अल-माइदा · 15/120
अनुवाद उच्चारण — अल-माइदा
يَا أَهْلَ الْكِتَابِ قَدْ جَاءَكُمْ رَسُولُنَا يُبَيِّنُ لَكُمْ كَثِيرًا مِّمَّا كُنتُمْ تُخْفُونَ مِنَ الْكِتَابِ وَيَعْفُو عَن كَثِيرٍ ۚ قَدْ جَاءَكُم مِّنَ اللَّهِ نُورٌ وَكِتَابٌ مُّبِينٌ ۝١٥
yaaa Ahlal kitaabi qad jaaa`akum Rasoolunaa yubaiyinu lakum kaseeram mimmmaa kuntum tukhfoona minal Kitaabi wa ya`foo `an kaseer; qad jaaa`akum minal laahi noorunw wa Kitaabum Mubeen
📖 हिंदी अर्थ
ऐ अहले किताब तुम्हारे पास हमारा पैगम्बर (मोहम्मद सल्ल) आ चुका जो किताबे ख़ुदा की उन बातों में से जिन्हें तुम छुपाया करते थे बहुतेरी तो साफ़ साफ़ बयान कर देगा और बहुतेरी से (अमदन) दरगुज़र करेगा तुम्हरे पास तो ख़ुदा की तरफ़ से एक (चमकता हुआ) नूर और साफ़ साफ़ बयान करने वाली किताब (कुरान) आ चुकी है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يُبَيِّنُ لَكُمْ – तुम्हारे लिए स्पष्ट करता है
  • تُخْفُونَ – तुम छिपाते हो
  • يَعْفُو – क्षमा कर देता है, दरगुज़र करता है
  • نُورٌ – रोशनी, प्रकाश
  • كِتَابٌ مُبِينٌ – स्पष्ट और खुली हुई किताब

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ अह्ले-किताब (यहूदियों और ईसाइयों)! तुम्हारे पास हमारा रसूल (मुहम्मद ﷺ) आ चुका है, जो तुम्हें उन बहुत सी बातों को स्पष्ट करके बताता है जिन्हें तुम अपनी किताबों (तौरात और इंजील) में छिपाते रहे हो। तुमने अल्लाह की किताब में मौजूद उन सच्चाइयों को—जैसे रसूल ﷺ के आने की निशानियाँ, रज्म (पत्थर मारने) की आयत, और ईसा (अलैहिस्सलाम) द्वारा अहमद की खुशखबरी—जानबूझकर लोगों से छिपा रखा था। अब यह रसूल उन छिपी हुई बातों को उजागर कर रहा है, ताकि सच्चाई सामने आ जाए और लोगों पर कोई बहाना न रहे।

और वह (रसूल ﷺ) बहुत सी उन बातों से दरगुज़र भी करता है, यानी उन छिपाई गई चीज़ों में से जिनका खुलासा करने में कोई भलाई नहीं, बल्कि तुम्हारी रुसवाई ही होती, उन्हें वह छोड़ देता है और तुम्हें उन पर पकड़ नहीं करता। यह अल्लाह की रहमत और मेहरबानी है कि उसने अपने रसूल को नर्मी और हिकमत के साथ भेजा।

फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है: "तुम्हारे पास अल्लाह की ओर से नूर (रोशनी) और एक रौशन किताब आ चुकी है।" यह नूर खुद रसूल ﷺ हैं, जो अंधेरों से निकालकर रोशनी की तरफ ले जाते हैं, और यह किताब कुरआन है, जो हर उस चीज़ को स्पष्ट करती है जिसकी इंसान को दुनिया और आख़िरत में ज़रूरत है। यह किताब कोई साधारण किताब नहीं, बल्कि हिदायत, रहमत और इंसानियत के लिए पूर्ण जीवन-पद्धति है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला ने अपने रसूल ﷺ और कुरआन को इंसानियत के लिए रहमत बनाकर भेजा है। जो लोग सच्चाई को छिपाते थे, उनके लिए भी यह रसूल रहमत बनकर आया—वह उनकी ग़लतियों को बेनकाब करने के बजाय उन्हें सुधारने का मौका देता है। यह हमारे लिए सबक है कि हमें भी दूसरों के साथ नर्मी और हिकमत से पेश आना चाहिए, और सच्चाई को छिपाने के बजाय उसे स्पष्ट रूप से बयान करना चाहिए। कुरआन और रसूल ﷺ की मोहब्बत ही हमारी कामयाबी की कुंजी है—जो इसे थाम ले, वह कभी गुमराह नहीं हो सकता। यह नूर हर दिल को रोशन कर सकता है, बशर्ते हम इसे खुले दिल से क़बूल करें।

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📜 आयत 13-17 — अल-माइदा

13فَبِمَا نَقْضِهِم مِّيثَاقَهُمْ لَعَنَّاهُمْ وَجَعَلْنَا قُلُوبَهُمْ قَاسِيَةً ۖ يُحَرِّفُونَ الْكَلِمَ عَن مَّوَاضِعِهِ ۙ وَنَسُوا حَظًّا مِّمَّا ذُكِّرُوا بِهِ ۚ وَلَا تَزَالُ تَطَّلِعُ عَلَىٰ خَائِنَةٍ مِّنْهُمْ إِلَّا قَلِيلًا مِّنْهُمْ ۖ فَاعْفُ عَنْهُمْ وَاصْفَحْ ۚ إِنَّ اللَّهَ يُحِبُّ الْمُحْسِنِينَ
पस हमने उनकीे एहद शिकनी की वजह से उनपर लानत की और उनके दिलों को (गोया) हमने ख़ुद सख्त बना दिया कि (हमारे) कलमात को उनके असली मायनों से बदल कर दूसरे मायनो में इस्तेमाल करते हैं और जिन जिन बातों की उन्हें नसीहत की गयी थी उनमें से एक बड़ा हिस्सा भुला बैठे और (ऐ रसूल) अब तो उनमें से चन्द आदमियों के सिवा एक न एक की ख्यानत पर बराबर मुत्तेला होते रहते हो तो तुम उन (के क़सूर) को माफ़ कर दो और (उनसे) दरगुज़र करो (क्योंकि) ख़ुदा एहसान करने वालों को ज़रूर दोस्त रखता है
14وَمِنَ الَّذِينَ قَالُوا إِنَّا نَصَارَىٰ أَخَذْنَا مِيثَاقَهُمْ فَنَسُوا حَظًّا مِّمَّا ذُكِّرُوا بِهِ فَأَغْرَيْنَا بَيْنَهُمُ الْعَدَاوَةَ وَالْبَغْضَاءَ إِلَىٰ يَوْمِ الْقِيَامَةِ ۚ وَسَوْفَ يُنَبِّئُهُمُ اللَّهُ بِمَا كَانُوا يَصْنَعُونَ
और जो लोग कहते हैं कि हम नसरानी हैं उनसे (भी) हमने ईमान का एहद (व पैमान) लिया था मगर जब जिन जिन बातों की उन्हें नसीहत की गयी थी उनमें से एक बड़ा हिस्सा (रिसालत) भुला बैठे तो हमने भी (उसकी सज़ा में) क़यामत तक उनमें बाहम अदावत व दुशमनी की बुनियाद डाल दी और ख़ुदा उन्हें बहुत जल्द (क़यामत के दिन) बता देगा कि वह क्या क्या करते थे
15يَا أَهْلَ الْكِتَابِ قَدْ جَاءَكُمْ رَسُولُنَا يُبَيِّنُ لَكُمْ كَثِيرًا مِّمَّا كُنتُمْ تُخْفُونَ مِنَ الْكِتَابِ وَيَعْفُو عَن كَثِيرٍ ۚ قَدْ جَاءَكُم مِّنَ اللَّهِ نُورٌ وَكِتَابٌ مُّبِينٌ
ऐ अहले किताब तुम्हारे पास हमारा पैगम्बर (मोहम्मद सल्ल) आ चुका जो किताबे ख़ुदा की उन बातों में से जिन्हें तुम छुपाया करते थे बहुतेरी तो साफ़ साफ़ बयान कर देगा और बहुतेरी से (अमदन) दरगुज़र करेगा तुम्हरे पास तो ख़ुदा की तरफ़ से एक (चमकता हुआ) नूर और साफ़ साफ़ बयान करने वाली किताब (कुरान) आ चुकी है
16يَهْدِي بِهِ اللَّهُ مَنِ اتَّبَعَ رِضْوَانَهُ سُبُلَ السَّلَامِ وَيُخْرِجُهُم مِّنَ الظُّلُمَاتِ إِلَى النُّورِ بِإِذْنِهِ وَيَهْدِيهِمْ إِلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ
जो लोग ख़ुदा की ख़ुशनूदी के पाबन्द हैं उनको तो उसके ज़रिए से राहे निजात की हिदायत करता है और अपने हुक्म से (कुफ़्र की) तारीकी से निकालकर (ईमान की) रौशनी में लाता है और राहे रास्त पर पहुंचा देता है
17لَّقَدْ كَفَرَ الَّذِينَ قَالُوا إِنَّ اللَّهَ هُوَ الْمَسِيحُ ابْنُ مَرْيَمَ ۚ قُلْ فَمَن يَمْلِكُ مِنَ اللَّهِ شَيْئًا إِنْ أَرَادَ أَن يُهْلِكَ الْمَسِيحَ ابْنَ مَرْيَمَ وَأُمَّهُ وَمَن فِي الْأَرْضِ جَمِيعًا ۗ وَلِلَّهِ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا ۚ يَخْلُقُ مَا يَشَاءُ ۚ وَاللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
जो लोग उसके क़ायल हैं कि मरियम के बेटे मसीह बस ख़ुदा हैं वह ज़रूर काफ़िर हो गए (ऐ रसूल) उनसे पूंछो तो कि भला अगर ख़ुदा मरियम के बेटे मसीह और उनकी मॉ को और जितने लोग ज़मीन में हैं सबको मार डालना चाहे तो कौन ऐसा है जिसका ख़ुदा से भी ज़ोर चले (और रोक दे) और सारे आसमान और ज़मीन में और जो कुछ भी उनके दरमियान में है सब ख़ुदा ही की सल्तनत है जो चाहता है पैदा करता है और ख़ुदा तो हर चीज़ पर क़ादिर है
अल-माइदाकुरान सूची
120आयत
मदनीRevelation
15आयत

अनुवाद — अल-माइदा 15

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सूरा आयत 15/120 — अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-माइदा सुनें, अल-माइदा अनुवाद, अल-माइदा mp3, अल-माइदा pdf. आयत 13–17. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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