अल-माइदा · 16/120
अनुवाद उच्चारण — अल-माइदा
يَهْدِي بِهِ اللَّهُ مَنِ اتَّبَعَ رِضْوَانَهُ سُبُلَ السَّلَامِ وَيُخْرِجُهُم مِّنَ الظُّلُمَاتِ إِلَى النُّورِ بِإِذْنِهِ وَيَهْدِيهِمْ إِلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ ۝١٦
Yahdee bihil laahu manit taba`a ridwaanahoo subulas salaami wa yukhrijuhum minaz zulumaati ilan noori bi iznihee wa yahdeehim ilaa Siraatim Mustaqeem
📖 हिंदी अर्थ
जो लोग ख़ुदा की ख़ुशनूदी के पाबन्द हैं उनको तो उसके ज़रिए से राहे निजात की हिदायत करता है और अपने हुक्म से (कुफ़्र की) तारीकी से निकालकर (ईमान की) रौशनी में लाता है और राहे रास्त पर पहुंचा देता है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَهْدِي – मार्गदर्शन करता है
  • رِضْوَانَهُ – उसकी प्रसन्नता (अल्लाह की रज़ा)
  • سُبُلَ السَّلَامِ – शांति और सुरक्षा के मार्ग
  • الظُّلُمَاتِ – अंधकार (कुफ्र और गुनाह के अंधेरे)
  • النُّورِ – प्रकाश (ईमान और हिदायत की रोशनी)
  • صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ – सीधा रास्ता (इस्लाम का रास्ता)

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हमें उस महान किताब (कुरआन) की अज़ीमुश्शान फज़ीलत बताती है जो अल्लाह ने अपने रसूल ﷺ पर उतारी। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि इस कुरआन के ज़रिए वह उन लोगों को शांति और सलामती के रास्ते दिखाता है जो उसकी रज़ा की तलाश में होते हैं। यानी जो लोग अल्लाह की खुशी को अपना निशाना बनाते हैं, उनके दिलों को अल्लाह इस किताब के ज़रिए हिदायत देता है और उन्हें उन रास्तों पर चलाता है जो उन्हें जन्नत तक पहुँचाते हैं।

फिर अल्लाह फ़रमाता है कि वह उन्हें अंधकारों से निकालकर रोशनी की तरफ लाता है। ये अंधकार क्या हैं? ये हैं कुफ्र का अंधकार, शिर्क का अंधकार, गुनाह और नाफ़रमानी का अंधकार। और रोशनी क्या है? यह है ईमान की रोशनी, तौहीद की रोशनी और अल्लाह की इताअत की रोशनी। यह सब कुछ अल्लाह की इजाज़त और उसकी मर्ज़ी से होता है, क्योंकि हिदायत देना सिर्फ अल्लाह के हाथ में है।

आख़िर में अल्लाह फ़रमाता है कि वह उन्हें सीधे रास्ते की तरफ ले जाता है — वह रास्ता जो सबसे करीब है अल्लाह तक पहुँचने का, वह रास्ता जो इस्लाम है। यह वह रास्ता है जिस पर चलकर इंसान दुनिया में भी सुकून पाता है और आख़िरत में भी कामयाब होता है।

दावती पहलू:

प्यारे भाइयो और बहनों! यह आयत हमें बताती है कि कुरआन सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि एक रहनुमा है, एक मशाल है जो अंधेरों में रास्ता दिखाती है। जो इंसान इस किताब को पकड़ लेता है, अल्लाह उसे कभी अकेला नहीं छोड़ता। वह उसे हर अंधेरे से निकालकर रोशनी की तरफ ले जाता है। आज दुनिया भर में इंसानियत तरह-तरह के अंधकारों में भटक रही है — चाहे वह मानसिक बेचैनी हो, रूहानी ख़ालीपन हो, या सामाजिक बिखराव। इसका हल सिर्फ कुरआन में है। यह किताब उस रब की तरफ से आई है जो अपने बंदों से बेहद मुहब्बत करता है और चाहता है कि वे सलामती और खुशहाली वाले रास्ते पर चलें। आइए हम इस किताब को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें — ताकि अल्लाह हमें भी उन लोगों में शामिल करे जिन्हें वह अंधकारों से निकालकर अपने नूर की तरफ ले जाता है।



📜 आयत 14-18 — अल-माइदा

14وَمِنَ الَّذِينَ قَالُوا إِنَّا نَصَارَىٰ أَخَذْنَا مِيثَاقَهُمْ فَنَسُوا حَظًّا مِّمَّا ذُكِّرُوا بِهِ فَأَغْرَيْنَا بَيْنَهُمُ الْعَدَاوَةَ وَالْبَغْضَاءَ إِلَىٰ يَوْمِ الْقِيَامَةِ ۚ وَسَوْفَ يُنَبِّئُهُمُ اللَّهُ بِمَا كَانُوا يَصْنَعُونَ
और जो लोग कहते हैं कि हम नसरानी हैं उनसे (भी) हमने ईमान का एहद (व पैमान) लिया था मगर जब जिन जिन बातों की उन्हें नसीहत की गयी थी उनमें से एक बड़ा हिस्सा (रिसालत) भुला बैठे तो हमने भी (उसकी सज़ा में) क़यामत तक उनमें बाहम अदावत व दुशमनी की बुनियाद डाल दी और ख़ुदा उन्हें बहुत जल्द (क़यामत के दिन) बता देगा कि वह क्या क्या करते थे
15يَا أَهْلَ الْكِتَابِ قَدْ جَاءَكُمْ رَسُولُنَا يُبَيِّنُ لَكُمْ كَثِيرًا مِّمَّا كُنتُمْ تُخْفُونَ مِنَ الْكِتَابِ وَيَعْفُو عَن كَثِيرٍ ۚ قَدْ جَاءَكُم مِّنَ اللَّهِ نُورٌ وَكِتَابٌ مُّبِينٌ
ऐ अहले किताब तुम्हारे पास हमारा पैगम्बर (मोहम्मद सल्ल) आ चुका जो किताबे ख़ुदा की उन बातों में से जिन्हें तुम छुपाया करते थे बहुतेरी तो साफ़ साफ़ बयान कर देगा और बहुतेरी से (अमदन) दरगुज़र करेगा तुम्हरे पास तो ख़ुदा की तरफ़ से एक (चमकता हुआ) नूर और साफ़ साफ़ बयान करने वाली किताब (कुरान) आ चुकी है
16يَهْدِي بِهِ اللَّهُ مَنِ اتَّبَعَ رِضْوَانَهُ سُبُلَ السَّلَامِ وَيُخْرِجُهُم مِّنَ الظُّلُمَاتِ إِلَى النُّورِ بِإِذْنِهِ وَيَهْدِيهِمْ إِلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ
जो लोग ख़ुदा की ख़ुशनूदी के पाबन्द हैं उनको तो उसके ज़रिए से राहे निजात की हिदायत करता है और अपने हुक्म से (कुफ़्र की) तारीकी से निकालकर (ईमान की) रौशनी में लाता है और राहे रास्त पर पहुंचा देता है
17لَّقَدْ كَفَرَ الَّذِينَ قَالُوا إِنَّ اللَّهَ هُوَ الْمَسِيحُ ابْنُ مَرْيَمَ ۚ قُلْ فَمَن يَمْلِكُ مِنَ اللَّهِ شَيْئًا إِنْ أَرَادَ أَن يُهْلِكَ الْمَسِيحَ ابْنَ مَرْيَمَ وَأُمَّهُ وَمَن فِي الْأَرْضِ جَمِيعًا ۗ وَلِلَّهِ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا ۚ يَخْلُقُ مَا يَشَاءُ ۚ وَاللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
जो लोग उसके क़ायल हैं कि मरियम के बेटे मसीह बस ख़ुदा हैं वह ज़रूर काफ़िर हो गए (ऐ रसूल) उनसे पूंछो तो कि भला अगर ख़ुदा मरियम के बेटे मसीह और उनकी मॉ को और जितने लोग ज़मीन में हैं सबको मार डालना चाहे तो कौन ऐसा है जिसका ख़ुदा से भी ज़ोर चले (और रोक दे) और सारे आसमान और ज़मीन में और जो कुछ भी उनके दरमियान में है सब ख़ुदा ही की सल्तनत है जो चाहता है पैदा करता है और ख़ुदा तो हर चीज़ पर क़ादिर है
18وَقَالَتِ الْيَهُودُ وَالنَّصَارَىٰ نَحْنُ أَبْنَاءُ اللَّهِ وَأَحِبَّاؤُهُ ۚ قُلْ فَلِمَ يُعَذِّبُكُم بِذُنُوبِكُم ۖ بَلْ أَنتُم بَشَرٌ مِّمَّنْ خَلَقَ ۚ يَغْفِرُ لِمَن يَشَاءُ وَيُعَذِّبُ مَن يَشَاءُ ۚ وَلِلَّهِ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا ۖ وَإِلَيْهِ الْمَصِيرُ
और नसरानी और यहूदी तो कहते हैं कि हम ही ख़ुदा के बेटे और उसके चहेते हैं (ऐ रसूल) उनसे तुम कह दो (कि अगर ऐसा है) तो फिर तुम्हें तुम्हारे गुनाहों की सज़ा क्यों देता है (तुम्हारा ख्याल लग़ो है) बल्कि तुम भी उसकी मख़लूक़ात से एक बशर हो ख़ुदा जिसे चाहेगा बख़ देगा और जिसको चाहेगा सज़ा देगा आसमान और ज़मीन और जो कुछ उन दोनों के दरमियान में है सब ख़ुदा ही का मुल्क है और सबको उसी की तरफ़ लौट कर जाना है
अल-माइदाकुरान सूची
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अनुवाद — अल-माइदा 16

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सूरा आयत 16/120 — अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-माइदा सुनें, अल-माइदा अनुवाद, अल-माइदा mp3, अल-माइदा pdf. आयत 14–18. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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