Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- بِالْحَقِّ: सत्य और उचित उद्देश्य के साथ, बिना किसी व्यर्थता के।
- أَجَلٍ مُّسَمًّى: एक निश्चित और निर्धारित समय (जो अल्लाह के पास ज्ञात है)।
- عَمَّا أُنذِرُوا: उस चीज़ से जिसके बारे में उन्हें डराया गया (यानी क़ुरआन और क़ियामत)।
- مُعْرِضُونَ: मुँह मोड़ने वाले, ध्यान न देने वाले।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला ने आसमानों, ज़मीन और उनके बीच की सभी चीज़ों को बेकार और व्यर्थ नहीं बनाया, बल्कि इन सबको सत्य के साथ और एक निश्चित अवधि तक के लिए पैदा किया। इस सृष्टि का एक महान उद्देश्य है — ताकि इंसान इन अद्भुत चीज़ों को देखकर अपने रब की महानता और कुदरत को पहचाने, उसकी एकता का इक़रार करे, और केवल उसी की इबादत करे। यह दुनिया कोई खेल या मज़ाक नहीं है, बल्कि यह एक परीक्षा की जगह है, जिसका एक निर्धारित समय है जिसे केवल अल्लाह ही जानता है। जब वह समय आएगा, तो यह पूरी कायनात खत्म हो जाएगी और सभी लोगों को अपने कर्मों का हिसाब देने के लिए उठाया जाएगा।
इस स्पष्ट सत्य और चेतावनी के बावजूद, जिन लोगों ने कुफ़्र (इनकार) को अपनाया है, वे उस चीज़ से मुँह मोड़ रहे हैं जिसके बारे में उन्हें डराया गया है — यानी क़ुरआन की आयतों, क़ियामत के दिन और अल्लाह की पकड़ से। वे न तो इन संकेतों पर ग़ौर करते हैं, न ही अपने रब की निशानियों से सबक़ लेते हैं। उनका दिल इस कदर अंधा हो चुका है कि वे उस सच्चाई से विमुख हैं जो उनके अपने भले के लिए है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें गहरी सोच और चिंतन की दावत देती है। जब हम आसमान की बुलंदियों, ज़मीन की फ़राग़त (विस्तार) और उनके बीच की अनगिनत निशानियों को देखते हैं, तो हमारा दिल अपने रब की महानता के सामने झुक जाता है। यह सृष्टि कोई संयोग नहीं है, बल्कि एक बुद्धिमान रचयिता की अद्भुत कलाकारी है। इसलिए हमें चाहिए कि हम इस कायनात की हर चीज़ में अल्लाह की निशानियाँ देखें, उसकी इबादत करें और उसकी चेतावनी को गंभीरता से लें। जो लोग इन निशानियों से आँखें बंद कर लेते हैं, वे खुद को बड़े नुक़सान में डालते हैं। अल्लाह तआला हमें उन लोगों में से न बनाएं जो सच्चाई से मुँह मोड़ते हैं, बल्कि हमें उन लोगों में से बनाएं जो उसकी आयतों पर ग़ौर करते हैं और उसकी राह पर चलते हैं। आमीन।
📜 आयत 1-5 — सूरा अल-अहकाफ
अनुवाद — अल-अहकाफ 3
सूरा अल-अहकाफ आयत 3 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हमने तो सारे आसमान व ज़मीन और जो कुछ इन…सूरा आयत 3/35 — सूरा अल-अहकाफ الأحقاف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अहकाफ सुनें, सूरा अल-अहकाफ अनुवाद, सूरा अल-अहकाफ mp3, सूरा अल-अहकाफ pdf. आयत 1–5. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-अहकाफ
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


