अल-जासिया · 19/37
अनुवाद उच्चारण — अल-जासिया
إِنَّهُمْ لَن يُغْنُوا عَنكَ مِنَ اللَّهِ شَيْئًا ۚ وَإِنَّ الظَّالِمِينَ بَعْضُهُمْ أَوْلِيَاءُ بَعْضٍ ۖ وَاللَّهُ وَلِيُّ الْمُتَّقِينَ ۝١٩
Innahum lany yughnoo `anka minal laahi shai`aa; wa innaz zaalimeena ba`duhum awliyaaa`u ba`dinw wallaahu waliyyul muttaqeen
📖 हिंदी अर्थ
ये लोग ख़ुदा के सामने तुम्हारे कुछ भी काम न आएँगे और ज़ालिम लोग एक दूसरे के मददगार हैं और ख़ुदा तो परहेज़गारों का मददगार है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَن يُغْنُوا عَنكَ – वे आपके किसी काम नहीं आ सकते, न वे आपसे अल्लाह की सज़ा को टाल सकते हैं।
  • أَوْلِيَاءُ – मित्र, सहायक, संरक्षक।
  • الْمُتَّقِينَ – वे लोग जो अल्लाह से डरते हैं और उसकी नाफ़रमानी से बचते हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! ये मुशरिकीन जो आपको अपनी मर्ज़ी और ख्वाहिशात की पैरवी की दावत देते हैं, वे अल्लाह के सामने आपको किसी भी चीज़ से बेबाक नहीं कर सकते। अगर आप उनकी बात मान लें और उनके बताए रास्ते पर चलें, तो वे अल्लाह की पकड़ और अज़ाब से आपको छुटकारा नहीं दिला सकते। यह बात सिर्फ़ आपके लिए नहीं, बल्कि हर उस इंसान के लिए नसीहत है जो अल्लाह के दीन को छोड़कर किसी और की खुशी या किसी और के डर से अपने ईमान से समझौता करता है। याद रखिए, अल्लाह के सिवा कोई पनाहगाह नहीं, और उसकी पकड़ से बचाने वाला कोई नहीं।

फिर अल्लाह तआला फरमाता है कि ज़ालिम लोग — चाहे वे मुनाफ़िक़ हों, यहूदी हों या किसी और क़ौम से हों — उनका आपस में गहरा रिश्ता होता है। वे एक-दूसरे के सहायक और मददगार होते हैं, ख़ासकर मोमिनीन के खिलाफ़। उनकी यह एकजुटता सिर्फ़ बातिल और ज़ुल्म पर क़ायम है। वे एक-दूसरे की ग़लतियों पर पर्दा डालते हैं, एक-दूसरे की बुराइयों को सही ठहराते हैं और मिलकर हक़ के रास्ते में रुकावटें खड़ी करते हैं। लेकिन इसके मुक़ाबले में अल्लाह तआला उन लोगों का वली और सरपरस्त है जो उससे डरते हैं, उसकी इबादत को क़ायम करते हैं, उसके हुक्मों की पैरवी करते हैं और उसकी मना की हुई चीज़ों से बचते हैं। जिसका वली ख़ुद अल्लाह हो, उसे किसी की परवाह नहीं, और जो अल्लाह की पनाह में हो, वह कभी नाकाम नहीं हो सकता।

दावती पहलू:

यह आयत मोमिनीन के दिलों को मज़बूती देती है कि दुनिया में चाहे ज़ालिमों की तादाद कितनी भी बड़ी क्यों न हो, उनकी ताक़त और एकजुटता से घबराने की ज़रूरत नहीं। क्योंकि असली ताक़त अल्लाह के साथ है। जो लोग तक़वा अपनाते हैं, अल्लाह उनका हिमायती बन जाता है। और जब अल्लाह किसी का मददगार हो, तो दुनिया की सारी ताक़तें मिलकर भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकतीं। यही वह रास्ता है जो इंसान को इज़्ज़त, कामयाबी और सुकून की मंज़िल तक पहुँचाता है। आइए, हम अपनी ज़िंदगी को तक़वा और अल्लाह की रज़ा पर क़ायम करें, ताकि हम भी उन खुशनसीबों में शामिल हो जाएँ जिनके वली ख़ुद अल्लाह हैं।

🎧 सुनें

📜 आयत 17-21 — अल-जासिया

17وَآتَيْنَاهُم بَيِّنَاتٍ مِّنَ الْأَمْرِ ۖ فَمَا اخْتَلَفُوا إِلَّا مِن بَعْدِ مَا جَاءَهُمُ الْعِلْمُ بَغْيًا بَيْنَهُمْ ۚ إِنَّ رَبَّكَ يَقْضِي بَيْنَهُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ فِيمَا كَانُوا فِيهِ يَخْتَلِفُونَ
और उनको दीन की खुली हुई दलीलें इनायत की तो उन लोगों ने इल्म आ चुकने के बाद बस आपस की ज़िद में एक दूसरे से एख्तेलाफ़ किया कि ये लोग जिन बातों से एख्तेलाफ़ कर रहें हैं क़यामत के दिन तुम्हारा परवरदिगार उनमें फैसला कर देगा
18ثُمَّ جَعَلْنَاكَ عَلَىٰ شَرِيعَةٍ مِّنَ الْأَمْرِ فَاتَّبِعْهَا وَلَا تَتَّبِعْ أَهْوَاءَ الَّذِينَ لَا يَعْلَمُونَ
फिर (ऐ रसूल) हमने तुमको दीन के खुले रास्ते पर क़ायम किया है तो इसी (रास्ते) पर चले जाओ और नादानों की ख्वाहिशो की पैरवी न करो
19إِنَّهُمْ لَن يُغْنُوا عَنكَ مِنَ اللَّهِ شَيْئًا ۚ وَإِنَّ الظَّالِمِينَ بَعْضُهُمْ أَوْلِيَاءُ بَعْضٍ ۖ وَاللَّهُ وَلِيُّ الْمُتَّقِينَ
ये लोग ख़ुदा के सामने तुम्हारे कुछ भी काम न आएँगे और ज़ालिम लोग एक दूसरे के मददगार हैं और ख़ुदा तो परहेज़गारों का मददगार है
20هَٰذَا بَصَائِرُ لِلنَّاسِ وَهُدًى وَرَحْمَةٌ لِّقَوْمٍ يُوقِنُونَ
ये (क़ुरान) लोगों (की) हिदायत के लिए दलीलो का मजमूआ है और बातें करने वाले लोगों के लिए (अज़सरतापा) हिदायत व रहमत है
21أَمْ حَسِبَ الَّذِينَ اجْتَرَحُوا السَّيِّئَاتِ أَن نَّجْعَلَهُمْ كَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ سَوَاءً مَّحْيَاهُمْ وَمَمَاتُهُمْ ۚ سَاءَ مَا يَحْكُمُونَ
जो लोग बुरा काम किया करते हैं क्या वह ये समझते हैं कि हम उनको उन लोगों के बराबर कर देंगे जो ईमान लाए और अच्छे अच्छे काम भी करते रहे और उन सब का जीना मरना एक सा होगा ये लोग (क्या) बुरे हुक्म लगाते हैं
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अनुवाद — अल-जासिया 19

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Tuesday, August 18, 2026

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