अल-जासिया · 18/37
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-जासिया
ثُمَّ جَعَلْنَاكَ عَلَىٰ شَرِيعَةٍ مِّنَ الْأَمْرِ فَاتَّبِعْهَا وَلَا تَتَّبِعْ أَهْوَاءَ الَّذِينَ لَا يَعْلَمُونَ ۝١٨
Summa ja`alnaaka `alaa sharee`atim minal amri fattabi`haa wa laa tattabi`ahwaaa`al-lazeena laa ya`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
फिर (ऐ रसूल) हमने तुमको दीन के खुले रास्ते पर क़ायम किया है तो इसी (रास्ते) पर चले जाओ और नादानों की ख्वाहिशो की पैरवी न करो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • शरीअत: स्पष्ट मार्ग, कानून, और वह राह जो अल्लाह ने अपने नबी के लिए निर्धारित की।
  • अम्र: यहाँ अर्थ है दीन (धर्म) का मामला, यानी अल्लाह का आदेश और उसकी शरीअत।
  • अहवा: बहुवचन है 'हवा' का, जिसका अर्थ है मन की इच्छाएँ, सनकें, और बिना ज्ञान के मनमानी राय।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ नबी! अल्लाह तआला ने आपको एक स्पष्ट और पूर्ण शरीअत (कानून) पर स्थापित किया है, जो उसके आदेश से है। यह वही राह है जो अल्लाह ने अपने पहले के रसूलों को दी थी, और अब इसे आपके माध्यम से पूर्ण किया गया है। यह शरीअत सत्य, न्याय और भलाई पर आधारित है, और इसमें इंसान की दुनिया और आख़िरत की भलाई है।

अल्लाह आपको आदेश देता है कि आप इसी शरीअत का पालन करें, उसी पर चलें, और उसी को अपना रास्ता बनाएं। इस शरीअत से विचलित न हों, और न ही उन लोगों की मनमानी इच्छाओं का अनुसरण करें जो अल्लाह के दीन का ज्ञान नहीं रखते। ये लोग (क़ुरैश के सरदार) आपसे कहते थे कि आप अपने बाप-दादा के दीन पर लौट आएं, लेकिन उनकी यह बात ज्ञान पर आधारित नहीं थी, बल्कि महज़ अंधी परंपरा और मन की इच्छा थी।

इस आयत में हमारे लिए बहुत बड़ी शिक्षा है कि एक मुसलमान को चाहिए कि वह अपने जीवन के हर मामले में क़ुरआन और सुन्नत को ही अपना मार्गदर्शक बनाए। जब अल्लाह ने हमें एक पूर्ण और स्पष्ट शरीअत दी है, तो हमें किसी और की मनमानी राय, बनावटी नियमों, या बिना ज्ञान के विचारों की ओर नहीं भटकना चाहिए। यह शरीअत ही हमारी सच्ची पहचान है, और इसी पर चलकर हम अल्लाह की रहमत और जन्नत के हक़दार बन सकते हैं।

याद रखें, जो लोग अल्लाह के दीन से बेखबर हैं, उनकी इच्छाएँ इंसान को गुमराही की ओर ले जाती हैं। लेकिन जो व्यक्ति अल्लाह की शरीअत पर दृढ़ रहता है, उसे अल्लाह की तरफ से हिदायत, सुकून और कामयाबी मिलती है। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया में इज़्ज़त और आख़िरत में नजात दिलाएगा। आइए, हम अपने नबी ﷺ के नक्शे-क़दम पर चलते हुए इसी शरीअत को अपनाएं और उस पर साबित-क़दम रहें, क्योंकि यही सच्ची कामयाबी का ज़रिया है।



📜 आयत 16-20 — सूरा अल-जासिया

16وَلَقَدْ آتَيْنَا بَنِي إِسْرَائِيلَ الْكِتَابَ وَالْحُكْمَ وَالنُّبُوَّةَ وَرَزَقْنَاهُم مِّنَ الطَّيِّبَاتِ وَفَضَّلْنَاهُمْ عَلَى الْعَالَمِينَ
और हमने बनी इसराईल को किताब (तौरेत) और हुकूमत और नबूवत अता की और उन्हें उम्दा उम्दा चीज़ें खाने को दीं और उनको सारे जहॉन पर फ़ज़ीलत दी
17وَآتَيْنَاهُم بَيِّنَاتٍ مِّنَ الْأَمْرِ ۖ فَمَا اخْتَلَفُوا إِلَّا مِن بَعْدِ مَا جَاءَهُمُ الْعِلْمُ بَغْيًا بَيْنَهُمْ ۚ إِنَّ رَبَّكَ يَقْضِي بَيْنَهُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ فِيمَا كَانُوا فِيهِ يَخْتَلِفُونَ
और उनको दीन की खुली हुई दलीलें इनायत की तो उन लोगों ने इल्म आ चुकने के बाद बस आपस की ज़िद में एक दूसरे से एख्तेलाफ़ किया कि ये लोग जिन बातों से एख्तेलाफ़ कर रहें हैं क़यामत के दिन तुम्हारा परवरदिगार उनमें फैसला कर देगा
18ثُمَّ جَعَلْنَاكَ عَلَىٰ شَرِيعَةٍ مِّنَ الْأَمْرِ فَاتَّبِعْهَا وَلَا تَتَّبِعْ أَهْوَاءَ الَّذِينَ لَا يَعْلَمُونَ
फिर (ऐ रसूल) हमने तुमको दीन के खुले रास्ते पर क़ायम किया है तो इसी (रास्ते) पर चले जाओ और नादानों की ख्वाहिशो की पैरवी न करो
19إِنَّهُمْ لَن يُغْنُوا عَنكَ مِنَ اللَّهِ شَيْئًا ۚ وَإِنَّ الظَّالِمِينَ بَعْضُهُمْ أَوْلِيَاءُ بَعْضٍ ۖ وَاللَّهُ وَلِيُّ الْمُتَّقِينَ
ये लोग ख़ुदा के सामने तुम्हारे कुछ भी काम न आएँगे और ज़ालिम लोग एक दूसरे के मददगार हैं और ख़ुदा तो परहेज़गारों का मददगार है
20هَٰذَا بَصَائِرُ لِلنَّاسِ وَهُدًى وَرَحْمَةٌ لِّقَوْمٍ يُوقِنُونَ
ये (क़ुरान) लोगों (की) हिदायत के लिए दलीलो का मजमूआ है और बातें करने वाले लोगों के लिए (अज़सरतापा) हिदायत व रहमत है
अल-जासियाकुरान सूची
37आयत
मक्कीअवतरण स्थान
18आयत

अनुवाद — अल-जासिया 18

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Thursday, October 1, 2026

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