अज़-ज़ुखरुफ · 70/89
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुखरुफ
ادْخُلُوا الْجَنَّةَ أَنتُمْ وَأَزْوَاجُكُمْ تُحْبَرُونَ ۝٧٠
Udkhulul Jannata antum wa azwaajukum tuhbaroon
📖 हिंदी अर्थ
तो तुम अपनी बीवियों समैत एजाज़ व इकराम से बेहिश्त में दाखिल हो जाओ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تُحْبَرُونَ: अत्यधिक आनंदित किए जाओगे, खुशियों से भर दिए जाओगे, ऐसी नेमतें दी जाएँगी जिनसे दिल खुशी से झूम उठे।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह वह शानदार पल है जब अल्लाह तआला अपने नेक बंदों को जन्नत में दाखिल होने का आदेश देंगे। यह आदेश उन लोगों को दिया जाएगा जिन्होंने अल्लाह की आयतों पर ईमान लाया, उनके रसूलों के लाए हुए पैगाम पर अमल किया, और अपने दिल व जिस्म से अल्लाह रब्बुल आलमीन के आगे सर झुकाया। उनसे कहा जाएगा: "तुम और तुम्हारे हमनिवासी (जो ईमान में तुम्हारे जैसे थे) जन्नत में दाखिल हो जाओ, वहाँ तुम्हें ऐसी नेमतें और खुशियाँ मिलेंगी जिनका कोई अंत नहीं, और तुम हमेशा के लिए आनंदित रहोगे।"

यहाँ "अज़वाज" (जीवनसाथी) से मुराद उनके हमनिवासी और साथी हैं जो ईमान और नेक अमल में उनके समकक्ष थे। यह अल्लाह की रहमत का अज़ीम इनाम है कि वह अपने बंदों को अकेला नहीं छोड़ेगा, बल्कि उनके प्यारों और हमनिवासियों को भी उनके साथ जन्नत में दाखिल करेगा, ताकि उनकी खुशी और भी मुकम्मल हो जाए।

जन्नत की यह खुशी सिर्फ खाने-पीने की नहीं, बल्कि दिल की गहराइयों तक उतरने वाली ऐसी खुशी है जो कभी खत्म नहीं होती। वहाँ कोई ग़म, कोई थकान, कोई दर्द नहीं होगा। हर पल नई नेमतें, नई खुशियाँ और अल्लाह की रज़ा का एहसास होगा जो सबसे बड़ी नेमत है।

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की राहत और इनाम उन्हीं के लिए है जो ईमान और अमल में साबित क़दम रहते हैं। यह हमारे लिए एक प्यारा पैगाम है कि अगर हम अल्लाह की आयतों पर ईमान लाएँ और उन पर अमल करें, तो हमारा अंजाम भी यही होगा — जन्नत की हमेशा रहने वाली खुशियाँ, और वह भी अपने प्यारों के साथ। यही सबसे बड़ी कामयाबी है जिसके लिए हमें ज़िंदगी भर मेहनत करनी चाहिए। अल्लाह हम सबको इस नेमत का हक़दार बनाए। आमीन।



📜 आयत 68-72 — अज़-ज़ुखरुफ

68يَا عِبَادِ لَا خَوْفٌ عَلَيْكُمُ الْيَوْمَ وَلَا أَنتُمْ تَحْزَنُونَ
और ख़ुदा उनसे कहेगा ऐ मेरे बन्दों आज न तो तुमको कोई ख़ौफ है और न तुम ग़मग़ीन होगे
69الَّذِينَ آمَنُوا بِآيَاتِنَا وَكَانُوا مُسْلِمِينَ
(यह) वह लोग हैं जो हमारी आयतों पर ईमान लाए और (हमारे) फ़रमाबरदार थे
70ادْخُلُوا الْجَنَّةَ أَنتُمْ وَأَزْوَاجُكُمْ تُحْبَرُونَ
तो तुम अपनी बीवियों समैत एजाज़ व इकराम से बेहिश्त में दाखिल हो जाओ
71يُطَافُ عَلَيْهِم بِصِحَافٍ مِّن ذَهَبٍ وَأَكْوَابٍ ۖ وَفِيهَا مَا تَشْتَهِيهِ الْأَنفُسُ وَتَلَذُّ الْأَعْيُنُ ۖ وَأَنتُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
उन पर सोने की एक रिक़ाबियों और प्यालियों का दौर चलेगा और वहाँ जिस चीज़ को जी चाहे और जिससे ऑंखें लज्ज़त उठाएं (सब मौजूद हैं) और तुम उसमें हमेशा रहोगे
72وَتِلْكَ الْجَنَّةُ الَّتِي أُورِثْتُمُوهَا بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
और ये जन्नत जिसके तुम वारिस (हिस्सेदार) कर दिये गये हो तुम्हारी क़ारगुज़ारियों का सिला है
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
89आयत
मक्कीRevelation
70आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 70

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Tuesday, August 18, 2026

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