Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَن يُغْنُوا عَنكَ – वे आपके किसी काम नहीं आ सकते, न वे आपसे अल्लाह की सज़ा को टाल सकते हैं।
- أَوْلِيَاءُ – मित्र, सहायक, संरक्षक।
- الْمُتَّقِينَ – वे लोग जो अल्लाह से डरते हैं और उसकी नाफ़रमानी से बचते हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! ये मुशरिकीन जो आपको अपनी मर्ज़ी और ख्वाहिशात की पैरवी की दावत देते हैं, वे अल्लाह के सामने आपको किसी भी चीज़ से बेबाक नहीं कर सकते। अगर आप उनकी बात मान लें और उनके बताए रास्ते पर चलें, तो वे अल्लाह की पकड़ और अज़ाब से आपको छुटकारा नहीं दिला सकते। यह बात सिर्फ़ आपके लिए नहीं, बल्कि हर उस इंसान के लिए नसीहत है जो अल्लाह के दीन को छोड़कर किसी और की खुशी या किसी और के डर से अपने ईमान से समझौता करता है। याद रखिए, अल्लाह के सिवा कोई पनाहगाह नहीं, और उसकी पकड़ से बचाने वाला कोई नहीं।
फिर अल्लाह तआला फरमाता है कि ज़ालिम लोग — चाहे वे मुनाफ़िक़ हों, यहूदी हों या किसी और क़ौम से हों — उनका आपस में गहरा रिश्ता होता है। वे एक-दूसरे के सहायक और मददगार होते हैं, ख़ासकर मोमिनीन के खिलाफ़। उनकी यह एकजुटता सिर्फ़ बातिल और ज़ुल्म पर क़ायम है। वे एक-दूसरे की ग़लतियों पर पर्दा डालते हैं, एक-दूसरे की बुराइयों को सही ठहराते हैं और मिलकर हक़ के रास्ते में रुकावटें खड़ी करते हैं। लेकिन इसके मुक़ाबले में अल्लाह तआला उन लोगों का वली और सरपरस्त है जो उससे डरते हैं, उसकी इबादत को क़ायम करते हैं, उसके हुक्मों की पैरवी करते हैं और उसकी मना की हुई चीज़ों से बचते हैं। जिसका वली ख़ुद अल्लाह हो, उसे किसी की परवाह नहीं, और जो अल्लाह की पनाह में हो, वह कभी नाकाम नहीं हो सकता।
दावती पहलू:
यह आयत मोमिनीन के दिलों को मज़बूती देती है कि दुनिया में चाहे ज़ालिमों की तादाद कितनी भी बड़ी क्यों न हो, उनकी ताक़त और एकजुटता से घबराने की ज़रूरत नहीं। क्योंकि असली ताक़त अल्लाह के साथ है। जो लोग तक़वा अपनाते हैं, अल्लाह उनका हिमायती बन जाता है। और जब अल्लाह किसी का मददगार हो, तो दुनिया की सारी ताक़तें मिलकर भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकतीं। यही वह रास्ता है जो इंसान को इज़्ज़त, कामयाबी और सुकून की मंज़िल तक पहुँचाता है। आइए, हम अपनी ज़िंदगी को तक़वा और अल्लाह की रज़ा पर क़ायम करें, ताकि हम भी उन खुशनसीबों में शामिल हो जाएँ जिनके वली ख़ुद अल्लाह हैं।
📜 आयत 17-21 — सूरा अल-जासिया
अनुवाद — अल-जासिया 19
सूरा अल-जासिया आयत 19 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये लोग ख़ुदा के सामने तुम्हारे कुछ भी काम न…सूरा आयत 19/37 — सूरा अल-जासिया الجاثية (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-जासिया सुनें, सूरा अल-जासिया अनुवाद, सूरा अल-जासिया mp3, सूरा अल-जासिया pdf. आयत 17–21. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-जासिया
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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