अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- أَرَأَيْتُمْ — बताओ, देखो (अपनी स्थिति पर विचार करो)
- شَاهِدٌ — गवाह (जो सत्य की गवाही दे)
- مِن بَنِي إِسْرَائِيلَ — बनी इस्राईल (इस्राईल की संतान) में से
- عَلَى مِثْلِهِ — उसके समान (यानी उसी के अनुरूप जो तौरात में मौजूद है)
- اسْتَكْبَرْتُمْ — तुमने घमंड किया, अहंकार किया
तफ़सीर:
ऐ नबी! आप इन मक्का के मुशरिकों से कहिए: "ज़रा मुझे बताओ — अगर यह क़ुरआन वाक़ई अल्लाह की तरफ़ से आया हो, और तुमने इसे झुठला दिया हो, और बनी इस्राईल का एक गवाह (अब्दुल्लाह बिन सलाम रज़ियल्लाहु अन्हु) इसके सच्चे होने पर गवाही दे चुका हो — क्योंकि उसने तौरात में इसकी सच्चाई के निशान पढ़े थे और वह इस पर ईमान ले आया — लेकिन तुम फिर भी घमंड में आकर ईमान लाने से इनकार कर बैठे, तो क्या यह सबसे बड़ा ज़ुल्म और सबसे सख्त कुफ़्र नहीं है?"
यानी जब एक यहूदी आलिम, जो पहले अपनी किताब तौरात पर अटल था, ने क़ुरआन की सच्चाई को पहचान कर ईमान क़बूल कर लिया, तो तुम्हारा उस पर ईमान न लाना और अहंकार करना किसी और वजह से नहीं, बल्कि सिर्फ़ हठ और ज़ुल्म से है। अल्लाह तआला ऐसे ज़ालिमों को हिदायत नहीं देता, जो जानते हुए भी सत्य को ठुकरा दें और अपने घमंड की वजह से रौशनी से मुँह मोड़ लें।
यह आयत उन लोगों के लिए एक बड़ी नसीहत है — जब सच्चाई सामने आ जाए, तो उसे क़बूल करने में देर नहीं करनी चाहिए। अल्लाह उन्हीं को हिदायत देता है जो सत्य के आगे झुक जाएँ, अपने अहंकार को छोड़ दें और अपने रब की तरफ़ लौट आएँ। याद रखिए, जो लोग सत्य को जानकर भी उसका इनकार करते हैं, वे खुद अपने ऊपर ज़ुल्म करते हैं — और अल्लाह ऐसे ज़ालिमों को कभी राह नहीं दिखाता।
यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान का रास्ता इंसान को अहंकार से पाक करता है। जो इंसान अपने अहंकार को छोड़कर अल्लाह के सामने झुक जाता है, अल्लाह उसके दिल में हिदायत का नूर डाल देता है। आइए, हम सब अपने दिलों को अहंकार से पाक करें और सत्य को क़बूल करने में कभी देर न करें — क्योंकि सच्चाई को क़बूल करना ही असली कामयाबी है।
📜 आयत 8-12 — अल-अहकाफ
अनुवाद — अल-अहकाफ 10
सूरा अल-अहकाफ आयत 10 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम कह दो कि भला देखो तो कि…सूरा आयत 10/35 — अल-अहकाफ الأحقاف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अहकाफ सुनें, अल-अहकाफ अनुवाद, अल-अहकाफ mp3, अल-अहकाफ pdf. आयत 8–12. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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