अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَوْلَا – क्यों नहीं / काश
- مُحْكَمَةٌ – पक्की और स्पष्ट आयतों वाली सूरह, जिसके आदेश स्पष्ट और दृढ़ हों
- الَّذِينَ فِي قُلُوبِهِم مَّرَضٌ – वे लोग जिनके दिलों में शक और निफ़ाक़ (दोहरापन) की बीमारी है
- الْمَغْشِيِّ عَلَيْهِ مِنَ الْمَوْتِ – वह व्यक्ति जिस पर मौत की सख्ती के कारण बेहोशी छा गई हो
- فَأَوْلَى لَهُمْ – उनके लिए विनाश है / उन पर अफसोस है
तफसीर (व्याख्या):
ईमान वाले मोमिनीन की फ़ितरत ही होती है कि वे हमेशा अल्लाह के हुक्म की ताबेदारी के लिए बेचैन रहते हैं। वे चाहते हैं कि जल्द से जल्द अल्लाह की कोई सूरह उतरे जिसमें जिहाद का हुक्म हो, ताकि वे अपने रब की राह में अपनी जान और माल कुर्बान कर सकें। यह उनके ईमान की गहराई और अल्लाह से मुहब्बत की निशानी है।
लेकिन जब अल्लाह की ओर से कोई मुहकम (स्पष्ट और पक्की) सूरह उतरती है, जिसमें जिहाद का ज़िक्र होता है, तो उनका हाल देखने लायक होता है। जिन लोगों के दिलों में शक और निफ़ाक़ की बीमारी है, वे आप (नबी) की तरफ इस तरह देखते हैं जैसे किसी मरने वाले पर मौत की बेहोशी छा गई हो। उनकी आँखों में खौफ़ और दहशत साफ़ झलकती है, क्योंकि जिहाद का हुक्म उनके लिए मौत से भी बदतर है। वे दुनिया की खातिर आख़िरत को बेच चुके हैं, इसलिए अल्लाह की राह में कुर्बानी का नाम सुनते ही उनके होश उड़ जाते हैं।
अल्लाह तआला उनके लिए फरमाता है: "उनके लिए विनाश है!" यह एक सख्त चेतावनी और धमकी है कि उनका अंजाम बहुत बुरा होगा। अगर वे अल्लाह की बात मान लेते और सच्चे दिल से ईमान लाते, तो उनके लिए यही सबसे बेहतर होता। लेकिन उन्होंने दुनिया की खातिर आख़िरत को ठुकरा दिया।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान की पहचान यह है कि इंसान अल्लाह के हुक्मों के लिए हमेशा तैयार रहे, चाहे वह जिहाद हो या कोई और इबादत। मोमिन वही है जो अल्लाह के हुक्म को सुनते ही "सुना और माना" कह दे। जिहाद सिर्फ़ जंग नहीं है, बल्कि अपने नफ्स से लड़ाई, अपनी बुराइयों को छोड़ना और अल्लाह की राह में हर कुर्बानी के लिए तैयार रहना भी जिहाद है। आज हमें भी अपने दिलों की जांच करनी चाहिए कि कहीं हमारे दिलों में भी तो जिहाद और अल्लाह के हुक्मों से दूर भागने की बीमारी नहीं है। अल्लाह हमें सच्चे मोमिन बनाए और हमारे दिलों से शक और निफ़ाक़ की बीमारी को दूर करे। आमीन।
📜 आयत 18-22 — मुहम्मद
अनुवाद — मुहम्मद 20
सूरा मुहम्मद आयत 20 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और मोमिनीन कहते हैं कि (जेहाद के बारे में) कोई…सूरा आयत 20/38 — मुहम्मद محمد (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: मुहम्मद सुनें, मुहम्मद अनुवाद, मुहम्मद mp3, मुहम्मद pdf. आयत 18–22. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








