अल-जासिया · 34/37
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-जासिया
وَقِيلَ الْيَوْمَ نَنسَاكُمْ كَمَا نَسِيتُمْ لِقَاءَ يَوْمِكُمْ هَٰذَا وَمَأْوَاكُمُ النَّارُ وَمَا لَكُم مِّن نَّاصِرِينَ ۝٣٤
Wa qeelal yawma nansaakum kamaa naseetum liqaaa`a yawmikum haazaa wa maawaakumun Naaru wa maa lakum min naasireen
📖 हिंदी अर्थ
और (उनसे) कहा जाएगा कि जिस तरह तुमने उस दिन के आने को भुला दिया था उसी तरह आज हम तुमको अपनी रहमत से अमदन भुला देंगे और तुम्हारा ठिकाना दोज़ख़ है और कोई तुम्हारा मददगार नहीं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • نَنسَاكُمْ (नंसाकुम): हम तुम्हें भुला देंगे, अर्थात तुम्हें छोड़ देंगे और तुम्हारी ओर ध्यान नहीं देंगे।
  • نَسِيتُمْ (नसीतुम): तुम भूल गए, अर्थात तुमने उसकी परवाह नहीं की और उसके लिए कर्म नहीं किए।
  • مَأْوَاكُمْ (मअ्वाकुम): तुम्हारा ठिकाना, तुम्हारा निवास स्थान।
  • نَاصِرِينَ (नासिरीन): मददगार, सहायक।

तफसीर (व्याख्या):

आज के दिन उन अविश्वासियों से कहा जाएगा जिन्होंने अपने रब का सामना करने को भुला दिया था: "आज हम तुम्हें उसी तरह भुला देंगे जैसे तुमने इस दिन की मुलाकात को भुला दिया था।" यानी जैसे तुमने इस दिन के लिए ईमान और अच्छे कर्मों की तैयारी नहीं की, और न ही उसकी परवाह की, आज अल्लाह तुम्हें आग के अज़ाब में ऐसे छोड़ देगा जैसे कोई भूली हुई चीज़ हो जिस पर कोई ध्यान न दे। यह अल्लाह की ओर से उनका त्याग है, और उनके लिए सबसे बड़ी सज़ा है कि उन्हें रहमत की नज़र से भी वंचित कर दिया जाए।

फिर कहा जाएगा: "तुम्हारा ठिकाना आग है, और तुम्हारा निवास स्थान जहन्नम है।" यह वह जगह है जहाँ वे हमेशा रहेंगे, और उनके लिए कोई मददगार नहीं होगा जो उन्हें अल्लाह के अज़ाब से बचा सके। न कोई सिफ़ारिशी, न कोई सहायक, न कोई रक्षक। वे अकेले होंगे, बेसहारा, और उनकी पुकार का कोई जवाब देने वाला नहीं होगा।

यह आयत हमें एक बहुत बड़ी सीख देती है कि जो व्यक्ति दुनिया में अल्लाह के दीन को भूल जाता है, अल्लाह उसे क़ियामत के दिन भुला देगा। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने रब की याद को कभी न भूलें, उसकी इबादत को कभी न छोड़ें, और उस दिन की तैयारी करते रहें जब हमें उसके सामने खड़ा होना है। यह दुनिया का जीवन बहुत छोटा है, और आख़िरत का जीवन हमेशा का है। जो आज अपने रब की राह में कदम बढ़ाएगा, अल्लाह उसे क़ियामत के दिन अपनी रहमत से नवाज़ेगा। और जो आज अल्लाह से मुँह मोड़ेगा, उसे उस दिन कोई पनाह नहीं देगा। अल्लाह हम सबको अपनी याद में जीने की तौफ़ीक़ दे और हमें उस दिन के अज़ाब से बचाए। आमीन।



📜 आयत 32-36 — सूरा अल-जासिया

32وَإِذَا قِيلَ إِنَّ وَعْدَ اللَّهِ حَقٌّ وَالسَّاعَةُ لَا رَيْبَ فِيهَا قُلْتُم مَّا نَدْرِي مَا السَّاعَةُ إِن نَّظُنُّ إِلَّا ظَنًّا وَمَا نَحْنُ بِمُسْتَيْقِنِينَ
और जब (तुम से) कहा जाता था कि ख़ुदा का वायदा सच्चा है और क़यामत (के आने) में कुछ शुबहा नहीं तो तुम कहते थे कि हम नहीं जानते कि क़यामत क्या चीज़ है हम तो बस (उसे) एक ख्याली बात समझते हैं और हम तो (उसका) यक़ीन नहीं रखते
33وَبَدَا لَهُمْ سَيِّئَاتُ مَا عَمِلُوا وَحَاقَ بِهِم مَّا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ
और उनके करतूतों की बुराईयाँ उस पर ज़ाहिर हो जाएँगी और जिस (अज़ाब) की ये हँसी उड़ाया करते थे उन्हें (हर तरफ से) घेर लेगा
34وَقِيلَ الْيَوْمَ نَنسَاكُمْ كَمَا نَسِيتُمْ لِقَاءَ يَوْمِكُمْ هَٰذَا وَمَأْوَاكُمُ النَّارُ وَمَا لَكُم مِّن نَّاصِرِينَ
और (उनसे) कहा जाएगा कि जिस तरह तुमने उस दिन के आने को भुला दिया था उसी तरह आज हम तुमको अपनी रहमत से अमदन भुला देंगे और तुम्हारा ठिकाना दोज़ख़ है और कोई तुम्हारा मददगार नहीं
35ذَٰلِكُم بِأَنَّكُمُ اتَّخَذْتُمْ آيَاتِ اللَّهِ هُزُوًا وَغَرَّتْكُمُ الْحَيَاةُ الدُّنْيَا ۚ فَالْيَوْمَ لَا يُخْرَجُونَ مِنْهَا وَلَا هُمْ يُسْتَعْتَبُونَ
ये इस सबब से कि तुम लोगों ने ख़ुदा की आयतों को हँसी ठट्ठा बना रखा था और दुनयावी ज़िन्दगी ने तुमको धोखे में डाल दिया था ग़रज़ ये लोग न तो आज दुनिया से निकाले जाएँगे और न उनको इसका मौका दिया जाएगा कि (तौबा करके ख़ुदा को) राज़ी कर ले
36فَلِلَّهِ الْحَمْدُ رَبِّ السَّمَاوَاتِ وَرَبِّ الْأَرْضِ رَبِّ الْعَالَمِينَ
पस सब तारीफ ख़ुदा ही के लिए सज़ावार है जो सारे आसमान का मालिक और ज़मीन का मालिक (ग़रज़) सारे जहॉन का मालिक है
अल-जासियाकुरान सूची
37आयत
मक्कीअवतरण स्थान
34आयत

अनुवाद — अल-जासिया 34

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Thursday, October 1, 2026

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