मुहम्मद · 19/38
अनुवाद उच्चारण — मुहम्मद
فَاعْلَمْ أَنَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ وَاسْتَغْفِرْ لِذَنبِكَ وَلِلْمُؤْمِنِينَ وَالْمُؤْمِنَاتِ ۗ وَاللَّهُ يَعْلَمُ مُتَقَلَّبَكُمْ وَمَثْوَاكُمْ ۝١٩
Fa`lam annahoo laaa ilaaha illal laahu wastaghfir lizambika wa lilmu`mineena walmu`minaat; wallaahu ya`lamu mutaqallabakum wa maswaakum
📖 हिंदी अर्थ
तो फिर समझ लो कि ख़ुदा के सिवा कोई माबूद नहीं और (हम से) अपने और ईमानदार मर्दों और ईमानदार औरतों के गुनाहों की माफ़ी मांगते रहो और ख़ुदा तुम्हारे चलने फिरने और ठहरने से (ख़ूब) वाक़िफ़ है

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مُتَقَلَّبَكُمْ: दिन में तुम्हारा आना-जाना, उठना-बैठना, और तुम्हारी सारी गतिविधियाँ।
  • مَثْوَاكُمْ: रात में तुम्हारा ठहरना, सोने की जगह, और आख़िरत में तुम्हारा ठिकाना (जन्नत या जहन्नम)।

तफ़सीर:

ऐ नबी! सबसे पहले इस बात को अच्छी तरह जान लो और उस पर दृढ़ रहो कि अल्लाह के सिवा कोई सच्चा माबूद (पूज्य) नहीं है। यही तौहीद का कलिमा है, यही ईमान की बुनियाद है, और यही वह सच्चाई है जिसके लिए यह दुनिया बनाई गई और जिसके लिए सारे नबी भेजे गए। यह ज्ञान सिर्फ़ दिल में छिपा नहीं रहना चाहिए, बल्कि उस पर अमल करना चाहिए और उसे ज़बान से भी बयान करते रहना चाहिए।

इसके बाद अल्लाह तआला अपने नबी को नसीहत करता है कि अपने गुनाहों की माफ़ी माँगो और साथ ही साथ सारे मोमिन मर्दों और मोमिन औरतों के लिए भी माफ़ी की दुआ करो। यह एक बहुत बड़ी सिखावन है कि इंसान सिर्फ़ अपने लिए ही नहीं, बल्कि अपने भाई-बहनों के लिए भी दुआ करे। जब नबी को यह हुक्म दिया गया, तो उनके बाद उनकी उम्मत को भी यही सीख दी गई कि वे आपस में एक-दूसरे के लिए दुआएँ माँगें। यही इस्लामी भाईचारे की असली तस्वीर है।

फिर अल्लाह फ़रमाता है कि वह तुम्हारे हर हाल को जानता है — दिन में तुम कहाँ-कहाँ जाते हो, क्या करते हो, और रात को कहाँ ठहरते हो, कहाँ सोते हो। यहाँ तक कि आख़िरत में तुम्हारा ठिकाना भी उसे मालूम है — कौन जन्नत में जाएगा और कौन जहन्नम में। उसके इल्म से कोई चीज़ छिपी नहीं है। यह बात इंसान को सचेत करती है कि वह हर वक़्त अल्लाह की निगरानी में है, इसलिए उसे अपने अमल को सुधारना चाहिए और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाना चाहिए।

इस आयत में एक बहुत प्यारी सीख है कि इंसान को चाहिए कि वह अपने ईमान को मज़बूत करे, अपने गुनाहों से तौबा करे, और दूसरे मोमिनों के लिए भी दुआ करता रहे। यही वह रास्ता है जो इंसान को अल्लाह की मुहब्बत और उसकी माफ़ी के क़रीब ले जाता है। अल्लाह तआला अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है — वह चाहता है कि उसके बंदे उसकी तरफ़ रुजू करें, उससे माफ़ी माँगें, और एक-दूसरे के लिए भी दुआ करें। यही सच्ची कामयाबी का ज़रिया है।



📜 आयत 17-21 — मुहम्मद

17وَالَّذِينَ اهْتَدَوْا زَادَهُمْ هُدًى وَآتَاهُمْ تَقْوَاهُمْ
और जो लोग हिदायत याफ़ता हैं उनको ख़ुदा (क़ुरान के ज़रिए से) मज़ीद हिदायत करता है और उनको परहेज़गारी अता फरमाता है
18فَهَلْ يَنظُرُونَ إِلَّا السَّاعَةَ أَن تَأْتِيَهُم بَغْتَةً ۖ فَقَدْ جَاءَ أَشْرَاطُهَا ۚ فَأَنَّىٰ لَهُمْ إِذَا جَاءَتْهُمْ ذِكْرَاهُمْ
तो क्या ये लोग बस क़यामत ही के मुनतज़िर हैं कि उन पर एक बारगी आ जाए तो उसकी निशानियाँ आ चुकी हैं तो जिस वक्त क़यामत उन (के सर) पर आ पहुँचेगी फिर उन्हें नसीहत कहाँ मुफीद हो सकती है
19فَاعْلَمْ أَنَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ وَاسْتَغْفِرْ لِذَنبِكَ وَلِلْمُؤْمِنِينَ وَالْمُؤْمِنَاتِ ۗ وَاللَّهُ يَعْلَمُ مُتَقَلَّبَكُمْ وَمَثْوَاكُمْ
तो फिर समझ लो कि ख़ुदा के सिवा कोई माबूद नहीं और (हम से) अपने और ईमानदार मर्दों और ईमानदार औरतों के गुनाहों की माफ़ी मांगते रहो और ख़ुदा तुम्हारे चलने फिरने और ठहरने से (ख़ूब) वाक़िफ़ है
20وَيَقُولُ الَّذِينَ آمَنُوا لَوْلَا نُزِّلَتْ سُورَةٌ ۖ فَإِذَا أُنزِلَتْ سُورَةٌ مُّحْكَمَةٌ وَذُكِرَ فِيهَا الْقِتَالُ ۙ رَأَيْتَ الَّذِينَ فِي قُلُوبِهِم مَّرَضٌ يَنظُرُونَ إِلَيْكَ نَظَرَ الْمَغْشِيِّ عَلَيْهِ مِنَ الْمَوْتِ ۖ فَأَوْلَىٰ لَهُمْ
और मोमिनीन कहते हैं कि (जेहाद के बारे में) कोई सूरा क्यों नहीं नाज़िल होता लेकिन जब कोई साफ़ सरीही मायनों का सूरा नाज़िल हुआ और उसमें जेहाद का बयान हो तो जिन लोगों के दिल में (नेफ़ाक़) का मर्ज़ है तुम उनको देखोगे कि तुम्हारी तरफ़ इस तरह देखते हैं जैसे किसी पर मौत की बेहोशी (छायी) हो (कि उसकी ऑंखें पथरा जाएं) तो उन पर वाए हो
21طَاعَةٌ وَقَوْلٌ مَّعْرُوفٌ ۚ فَإِذَا عَزَمَ الْأَمْرُ فَلَوْ صَدَقُوا اللَّهَ لَكَانَ خَيْرًا لَّهُمْ
(उनके लिए अच्छा काम तो) फरमाबरदारी और पसन्दीदा बात है फिर जब लड़ाई ठन जाए तो अगर ये लोग ख़ुदा से सच्चे रहें तो उनके हक़ में बहुत बेहतर है
मुहम्मदकुरान सूची
38आयत
मदनीRevelation
19आयत

अनुवाद — मुहम्मद 19

सूरा मुहम्मद आयत 19 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो फिर समझ लो कि ख़ुदा के सिवा कोई माबूद…

सूरा आयत 19/38 — मुहम्मद محمد (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: मुहम्मद सुनें, मुहम्मद अनुवाद, मुहम्मद mp3, मुहम्मद pdf. आयत 17–21. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए