अल-अहकाफ · 9/35
अनुवाद उच्चारण — अल-अहकाफ
قُلْ مَا كُنتُ بِدْعًا مِّنَ الرُّسُلِ وَمَا أَدْرِي مَا يُفْعَلُ بِي وَلَا بِكُمْ ۖ إِنْ أَتَّبِعُ إِلَّا مَا يُوحَىٰ إِلَيَّ وَمَا أَنَا إِلَّا نَذِيرٌ مُّبِينٌ ۝٩
Qul maa kuntu bid`am minal Rusuli wa maaa adreee ma yuf`alu bee wa laa bikum in attabi`u illaa maa yoohaaa ilaiya ya maaa ana illaa nazeerum mubeen
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं कोई नया रसूल तो आया नहीं हूँ और मैं कुछ नहीं जानता कि आइन्दा मेरे साथ क्या किया जाएगा और न (ये कि) तुम्हारे साथ क्या किया जाएगा मैं तो बस उसी का पाबन्द हूँ जो मेरे पास वही आयी है और मैं तो बस एलानिया डराने वाला हूँ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • बिद'अन (بدعًا): अर्थात पहला और अनोखा। यानी मैं रसूलों में से पहला और अकेला नहीं हूँ।
  • नज़ीरुन मुबीन (نذير مبين): स्पष्ट रूप से डराने वाला, जो अल्लाह के अज़ाब से आगाह करे।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से कह दीजिए जो आपकी नबुव्वत को ताज्जुब की नज़र से देखते हैं और इसे कोई नई और अनोखी बात समझते हैं: "मैं रसूलों में कोई अनोखा और पहला रसूल नहीं हूँ। मुझसे पहले अल्लाह ने कई रसूल भेजे हैं। मेरा आना कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह अल्लाह की उसी रस्म (सुन्नत) का हिस्सा है जो सदियों से चली आ रही है।"

और यह भी कह दीजिए: "मैं नहीं जानता कि अल्लाह मेरे साथ और तुम्हारे साथ दुनिया में आगे क्या करेगा। यह बात ग़ैब से ताल्लुक़ रखती है, जिसका इल्म सिर्फ़ अल्लाह को है। मैं कोई ज्योतिषी या ग़ैब जानने वाला नहीं हूँ। मैं तो सिर्फ़ उसी चीज़ की पैरवी करता हूँ जो अल्लाह मेरी तरफ़ वही (प्रकाशना) के रूप में भेजता है। मैं अपनी तरफ़ से कोई बात नहीं कहता और न ही कोई नया दीन ईजाद करता हूँ। मेरा काम सिर्फ़ यह है कि तुम्हें अल्लाह के अज़ाब से साफ़ और स्पष्ट तौर पर डराऊँ।"

यानी मेरी ज़िम्मेदारी सिर्फ़ नसीहत और आगाह करना है, जो मैं पूरी वाज़ाहत के साथ निभा रहा हूँ। बाक़ी हिदायत और गुमराही अल्लाह के हाथ में है।


दावती पहलू (प्रचारात्मक पहलू):

इस आयत में हमारे प्यारे नबी ﷺ की नम्रता, सच्चाई और अल्लाह के प्रति पूर्ण समर्पण झलकता है। आप ﷺ ने कभी अपनी तरफ़ से कोई बात नहीं कही, बल्कि हर क़दम पर अल्लाह की वही का इंतज़ार किया। यह हमारे लिए सबसे बड़ी शिक्षा है कि हम भी अपनी ज़िंदगी में कुरआन और सुन्नत की पैरवी करें, अपनी मर्ज़ी और ख्वाहिशों को नहीं। जब हम अल्लाह के बताए रास्ते पर चलेंगे, तो दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होंगे। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि नबी ﷺ की तरह हमें भी अपने अमल में सच्चाई और विनम्रता अपनानी चाहिए, और लोगों को अल्लाह के दीन की तरफ़ बुलाते वक़्त साफ़ और स्पष्ट बात कहनी चाहिए, बिना किसी डर या लालच के।



📜 आयत 7-11 — अल-अहकाफ

7وَإِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ آيَاتُنَا بَيِّنَاتٍ قَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا لِلْحَقِّ لَمَّا جَاءَهُمْ هَٰذَا سِحْرٌ مُّبِينٌ
और जब हमारी खुली खुली आयतें उनके सामने पढ़ी जाती हैं तो जो लोग काफिर हैं हक़ के बारे में जब उनके पास आ चुका तो कहते हैं ये तो सरीही जादू है
8أَمْ يَقُولُونَ افْتَرَاهُ ۖ قُلْ إِنِ افْتَرَيْتُهُ فَلَا تَمْلِكُونَ لِي مِنَ اللَّهِ شَيْئًا ۖ هُوَ أَعْلَمُ بِمَا تُفِيضُونَ فِيهِ ۖ كَفَىٰ بِهِ شَهِيدًا بَيْنِي وَبَيْنَكُمْ ۖ وَهُوَ الْغَفُورُ الرَّحِيمُ
क्या ये कहते हैं कि इसने इसको ख़ुद गढ़ लिया है तो (ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगर मैं इसको (अपने जी से) गढ़ लेता तो तुम ख़ुदा के सामने मेरे कुछ भी काम न आओगे जो जो बातें तुम लोग उसके बारे में करते रहते हो वह ख़ूब जानता है मेरे और तुम्हारे दरमियान वही गवाही को काफ़ी है और वही बड़ा बख्शने वाला है मेहरबान है
9قُلْ مَا كُنتُ بِدْعًا مِّنَ الرُّسُلِ وَمَا أَدْرِي مَا يُفْعَلُ بِي وَلَا بِكُمْ ۖ إِنْ أَتَّبِعُ إِلَّا مَا يُوحَىٰ إِلَيَّ وَمَا أَنَا إِلَّا نَذِيرٌ مُّبِينٌ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं कोई नया रसूल तो आया नहीं हूँ और मैं कुछ नहीं जानता कि आइन्दा मेरे साथ क्या किया जाएगा और न (ये कि) तुम्हारे साथ क्या किया जाएगा मैं तो बस उसी का पाबन्द हूँ जो मेरे पास वही आयी है और मैं तो बस एलानिया डराने वाला हूँ
10قُلْ أَرَأَيْتُمْ إِن كَانَ مِنْ عِندِ اللَّهِ وَكَفَرْتُم بِهِ وَشَهِدَ شَاهِدٌ مِّن بَنِي إِسْرَائِيلَ عَلَىٰ مِثْلِهِ فَآمَنَ وَاسْتَكْبَرْتُمْ ۖ إِنَّ اللَّهَ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الظَّالِمِينَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि भला देखो तो कि अगर ये (क़ुरान) ख़ुदा की तरफ से हो और तुम उससे इन्कार कर बैठे हालॉकि (बनी इसराईल में से) एक गवाह उसके मिसल की गवाही भी दे चुका और ईमान भी ले आया और तुमने सरकशी की (तो तुम्हारे ज़ालिम होने में क्या शक़ है) बेशक ख़ुदा ज़ालिम लोगों को मन्ज़िल मक़सूद तक नहीं पहुँचाता
11وَقَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا لِلَّذِينَ آمَنُوا لَوْ كَانَ خَيْرًا مَّا سَبَقُونَا إِلَيْهِ ۚ وَإِذْ لَمْ يَهْتَدُوا بِهِ فَسَيَقُولُونَ هَٰذَا إِفْكٌ قَدِيمٌ
और काफिर लोग मोमिनों के बारे में कहते हैं कि अगर ये (दीन) बेहतर होता तो ये लोग उसकी तरफ हमसे पहले न दौड़ पड़ते और जब क़ुरान के ज़रिए से उनकी हिदायत न हुई तो अब भी कहेंगे ये तो एक क़दीमी झूठ है
अल-अहकाफकुरान सूची
35आयत
मक्कीRevelation
9आयत

अनुवाद — अल-अहकाफ 9

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Tuesday, August 18, 2026

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