Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مُتَقَلَّبَكُمْ: दिन में तुम्हारा आना-जाना, उठना-बैठना, और तुम्हारी सारी गतिविधियाँ।
- مَثْوَاكُمْ: रात में तुम्हारा ठहरना, सोने की जगह, और आख़िरत में तुम्हारा ठिकाना (जन्नत या जहन्नम)।
तफ़सीर:
ऐ नबी! सबसे पहले इस बात को अच्छी तरह जान लो और उस पर दृढ़ रहो कि अल्लाह के सिवा कोई सच्चा माबूद (पूज्य) नहीं है। यही तौहीद का कलिमा है, यही ईमान की बुनियाद है, और यही वह सच्चाई है जिसके लिए यह दुनिया बनाई गई और जिसके लिए सारे नबी भेजे गए। यह ज्ञान सिर्फ़ दिल में छिपा नहीं रहना चाहिए, बल्कि उस पर अमल करना चाहिए और उसे ज़बान से भी बयान करते रहना चाहिए।
इसके बाद अल्लाह तआला अपने नबी को नसीहत करता है कि अपने गुनाहों की माफ़ी माँगो और साथ ही साथ सारे मोमिन मर्दों और मोमिन औरतों के लिए भी माफ़ी की दुआ करो। यह एक बहुत बड़ी सिखावन है कि इंसान सिर्फ़ अपने लिए ही नहीं, बल्कि अपने भाई-बहनों के लिए भी दुआ करे। जब नबी को यह हुक्म दिया गया, तो उनके बाद उनकी उम्मत को भी यही सीख दी गई कि वे आपस में एक-दूसरे के लिए दुआएँ माँगें। यही इस्लामी भाईचारे की असली तस्वीर है।
फिर अल्लाह फ़रमाता है कि वह तुम्हारे हर हाल को जानता है — दिन में तुम कहाँ-कहाँ जाते हो, क्या करते हो, और रात को कहाँ ठहरते हो, कहाँ सोते हो। यहाँ तक कि आख़िरत में तुम्हारा ठिकाना भी उसे मालूम है — कौन जन्नत में जाएगा और कौन जहन्नम में। उसके इल्म से कोई चीज़ छिपी नहीं है। यह बात इंसान को सचेत करती है कि वह हर वक़्त अल्लाह की निगरानी में है, इसलिए उसे अपने अमल को सुधारना चाहिए और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाना चाहिए।
इस आयत में एक बहुत प्यारी सीख है कि इंसान को चाहिए कि वह अपने ईमान को मज़बूत करे, अपने गुनाहों से तौबा करे, और दूसरे मोमिनों के लिए भी दुआ करता रहे। यही वह रास्ता है जो इंसान को अल्लाह की मुहब्बत और उसकी माफ़ी के क़रीब ले जाता है। अल्लाह तआला अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है — वह चाहता है कि उसके बंदे उसकी तरफ़ रुजू करें, उससे माफ़ी माँगें, और एक-दूसरे के लिए भी दुआ करें। यही सच्ची कामयाबी का ज़रिया है।
📜 आयत 17-21 — सूरा मुहम्मद
अनुवाद — मुहम्मद 19
सूरा मुहम्मद आयत 19 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो फिर समझ लो कि ख़ुदा के सिवा कोई माबूद…सूरा आयत 19/38 — सूरा मुहम्मद محمد (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा मुहम्मद सुनें, सूरा मुहम्मद अनुवाद, सूरा मुहम्मद mp3, सूरा मुहम्मद pdf. आयत 17–21. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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