अल-अहकाफ · 4/35
अनुवाद उच्चारण — अल-अहकाफ
قُلْ أَرَأَيْتُم مَّا تَدْعُونَ مِن دُونِ اللَّهِ أَرُونِي مَاذَا خَلَقُوا مِنَ الْأَرْضِ أَمْ لَهُمْ شِرْكٌ فِي السَّمَاوَاتِ ۖ ائْتُونِي بِكِتَابٍ مِّن قَبْلِ هَٰذَا أَوْ أَثَارَةٍ مِّنْ عِلْمٍ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ ۝٤
Qul ara`aytum maa tad`oona min doonil laahi aroonee maazaa khalaqoo minal ardi am lahum shirkun fis samaawaati eetoonee bi kitaabim min qabli haazaaa aw asaaratim min `ilmin in kuntum saadiqeen
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम पूछो कि ख़ुदा को छोड़ कर जिनकी तुम इबादत करते हो क्या तुमने उनको देखा है मुझे भी तो दिखाओ कि उन लोगों ने ज़मीन में क्या चीज़े पैदा की हैं या आसमानों (के बनाने) में उनकी शिरकत है तो अगर तुम सच्चे हो तो उससे पहले की कोई किताब (या अगलों के) इल्म का बक़िया हो तो मेरे सामने पेश करो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَرَأَيْتُمْ — मुझे बताओ, देखो तो।
  • تَدْعُونَ — जिन्हें तुम पुकारते/पूजते हो।
  • شِرْكٌ — साझेदारी, हिस्सेदारी।
  • أَثَارَةٍ مِنْ عِلْمٍ — पिछले लोगों से मिली हुई ज्ञान की निशानी, या कोई बचा-खुचा ज्ञान।

विस्तृत तफसीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से कहिए कि जिन्हें तुम अल्लाह को छोड़कर पुकारते हो — चाहे वे मूर्तियाँ हों, देवता हों, या कोई और चीज़ — उनके बारे में ज़रा सोचो। मुझे दिखाओ कि उन्होंने ज़मीन में से क्या पैदा किया है? क्या उन्होंने कोई पहाड़ बनाया? कोई नदी जारी की? कोई पेड़ उगाया? या क्या उनका आसमानों की पैदाइश में भी कोई हिस्सा है? क्या वे अल्लाह के साथ कायनात की तख़लीक़ में शरीक हैं?

अगर तुम सच्चे हो अपने इस दावे में कि ये माबूद पूजा के लायक़ हैं, तो लाओ कोई किताब जो इस कुरआन से पहले अल्लाह की तरफ से उतरी हो और जिसमें तुम्हारी इस बात की तस्दीक़ हो — या लाओ कोई इल्म का निशान जो पिछले अम्बियाओं और उनकी उम्मतों से तुम तक पहुँचा हो, जो तुम्हारे इस शिर्क की गवाही देता हो।

यह एक चुनौती है जो उनके सामने रखी गई है — कि अगर तुम्हारे पास कोई दलील है, कोई सबूत है, कोई किताब या इल्म है, तो पेश करो। लेकिन वे कभी कुछ पेश नहीं कर सकते, क्योंकि उनके पास कोई सनद नहीं, न कोई रस्मी किताब, न कोई बचा-खुचा इल्म। उनके पास तो सिर्फ़ अंधी तक़लीद और बाप-दादा की परम्परा है।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की इबादत में किसी को शरीक करना कितनी बड़ी बात है — और साथ ही यह भी कि जो लोग हक़ के मुक़ाबले में झूठे दावे करते हैं, उनसे सबूत माँगना चाहिए। अगर उनके पास सबूत नहीं, तो उनका दावा बिल्कुल बेबुनियाद है।

और यह भी याद रखिए — अल्लाह ने हमें कुरआन जैसी रोशनी दी है, जो सच्चाई की सबसे बड़ी गवाह है। जिसके पास कुरआन हो, उसे किसी और सबूत की ज़रूरत नहीं। यह किताब हमें सीधे रास्ते पर चलाती है, और जो इसे थाम ले, वह कभी गुमराह नहीं हो सकता।



📜 आयत 2-6 — अल-अहकाफ

2تَنزِيلُ الْكِتَابِ مِنَ اللَّهِ الْعَزِيزِ الْحَكِيمِ
ये किताब ग़ालिब (व) हकीम ख़ुदा की तरफ से नाज़िल हुई है
3مَا خَلَقْنَا السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا إِلَّا بِالْحَقِّ وَأَجَلٍ مُّسَمًّى ۚ وَالَّذِينَ كَفَرُوا عَمَّا أُنذِرُوا مُعْرِضُونَ
हमने तो सारे आसमान व ज़मीन और जो कुछ इन दोनों के दरमियान है हिकमत ही से एक ख़ास वक्त तक के लिए ही पैदा किया है और कुफ्फ़ार जिन चीज़ों से डराए जाते हैं उन से मुँह फेर लेते हैं
4قُلْ أَرَأَيْتُم مَّا تَدْعُونَ مِن دُونِ اللَّهِ أَرُونِي مَاذَا خَلَقُوا مِنَ الْأَرْضِ أَمْ لَهُمْ شِرْكٌ فِي السَّمَاوَاتِ ۖ ائْتُونِي بِكِتَابٍ مِّن قَبْلِ هَٰذَا أَوْ أَثَارَةٍ مِّنْ عِلْمٍ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
(ऐ रसूल) तुम पूछो कि ख़ुदा को छोड़ कर जिनकी तुम इबादत करते हो क्या तुमने उनको देखा है मुझे भी तो दिखाओ कि उन लोगों ने ज़मीन में क्या चीज़े पैदा की हैं या आसमानों (के बनाने) में उनकी शिरकत है तो अगर तुम सच्चे हो तो उससे पहले की कोई किताब (या अगलों के) इल्म का बक़िया हो तो मेरे सामने पेश करो
5وَمَنْ أَضَلُّ مِمَّن يَدْعُو مِن دُونِ اللَّهِ مَن لَّا يَسْتَجِيبُ لَهُ إِلَىٰ يَوْمِ الْقِيَامَةِ وَهُمْ عَن دُعَائِهِمْ غَافِلُونَ
और उस शख़्श से बढ़ कर कौन गुमराह हो सकता है जो ख़ुदा के सिवा ऐसे शख़्श को पुकारे जो उसे क़यामत तक जवाब ही न दे और उनको उनके पुकारने की ख़बरें तक न हों
6وَإِذَا حُشِرَ النَّاسُ كَانُوا لَهُمْ أَعْدَاءً وَكَانُوا بِعِبَادَتِهِمْ كَافِرِينَ
और जब लोग (क़यामत) में जमा किये जाएगें तो वह (माबूद) उनके दुशमन हो जाएंगे और उनकी परसतिश से इन्कार करेंगे
अल-अहकाफकुरान सूची
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4आयत

अनुवाद — अल-अहकाफ 4

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Tuesday, August 18, 2026

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