अल-जासिया · 33/37
अनुवाद उच्चारण — अल-जासिया
وَبَدَا لَهُمْ سَيِّئَاتُ مَا عَمِلُوا وَحَاقَ بِهِم مَّا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ ۝٣٣
Wa badaa lahum saiyiaatu maa `amiloo wa haaqa bihim maa kaanoo bihee yastahzi`oon
📖 हिंदी अर्थ
और उनके करतूतों की बुराईयाँ उस पर ज़ाहिर हो जाएँगी और जिस (अज़ाब) की ये हँसी उड़ाया करते थे उन्हें (हर तरफ से) घेर लेगा

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بَدَا – प्रकट होना, सामने आना
  • سَيِّئَاتُ – बुराइयाँ, गलत कर्म
  • حَاقَ – घेर लेना, नीचे उतर आना, आ घेरना

तफ़सीर (व्याख्या):

जिस दिन हिसाब का समय आएगा, उस दिन उन लोगों के सामने उनके वे सारे बुरे कर्म प्रकट हो जाएँगे जो उन्होंने दुनिया में किए थे। कुफ़्र, शिर्क, गुनाह और ज़ुल्म — सब कुछ उनकी आँखों के सामने आ खड़ा होगा। कोई भी चीज़ छिपी नहीं रहेगी। हर वो गलती, हर वो बुराई जो उन्होंने की थी, वो उस दिन उन्हें साफ़ दिखाई देगी।

और फिर वो अज़ाब उन पर आ घेरेगा, जिसका वे मज़ाक उड़ाया करते थे। जब दुनिया में उन्हें आगाह किया जाता था कि अल्लाह का अज़ाब आने वाला है, तो वे हँसते थे, मज़ाक उड़ाते थे और कहते थे कि ये तो महज़ एक कहानी है। लेकिन आज वही अज़ाब उन्हें चारों तरफ से घेर लेगा, और उनके पास कोई बचाव का रास्ता नहीं होगा।

यह अल्लाह का अदल (न्याय) है — जो जैसा बोएगा, वैसा ही काटेगा। जिन लोगों ने दुनिया में अल्लाह की आयतों का मज़ाक उड़ाया, आज उन्हीं आयतों का सच उनके सामने खड़ा है। यह उनके लिए सबसे बड़ी रुसवाई और शर्मिंदगी का दिन होगा।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बहुत बड़ी नसीहत देती है कि हम अपने कर्मों से सावधान रहें। आज हम जो भी कर रहे हैं, वह कल हमारे सामने पेश होगा। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक बनाएँ। अल्लाह की आयतों और उसके दीन का मज़ाक उड़ाने वालों का अंजाम बहुत बुरा होता है। लेकिन जो लोग इस दुनिया में अल्लाह की तरफ रुजू करते हैं, तौबा करते हैं और नेक कर्म करते हैं, उनके लिए जन्नत की खुशखबरी है। अल्लाह बड़ा मेहरबान और रहम करने वाला है — वो चाहता है कि हम सीधे रास्ते पर चलें और उसकी रहमत के हक़दार बनें। आइए, हम आज ही अपने कर्मों को सुधारें, तौबा करें और अल्लाह से जुड़ें — क्योंकि कल का दिन हमारे हाथ में नहीं है।



📜 आयत 31-35 — अल-जासिया

31وَأَمَّا الَّذِينَ كَفَرُوا أَفَلَمْ تَكُنْ آيَاتِي تُتْلَىٰ عَلَيْكُمْ فَاسْتَكْبَرْتُمْ وَكُنتُمْ قَوْمًا مُّجْرِمِينَ
और जिन्होंने कुफ्र एख्तेयार किया (उनसे कहा जाएगा) तो क्या तुम्हारे सामने हमारी आयतें नहीं पढ़ी जाती थीं (ज़रूर) तो तुमने तकब्बुर किया और तुम लोग तो गुनेहगार हो गए
32وَإِذَا قِيلَ إِنَّ وَعْدَ اللَّهِ حَقٌّ وَالسَّاعَةُ لَا رَيْبَ فِيهَا قُلْتُم مَّا نَدْرِي مَا السَّاعَةُ إِن نَّظُنُّ إِلَّا ظَنًّا وَمَا نَحْنُ بِمُسْتَيْقِنِينَ
और जब (तुम से) कहा जाता था कि ख़ुदा का वायदा सच्चा है और क़यामत (के आने) में कुछ शुबहा नहीं तो तुम कहते थे कि हम नहीं जानते कि क़यामत क्या चीज़ है हम तो बस (उसे) एक ख्याली बात समझते हैं और हम तो (उसका) यक़ीन नहीं रखते
33وَبَدَا لَهُمْ سَيِّئَاتُ مَا عَمِلُوا وَحَاقَ بِهِم مَّا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ
और उनके करतूतों की बुराईयाँ उस पर ज़ाहिर हो जाएँगी और जिस (अज़ाब) की ये हँसी उड़ाया करते थे उन्हें (हर तरफ से) घेर लेगा
34وَقِيلَ الْيَوْمَ نَنسَاكُمْ كَمَا نَسِيتُمْ لِقَاءَ يَوْمِكُمْ هَٰذَا وَمَأْوَاكُمُ النَّارُ وَمَا لَكُم مِّن نَّاصِرِينَ
और (उनसे) कहा जाएगा कि जिस तरह तुमने उस दिन के आने को भुला दिया था उसी तरह आज हम तुमको अपनी रहमत से अमदन भुला देंगे और तुम्हारा ठिकाना दोज़ख़ है और कोई तुम्हारा मददगार नहीं
35ذَٰلِكُم بِأَنَّكُمُ اتَّخَذْتُمْ آيَاتِ اللَّهِ هُزُوًا وَغَرَّتْكُمُ الْحَيَاةُ الدُّنْيَا ۚ فَالْيَوْمَ لَا يُخْرَجُونَ مِنْهَا وَلَا هُمْ يُسْتَعْتَبُونَ
ये इस सबब से कि तुम लोगों ने ख़ुदा की आयतों को हँसी ठट्ठा बना रखा था और दुनयावी ज़िन्दगी ने तुमको धोखे में डाल दिया था ग़रज़ ये लोग न तो आज दुनिया से निकाले जाएँगे और न उनको इसका मौका दिया जाएगा कि (तौबा करके ख़ुदा को) राज़ी कर ले
अल-जासियाकुरान सूची
37आयत
मक्कीRevelation
33आयत

अनुवाद — अल-जासिया 33

सूरा अल-जासिया आयत 33 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उनके करतूतों की बुराईयाँ उस पर ज़ाहिर हो जाएँगी…

सूरा आयत 33/37 — अल-जासिया الجاثية (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-जासिया सुनें, अल-जासिया अनुवाद, अल-जासिया mp3, अल-जासिया pdf. आयत 31–35. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए