अल-माइदा · 17/120
अनुवाद उच्चारण — अल-माइदा
لَّقَدْ كَفَرَ الَّذِينَ قَالُوا إِنَّ اللَّهَ هُوَ الْمَسِيحُ ابْنُ مَرْيَمَ ۚ قُلْ فَمَن يَمْلِكُ مِنَ اللَّهِ شَيْئًا إِنْ أَرَادَ أَن يُهْلِكَ الْمَسِيحَ ابْنَ مَرْيَمَ وَأُمَّهُ وَمَن فِي الْأَرْضِ جَمِيعًا ۗ وَلِلَّهِ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا ۚ يَخْلُقُ مَا يَشَاءُ ۚ وَاللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ ۝١٧
Laqad kafaral lazeena qaalooo innal laaha huwal maseehub nu Maryam; qul famany-yamliku minal laahi shai`an in araada ai yuhlikal Maseehab na Maryama wa ummahoo wa man fil ardi jamee`aa, wa lillaahi mmulkus samaawaati wal ardi wa maa bainahumaa; yakhluqu maa Yashaaa`; wakhluqu maa yashaaa`; wallaahu `alaa kulli shai`in Qadeer
📖 हिंदी अर्थ
जो लोग उसके क़ायल हैं कि मरियम के बेटे मसीह बस ख़ुदा हैं वह ज़रूर काफ़िर हो गए (ऐ रसूल) उनसे पूंछो तो कि भला अगर ख़ुदा मरियम के बेटे मसीह और उनकी मॉ को और जितने लोग ज़मीन में हैं सबको मार डालना चाहे तो कौन ऐसा है जिसका ख़ुदा से भी ज़ोर चले (और रोक दे) और सारे आसमान और ज़मीन में और जो कुछ भी उनके दरमियान में है सब ख़ुदा ही की सल्तनत है जो चाहता है पैदा करता है और ख़ुदा तो हर चीज़ पर क़ादिर है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ (معاني الكلمات):

  • لَقَدْ كَفَرَ: निश्चय ही काफिर (अविश्वासी) हो गए।
  • يَمْلِكُ: अधिकार रखता है, रोक सकता है।
  • يُهْلِكَ: नष्ट कर दे, विनष्ट कर दे।
  • مُلْكُ: राज्य, बादशाहत, स्वामित्व।
  • قَدِيرٌ: सर्वशक्तिमान, हर चीज़ पर पूर्ण सामर्थ्य रखने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला ने उन ईसाइयों के कुफ्र (अविश्वास) को स्पष्ट रूप से उजागर किया है जो कहते हैं कि अल्लाह स्वयं मसीह (ईसा अलैहिस्सलाम) हैं। यह एक बहुत बड़ी भूल और गुमराही है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हे नबी! इन लोगों से कहो कि अगर मसीह वास्तव में ईश्वर होते, तो क्या वे अल्लाह की इच्छा को रोक सकते थे? यदि अल्लाह चाहे कि मसीह इब्ने मरयम को, उनकी माँ को और धरती के सभी लोगों को नष्ट कर दे, तो कौन है जो उसे रोक सके?

यह एक स्पष्ट तर्क है — मरयम (अलैहिस्सलाम) की मृत्यु हो चुकी है, और मसीह (अलैहिस्सलाम) भी मृत्यु का स्वाद चखेंगे। यदि वे ईश्वर होते, तो क्या वे अपनी माँ को मृत्यु से बचा सकते थे? क्या वे स्वयं को मृत्यु से बचा सकते हैं? निश्चित रूप से नहीं। यही इस बात का प्रमाण है कि वे अल्लाह के भक्त और पैग़म्बर थे, न कि स्वयं ईश्वर।

फिर अल्लाह तआला अपनी महानता और सत्ता का वर्णन करते हुए फ़रमाता है कि आसमानों और ज़मीन का और जो कुछ उनके बीच है — सब कुछ अल्लाह ही का है। वह जो चाहता है पैदा करता है। उसने ईसा (अलैहिस्सलाम) को बिना पिता के पैदा किया, हव्वा को बिना माँ के, और आदम को बिना माता-पिता के — यह सब उसकी कुदरत (शक्ति) के नमूने हैं। वह हर चीज़ पर पूर्ण सामर्थ्य रखता है।


दावती पहलू (प्रचारात्मक पहलू):

इस आयत में हमारे लिए एक बहुत बड़ी सीख है — अल्लाह की एकता (तौहीद) पर दृढ़ विश्वास रखें। किसी भी नबी, पैग़म्बर या संत को ईश्वर का दर्जा देना कुफ्र है। ईसा (अलैहिस्सलाम) अल्लाह के महान पैग़म्बर थे, उन्हें हम मुसलमान पूरे सम्मान के साथ मानते हैं, लेकिन वे अल्लाह की मख़लूक़ (सृष्टि) थे। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की कुदरत के आगे किसी की कोई हिम्मत नहीं चल सकती। जब अल्लाह कुछ चाहता है, तो कोई उसे रोक नहीं सकता। इसलिए हमें अपनी ज़िंदगी में हर मामले में अल्लाह पर भरोसा करना चाहिए और उसी की इबादत करनी चाहिए। यही सच्ची नजात (मुक्ति) का रास्ता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 15-19 — अल-माइदा

15يَا أَهْلَ الْكِتَابِ قَدْ جَاءَكُمْ رَسُولُنَا يُبَيِّنُ لَكُمْ كَثِيرًا مِّمَّا كُنتُمْ تُخْفُونَ مِنَ الْكِتَابِ وَيَعْفُو عَن كَثِيرٍ ۚ قَدْ جَاءَكُم مِّنَ اللَّهِ نُورٌ وَكِتَابٌ مُّبِينٌ
ऐ अहले किताब तुम्हारे पास हमारा पैगम्बर (मोहम्मद सल्ल) आ चुका जो किताबे ख़ुदा की उन बातों में से जिन्हें तुम छुपाया करते थे बहुतेरी तो साफ़ साफ़ बयान कर देगा और बहुतेरी से (अमदन) दरगुज़र करेगा तुम्हरे पास तो ख़ुदा की तरफ़ से एक (चमकता हुआ) नूर और साफ़ साफ़ बयान करने वाली किताब (कुरान) आ चुकी है
16يَهْدِي بِهِ اللَّهُ مَنِ اتَّبَعَ رِضْوَانَهُ سُبُلَ السَّلَامِ وَيُخْرِجُهُم مِّنَ الظُّلُمَاتِ إِلَى النُّورِ بِإِذْنِهِ وَيَهْدِيهِمْ إِلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ
जो लोग ख़ुदा की ख़ुशनूदी के पाबन्द हैं उनको तो उसके ज़रिए से राहे निजात की हिदायत करता है और अपने हुक्म से (कुफ़्र की) तारीकी से निकालकर (ईमान की) रौशनी में लाता है और राहे रास्त पर पहुंचा देता है
17لَّقَدْ كَفَرَ الَّذِينَ قَالُوا إِنَّ اللَّهَ هُوَ الْمَسِيحُ ابْنُ مَرْيَمَ ۚ قُلْ فَمَن يَمْلِكُ مِنَ اللَّهِ شَيْئًا إِنْ أَرَادَ أَن يُهْلِكَ الْمَسِيحَ ابْنَ مَرْيَمَ وَأُمَّهُ وَمَن فِي الْأَرْضِ جَمِيعًا ۗ وَلِلَّهِ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا ۚ يَخْلُقُ مَا يَشَاءُ ۚ وَاللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
जो लोग उसके क़ायल हैं कि मरियम के बेटे मसीह बस ख़ुदा हैं वह ज़रूर काफ़िर हो गए (ऐ रसूल) उनसे पूंछो तो कि भला अगर ख़ुदा मरियम के बेटे मसीह और उनकी मॉ को और जितने लोग ज़मीन में हैं सबको मार डालना चाहे तो कौन ऐसा है जिसका ख़ुदा से भी ज़ोर चले (और रोक दे) और सारे आसमान और ज़मीन में और जो कुछ भी उनके दरमियान में है सब ख़ुदा ही की सल्तनत है जो चाहता है पैदा करता है और ख़ुदा तो हर चीज़ पर क़ादिर है
18وَقَالَتِ الْيَهُودُ وَالنَّصَارَىٰ نَحْنُ أَبْنَاءُ اللَّهِ وَأَحِبَّاؤُهُ ۚ قُلْ فَلِمَ يُعَذِّبُكُم بِذُنُوبِكُم ۖ بَلْ أَنتُم بَشَرٌ مِّمَّنْ خَلَقَ ۚ يَغْفِرُ لِمَن يَشَاءُ وَيُعَذِّبُ مَن يَشَاءُ ۚ وَلِلَّهِ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا ۖ وَإِلَيْهِ الْمَصِيرُ
और नसरानी और यहूदी तो कहते हैं कि हम ही ख़ुदा के बेटे और उसके चहेते हैं (ऐ रसूल) उनसे तुम कह दो (कि अगर ऐसा है) तो फिर तुम्हें तुम्हारे गुनाहों की सज़ा क्यों देता है (तुम्हारा ख्याल लग़ो है) बल्कि तुम भी उसकी मख़लूक़ात से एक बशर हो ख़ुदा जिसे चाहेगा बख़ देगा और जिसको चाहेगा सज़ा देगा आसमान और ज़मीन और जो कुछ उन दोनों के दरमियान में है सब ख़ुदा ही का मुल्क है और सबको उसी की तरफ़ लौट कर जाना है
19يَا أَهْلَ الْكِتَابِ قَدْ جَاءَكُمْ رَسُولُنَا يُبَيِّنُ لَكُمْ عَلَىٰ فَتْرَةٍ مِّنَ الرُّسُلِ أَن تَقُولُوا مَا جَاءَنَا مِن بَشِيرٍ وَلَا نَذِيرٍ ۖ فَقَدْ جَاءَكُم بَشِيرٌ وَنَذِيرٌ ۗ وَاللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
ऐ अहले किताब जब पैग़म्बरों की आमद में बहुत रूकावट हुई तो हमारा रसूल तुम्हारे पास आया जो एहकामे ख़ुदा को साफ़ साफ़ बयान करता है ताकि तुम कहीं ये न कह बैठो कि हमारे पास तो न कोई ख़ुशख़बरी देने वाला (पैग़म्बर) आया न (अज़ाब से) डराने वाला अब तो (ये नहीं कह सकते क्योंकि) यक़ीनन तुम्हारे पास ख़ुशख़बरी देने वाला और डराने वाला पैग़म्बर आ गया और ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
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अनुवाद — अल-माइदा 17

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Tuesday, August 18, 2026

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