Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَبْحَثُ (यब्हसु): खोदना, मिट्टी को खुरचना और उलटना।
- يُوَارِي (युवारी): छिपाना, ढकना, दफनाना।
- سَوْءَةَ (सौ'अत): शरीर का वह हिस्सा जिसे छिपाना ज़रूरी है, यहाँ मतलब लाश (मृत शरीर)।
- يَا وَيْلَتَا (या वैलता): हाय अफसोस! विपत्ति और पछतावे का वाक्य।
- أَعَجَزْتُ (अ'अज़्तु): क्या मैं असमर्थ हो गया?
- النَّادِمِينَ (अन-नादिमीन): पछतावा करने वाले, शर्मिंदा और दुखी लोग।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब क़ाबिल ने अपने भाई हाबिल को मार डाला, तो वह उसकी लाश को लेकर परेशान हो गया। उसे समझ नहीं आया कि इस शव का क्या करे? उसने लाश को ज़मीन पर छोड़ दिया। अल्लाह तआला ने अपनी रहमत और हिकमत से एक कौवा भेजा, जो ज़मीन खोदने लगा। वह एक मरे हुए कौवे को ज़मीन में दफनाने के लिए गड्ढा खोद रहा था। अल्लाह ने यह इसलिए किया ताकि क़ाबिल को सिखाया जाए कि इंसान की लाश को किस तरह दफनाया जाता है।
यह देखकर क़ाबिल को अपनी नादानी का एहसास हुआ और वह हैरान रह गया। उसने कहा: "हाय मेरा अफसोस! क्या मैं इस कौवे जितना भी अच्छा नहीं हो सकता कि अपने भाई की लाश को दफना देता?" यह कहकर उसने अपने भाई को दफना दिया। लेकिन यह पछतावा सिर्फ इस बात का था कि उसने भाई की लाश को सही तरीके से छिपाया नहीं था, या उसे अपने माता-पिता के गुस्से और अल्लाह की नाराज़गी का डर था। वह हत्या करने पर पछतावा नहीं कर रहा था, बल्कि अपनी भूल और बुरे अंजाम पर शर्मिंदा था। इस तरह वह पछतावा करने वालों में से हो गया, लेकिन यह पछतावा उसके लिए माफी का ज़रिया नहीं बना, क्योंकि उसकी हत्या बहुत बड़ा गुनाह थी।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
इस घटना से हमें कई अहम सबक मिलते हैं। पहला यह कि अल्लाह तआला अपने बंदों को सिखाने के लिए छोटे से छोटे ज़रिये का इस्तेमाल कर सकता है — एक कौवे के ज़रिए उसने इंसान को दफनाने का तरीका सिखाया। यह अल्लाह की रहमत है कि वह हमें गलतियों से निकालकर सही रास्ता दिखाता है। दूसरा सबक यह कि इंसान को अपने गुनाहों पर तुरंत पछतावा करके अल्लाह से माफी मांगनी चाहिए, लेकिन सच्चा पछतावा वही है जो इंसान को गुनाह छोड़ने और अच्छे कामों की तरफ ले जाए। तीसरा सबक यह कि हमें अपने गुस्से और ईर्ष्या पर काबू रखना चाहिए, क्योंकि क़ाबिल की ईर्ष्या ही उसके पतन का कारण बनी। इस्लाम हमें सिखाता है कि भाईचारा, माफी और नेकी के रास्ते पर चलना ही सच्ची कामयाबी है। अल्लाह हमें हिदायत दे और हमें नेक रास्ते पर चलाए। आमीन।
📜 आयत 29-33 — सूरा अल-माइदा
अनुवाद — अल-माइदा 31
सूरा अल-माइदा आयत 31 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (तब उसे फ़िक्र हुई कि लाश को क्या करे) तो…सूरा आयत 31/120 — सूरा अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-माइदा सुनें, सूरा अल-माइदा अनुवाद, सूरा अल-माइदा mp3, सूरा अल-माइदा pdf. आयत 29–33. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-माइदा
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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