Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يَا عِبَادِ – "ऐ मेरे बंदों" – यहाँ अल्लाह तआला अपने नेक और परहेज़गार बंदों को संबोधित कर रहे हैं।
- لَا خَوْفٌ عَلَيْكُمُ – "न तुम्हें कोई भय है" – अर्थात आज के दिन (क़ियामत) तुम्हें किसी भी चीज़ का डर नहीं होगा।
- الْيَوْمَ – "आज" – यानी क़ियामत का दिन।
- وَلَا أَنتُمْ تَحْزَنُونَ – "और न ही तुम उदास होगे" – अर्थात न तो तुम्हें किसी बात का दुःख होगा और न ही कोई ग़म तुम्हें छू पाएगा।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में अपने नेक बंदों को वो ख़ुशख़बरी सुना रहे हैं जो उनके सब्र और ईमान का इनाम है। जब क़ियामत का दिन आएगा और सारे इंसान अपने कर्मों के हिसाब के लिए खड़े होंगे, उस वक़्त अल्लाह अपने मुत्तक़ी (परहेज़गार) बंदों से फ़रमाएगा: "ऐ मेरे बंदों! आज तुम्हें कोई भय नहीं है और न ही तुम उदास होगे।"
यह वो लम्हा है जब दुनिया की सारी परेशानियाँ, चिंताएँ और दुःख-दर्द ख़त्म हो जाते हैं। जो लोग दुनिया में अल्लाह की इबादत करते रहे, उसके अहकाम पर अमल करते रहे और उसकी राह में मुसीबतों का सामना करते रहे, उनके लिए यह दिन ख़ुशी और इत्मीनान का दिन होगा।
अल्लाह ने यहाँ "याइबादी" (ऐ मेरे बंदों) कहकर एक ख़ास मुहब्बत और क़ुर्बत का इज़हार किया है। यह संबोधन बताता है कि ये बंदे अल्लाह के ख़ास बंदे हैं, जिन्हें अल्लाह ने अपनी तरफ़ मंसूब किया है। उनके लिए न तो आगे का कोई डर है (क्योंकि उनका अंजाम जन्नत है) और न ही पीछे का कोई ग़म (क्योंकि दुनिया में जो कुछ उन्होंने छोड़ा, वह अल्लाह की रज़ा के बदले में मिलने वाले अज्र के सामने हक़ीर है)।
यह आयत हमें सिखाती है कि अगर हम अल्लाह के सच्चे बंदे बन जाएँ, उसकी इबादत को अपनी ज़िंदगी का मक़सद बना लें और उसके दिए हुए हुक्मों पर अमल करें, तो अल्लाह हमें भी इसी तरह की ख़ुशख़बरी देगा। दुनिया की मुसीबतें चाहे जितनी भी हों, अल्लाह का वादा सच्चा है कि वह अपने नेक बंदों को बेख़ौफ़ और बेग़म बना देगा।
यह वह दिन होगा जब मोमिन को उसकी सारी मेहनतों का फल मिलेगा, और वह हमेशा हमेशा के लिए अल्लाह की रहमत और जन्नत की नेमतों में रहेगा। अल्लाह हम सबको अपने उन नेक बंदों में शामिल करे, आमीन।
📜 आयत 66-70 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ
अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 68
सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 68 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ख़ुदा उनसे कहेगा ऐ मेरे बन्दों आज न तो…सूरा आयत 68/89 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ الزخرف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अज़-ज़ुखरुफ सुनें, सूरा अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, सूरा अज़-ज़ुखरुफ mp3, सूरा अज़-ज़ुखरुफ pdf. आयत 66–70. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अज़-ज़ुखरुफ
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


