह आयत हमें बताती है कि सच्ची कामयाबी का रास्ता बहुत साफ़ है — ईमान और इस्लाम। जो अल्लाह की आयतों पर दिल से ईमान लाए और अपनी ज़िंदगी को उसकी इताअत में लगा दे, उसके लिए जन्नत की खुशखबरी है। यह कोई मुश्किल काम नहीं है; बस दिल को अल्लाह से जोड़ना है और अमल को उसकी रज़ा के अनुसार बनाना है। अल्लाह ने अपने बंदों पर बहुत मेहरबानी की है कि उसने इतनी आसान शर्त पर जन्नत का वादा किया — बस सच्चा ईमान और सच्चा इस्लाम। आओ, हम अपने दिलों को इसी ईमान की रोशनी से रोशन करें और अपने अमल को इसी इस्लाम की ज़ीनत से सजाएँ, ताकि उस दिन हम भी उन खुशनसीबों में शामिल हों जिन्हें प्यार से जन्नत में बुलाया जाएगा।



📜 आयत 67-71 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ

67الْأَخِلَّاءُ يَوْمَئِذٍ بَعْضُهُمْ لِبَعْضٍ عَدُوٌّ إِلَّا الْمُتَّقِينَ
(दिली) दोस्त इस दिन (बाहम) एक दूसरे के दुशमन होगें मगर परहेज़गार कि वह दोस्त ही रहेगें
68يَا عِبَادِ لَا خَوْفٌ عَلَيْكُمُ الْيَوْمَ وَلَا أَنتُمْ تَحْزَنُونَ
और ख़ुदा उनसे कहेगा ऐ मेरे बन्दों आज न तो तुमको कोई ख़ौफ है और न तुम ग़मग़ीन होगे
69الَّذِينَ آمَنُوا بِآيَاتِنَا وَكَانُوا مُسْلِمِينَ
(यह) वह लोग हैं जो हमारी आयतों पर ईमान लाए और (हमारे) फ़रमाबरदार थे
70ادْخُلُوا الْجَنَّةَ أَنتُمْ وَأَزْوَاجُكُمْ تُحْبَرُونَ
तो तुम अपनी बीवियों समैत एजाज़ व इकराम से बेहिश्त में दाखिल हो जाओ
71يُطَافُ عَلَيْهِم بِصِحَافٍ مِّن ذَهَبٍ وَأَكْوَابٍ ۖ وَفِيهَا مَا تَشْتَهِيهِ الْأَنفُسُ وَتَلَذُّ الْأَعْيُنُ ۖ وَأَنتُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
उन पर सोने की एक रिक़ाबियों और प्यालियों का दौर चलेगा और वहाँ जिस चीज़ को जी चाहे और जिससे ऑंखें लज्ज़त उठाएं (सब मौजूद हैं) और तुम उसमें हमेशा रहोगे
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
89आयत
मक्कीअवतरण स्थान
69आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 69

सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 69 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (यह) वह लोग हैं जो हमारी आयतों पर ईमान लाए…

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Friday, October 2, 2026

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