अल-फतह · 7/29
अनुवाद उच्चारण — अल-फतह
وَلِلَّهِ جُنُودُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ وَكَانَ اللَّهُ عَزِيزًا حَكِيمًا ۝٧
Wa lillaahi junoodus samaawaati wal ard; wa kaanal laahu `azeezan hakeema
📖 हिंदी अर्थ
और सारे आसमान व ज़मीन के लश्कर ख़ुदा ही के हैं और ख़ुदा तो बड़ा वाक़िफ़कार (और) ग़ालिब है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • जुनूद (جنود): सेनाएँ, लश्कर, फ़ौजें।
  • अज़ीज़ (عزيز): सब पर ग़ालिब, बहुत ताक़तवर, जिसे कोई हरा न सके।
  • हकीम (حكيم): सब काम हिकमत और मसलहत के साथ करने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत मुसलमानों के दिलों को तसल्ली और हिम्मत देती है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि आसमानों और ज़मीन की सारी फ़ौजें उसी की मिल्कियत में हैं। आसमानों में फ़रिश्ते, जिनमें जिब्रील, मीकाइल और दूसरे करीबी फ़रिश्ते शामिल हैं, और ज़मीन में वो लश्कर जो अल्लाह की राह में जिहाद करते हैं — सब अल्लाह ही के हैं। वो जिसे चाहता है इन फ़ौजों के ज़रिए अपने नेक बंदों की मदद करता है और उन्हें कामयाबी देता है।

अल्लाह तआला अज़ीज़ है यानी वो इतना ताक़तवर है कि उसे कोई मात नहीं दे सकता, उसके फ़ैसले के आगे कोई नहीं चल सकता। और वो हकीम है यानी जो कुछ वो करता है हिकमत से करता है। अगर कभी मुसलमानों को दुश्मनों से टकराना पड़े या किसी मैदान में पीछे हटना पड़े, तो ये अल्लाह की हिकमत से होता है — कभी वो मुसलमानों को आज़माता है, कभी उनके दर्जे बुलंद करता है, और कभी दुश्मनों को उनके किए की सज़ा देता है।

इस आयत से हमें ये सबक मिलता है कि ताक़त और फ़ौजें सिर्फ़ अल्लाह के हाथ में हैं। इंसान चाहे कितनी भी बड़ी फ़ौज जमा कर ले, अल्लाह की मदद के बग़ैर वो कुछ नहीं कर सकता। इसलिए हमें हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए, उसी से मदद माँगनी चाहिए, और यक़ीन रखना चाहिए कि अल्लाह अपने नेक बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता। जब हम देखते हैं कि पूरी कायनात अल्लाह के इशारे पर चलती है, तो हमारा दिल इत्मीनान से भर जाता है और हमें यक़ीन हो जाता है कि हमारा रब सब कुछ कर सकता है — बस ज़रूरत है सब्र और भरोसे की।

🎧 सुनें

📜 आयत 5-9 — अल-फतह

5لِّيُدْخِلَ الْمُؤْمِنِينَ وَالْمُؤْمِنَاتِ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا وَيُكَفِّرَ عَنْهُمْ سَيِّئَاتِهِمْ ۚ وَكَانَ ذَٰلِكَ عِندَ اللَّهِ فَوْزًا عَظِيمًا
ताकि मोमिन मर्द और मोमिना औरतों को (बेहिश्त) के बाग़ों में जा पहुँचाए जिनके नीचे नहरें जारी हैं और ये वहाँ हमेशा रहेंगे और उनके गुनाहों को उनसे दूर कर दे और ये ख़ुदा के नज़दीक बड़ी कामयाबी है
6وَيُعَذِّبَ الْمُنَافِقِينَ وَالْمُنَافِقَاتِ وَالْمُشْرِكِينَ وَالْمُشْرِكَاتِ الظَّانِّينَ بِاللَّهِ ظَنَّ السَّوْءِ ۚ عَلَيْهِمْ دَائِرَةُ السَّوْءِ ۖ وَغَضِبَ اللَّهُ عَلَيْهِمْ وَلَعَنَهُمْ وَأَعَدَّ لَهُمْ جَهَنَّمَ ۖ وَسَاءَتْ مَصِيرًا
और मुनाफिक़ मर्द और मुनाफ़िक़ औरतों और मुशरिक मर्द और मुशरिक औरतों पर जो ख़ुदा के हक़ में बुरे बुरे ख्याल रखते हैं अज़ाब नाज़िल करे उन पर (मुसीबत की) बड़ी गर्दिश है (और ख़ुदा) उन पर ग़ज़बनाक है और उसने उस पर लानत की है और उनके लिए जहन्नुम को तैयार कर रखा है और वह (क्या) बुरी जगह है
7وَلِلَّهِ جُنُودُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ وَكَانَ اللَّهُ عَزِيزًا حَكِيمًا
और सारे आसमान व ज़मीन के लश्कर ख़ुदा ही के हैं और ख़ुदा तो बड़ा वाक़िफ़कार (और) ग़ालिब है
8إِنَّا أَرْسَلْنَاكَ شَاهِدًا وَمُبَشِّرًا وَنَذِيرًا
(ऐ रसूल) हमने तुमको (तमाम आलम का) गवाह और ख़ुशख़बरी देने वाला और धमकी देने वाला (पैग़म्बर बनाकर) भेजा
9لِّتُؤْمِنُوا بِاللَّهِ وَرَسُولِهِ وَتُعَزِّرُوهُ وَتُوَقِّرُوهُ وَتُسَبِّحُوهُ بُكْرَةً وَأَصِيلًا
ताकि (मुसलमानों) तुम लोग ख़ुदा और उसके रसूल पर ईमान लाओ और उसकी मदद करो और उसको बुज़ुर्ग़ समझो और सुबह और शाम उसी की तस्बीह करो
अल-फतहकुरान सूची
29आयत
मदनीRevelation
7आयत

अनुवाद — अल-फतह 7

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Tuesday, August 18, 2026

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