Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- هُزُوًا: मज़ाक़, उपहास
- لَعِبًا: खेल-तमाशा, मज़ाक़
- أَوْلِيَاءَ: मित्र, सहायक, संरक्षक
- اتَّقُوا اللَّهَ: अल्लाह से डरो, उसकी अवज्ञा से बचो
व्याख्या:
हे ईमान वालो! जिन लोगों ने तुम्हारे धर्म को मज़ाक़ और खेल बना रखा है—चाहे वे अहले-किताब (यहूदी और ईसाई) हों जो तुमसे पहले किताब दिए गए थे, या अन्य काफ़िर हों—उन्हें अपना मित्र और संरक्षक मत बनाओ। यह आयत उन मुसलमानों के बारे में उतरी जो कुछ मुनाफ़िक़ों (दिखावटी मुसलमानों) से दोस्ती रखते थे, जिन्होंने बाहर से इस्लाम क़बूल किया था लेकिन अंदर से दुश्मन थे और धर्म का मज़ाक़ उड़ाते थे। अल्लाह तआला मुसलमानों को सख़्त तौर पर मना कर रहे हैं कि ऐसे लोगों से कभी दोस्ती न करो, क्योंकि यह तुम्हारे ईमान के ख़िलाफ़ है।
फिर अल्लाह फ़रमाता है: "और अल्लाह से डरो अगर तुम सच्चे मोमिन हो।" यानी अगर तुम्हें अपने ईमान पर भरोसा है और तुम सच्चे दिल से अल्लाह पर ईमान रखते हो, तो उसके हुक्मों का पालन करो और उन लोगों से दोस्ती से बचो जो अल्लाह के धर्म का मज़ाक़ उड़ाते हैं। सच्चा ईमान इसी का तक़ाज़ा है कि इंसान अल्लाह के दुश्मनों से दोस्ती न करे।
फ़ायदे:
- इस आयत से हमें सीख मिलती है कि मुसलमान को अपनी पहचान और अपने धर्म की इज़्ज़त का ख़याल रखना चाहिए। जो लोग हमारे धर्म का मज़ाक़ उड़ाएँ, उनसे दोस्ती रखना ईमान के ख़िलाफ़ है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि दोस्ती और मुहब्बत में धार्मिक पहचान को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। हमारे दोस्त वही होने चाहिए जो हमारे धर्म और हमारी इज़्ज़त का सम्मान करें।
- अल्लाह तआला ने इस आयत में ईमान को तक़वा (अल्लाह का डर) से जोड़ा है, यानी सच्चा ईमान सिर्फ़ ज़ुबान से नहीं, बल्कि अमल से होता है। जो इंसान अल्लाह से डरता है, वह उसकी नफ़रमानी से बचता है।
- इस आयत में मुसलमानों को यह भी सिखाया गया है कि वे अपने धर्म की रक्षा करें और उसे किसी के मज़ाक़ का निशाना न बनने दें। धर्म की इज़्ज़त हर मुसलमान की ज़िम्मेदारी है।
- यह आयत हमें यह भी बताती है कि इस्लाम दूसरों के साथ अच्छे संबंध रखने से मना नहीं करता, लेकिन जहाँ धर्म का मज़ाक़ उड़ाया जाए, वहाँ दोस्ती नहीं हो सकती। यह हमारे लिए एक स्पष्ट नीति है कि हम अपने धर्म की इज़्ज़त को किसी भी हालत में कम न होने दें।
📜 आयत 55-59 — सूरा अल-माइदा
अनुवाद — अल-माइदा 57
सूरा अल-माइदा आयत 57 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ ईमानदारों जिन लोगों (यहूद व नसारा) को तुम से…सूरा आयत 57/120 — सूरा अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-माइदा सुनें, सूरा अल-माइदा अनुवाद, सूरा अल-माइदा mp3, सूरा अल-माइदा pdf. आयत 55–59. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-माइदा
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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