Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَطَوَّعَتْ لَهُ نَفْسُهُ: उसके नफ्स (अहंकार/बुरी प्रवृत्ति) ने उसे प्रोत्साहित किया और उसके लिए इस काम को आसान और आकर्षक बना दिया।
- قَتْلَ أَخِيهِ: अपने भाई की हत्या करना।
- فَقَتَلَهُ: फिर उसने उसे मार डाला।
- فَأَصْبَحَ مِنَ الْخَاسِرِينَ: तो वह घाटे में रहने वालों में से हो गया।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत हमें क़ाबिल और हाबिल (आदम अलैहिस्सलाम के दो बेटों) की उस दुखद घटना से अवगत कराती है, जो मानव इतिहास की पहली हत्या थी। जब हाबिल की कुर्बानी अल्लाह ने क़बूल कर ली और क़ाबिल की कुर्बानी इसलिए क़बूल नहीं हुई क्योंकि उसका इरादा ख़ालिस नहीं था, तो क़ाबिल के दिल में ईर्ष्या और जलन की आग भड़क उठी।
उसकी बुरी प्रवृत्ति (नफ्स-ए-अम्मारा) ने उसे धीरे-धीरे यह समझाना शुरू किया कि अपने भाई को रास्ते से हटा देना ही सही रास्ता है। शैतान ने उसके नफ्स के ज़रिए उसके दिल में यह बात डाली कि यही तुम्हारी भलाई के लिए है। उसके नफ्स ने उसके लिए भाई की हत्या को इतना आसान और सुंदर बना दिया कि उसे इसमें कोई बुराई नज़र नहीं आई।
आख़िरकार उसने अपने भाई हाबिल को मार ही डाला। लेकिन इस हत्या के बाद उसे क्या मिला? कुछ भी नहीं, बल्कि वह दुनिया और आख़िरत दोनों में घाटे में रहा। दुनिया में उसे पछतावे, दुख और अल्लाह की नाराज़गी मिली, और आख़िरत में उसे कठोर यातना का सामना करना पड़ेगा। वह अपने दीन (धर्म) और दुनिया दोनों में नुक़सान उठाने वाला बन गया।
यह आयत हमें सिखाती है कि जब इंसान अपने नफ्स की बात मान लेता है और अल्लाह की नाराज़गी की परवाह नहीं करता, तो वह ऐसे काम कर बैठता है जिनका अंजाम सिर्फ़ नुक़सान और पछतावा होता है। नफ्स की बुरी प्रवृत्ति इंसान को धोखा देती है, लेकिन अल्लाह का डर और सब्र ही इंसान को इस धोखे से बचाता है।
दावती पहलू:
प्यारे भाइयों और बहनों! यह क़िस्सा हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है। देखिए, क़ाबिल ने अपने भाई को सिर्फ़ इसलिए मार डाला क्योंकि उसे ईर्ष्या आ गई थी। आज भी दुनिया में कितने लोग ईर्ष्या, लालच और ग़ुस्से की वजह से एक-दूसरे को नुक़सान पहुँचाते हैं। लेकिन इस्लाम हमें सिखाता है कि हम अपने नफ्स पर क़ाबू रखें, अल्लाह से डरें और दूसरों के साथ भलाई करें। अगर हम अपने नफ्स की बात मान लेंगे, तो अंजाम वही होगा जो क़ाबिल का हुआ — घाटा और पछतावा। लेकिन अगर हम अल्लाह की राह पर चलेंगे, तो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी मिलेगी। अल्लाह हमें अपने नफ्स के शर से बचाए और हमें सब्र और नेकी की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 28-32 — सूरा अल-माइदा
अनुवाद — अल-माइदा 30
सूरा अल-माइदा आयत 30 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर तो उसके नफ्स ने अपने भाई के क़त्ल पर…सूरा आयत 30/120 — सूरा अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-माइदा सुनें, सूरा अल-माइदा अनुवाद, सूरा अल-माइदा mp3, सूरा अल-माइदा pdf. आयत 28–32. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-माइदा
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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