Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- نَادَيْتُمْ (नादैतुम): तुमने पुकारा, अर्थात अज़ान दी।
- اتَّخَذُوهَا (इत्तख़ज़ूहा): उसे बना लिया, अपना लिया।
- هُزُوًا (हुज़ुवन): मज़ाक, उपहास।
- لَعِبًا (ल'अबन): खेल-तमाशा।
- لَا يَعْقِلُونَ (ला य'क़िलून): वे समझ-बूझ नहीं रखते, अक़्ल से काम नहीं लेते।
तफ़सीर (व्याख्या):
हे ईमानवालों! जब तुम अज़ान देकर लोगों को नमाज़ की ओर बुलाते हो—जो इस्लाम का सबसे बड़ा शिआर (प्रतीक) और अल्लाह की इबादत का सर्वोच्च रूप है—तो यहूदी, ईसाई और मुशरिकीन (बहुदेववादी) उस अज़ान और नमाज़ को मज़ाक और खेल-तमाशा बना लेते हैं। वे तुम्हारी पुकार पर हँसते हैं, उसका उपहास करते हैं और उसे बेकार समझते हैं। यह उनका यह कृत्य इसलिए है क्योंकि वे ऐसे लोग हैं जो अक़्ल और समझ से काम नहीं लेते। यदि वे थोड़ी-सी भी समझ रखते, तो जान लेते कि नमाज़ अल्लाह और बंदे के बीच का रिश्ता है, और अज़ान सच्चाई की ओर बुलाने वाली आवाज़ है। उनकी नासमझी और अज्ञानता ही उन्हें इस पवित्र क्रिया का मज़ाक उड़ाने पर उकसाती है। वे अल्लाह की इबादत की असली हक़ीक़त और उसके दीन की श्रेष्ठता को नहीं समझते, इसलिए उसका उपहास करते हैं।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- अज़ान और नमाज़ इस्लाम के महान प्रतीक हैं, और इन्हें हँसी-मज़ाक की नज़र से देखना अज्ञानता और मूर्खता की निशानी है।
- एक सच्चे मुसलमान को चाहिए कि वह अज़ान की पुकार का सम्मान करे और उस पर तुरंत लब्बैक (उत्तर) कहे, क्योंकि यह दुनिया की सबसे बेहतरीन पुकार है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि जब दुनिया वाले हमारे दीन का मज़ाक उड़ाएँ, तो हमें अपने ईमान और इबादत पर दृढ़ रहना चाहिए, क्योंकि उनका उपहास उनकी नासमझी की दलील है, हमारे दीन की कमी नहीं।
- अक़्लमंद वही है जो अल्लाह की इबादत की अहमियत को समझे और उसे अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाए; जो लोग इसे हल्का समझते हैं, वे असल में खुद को ही नुक़सान पहुँचाते हैं।
- यह आयत मुसलमानों को तसल्ली देती है कि दुश्मनों की हँसी और मज़ाक के बावजूद, सच्चाई और अल्लाह का दीन ही बुलंद रहेगा, और उनका उपहास उन्हीं पर लौटकर आएगा।
📜 आयत 56-60 — सूरा अल-माइदा
अनुवाद — अल-माइदा 58
सूरा अल-माइदा आयत 58 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (उनकी शरारत यहॉ तक पहुंची) कि जब तुम (अज़ान…सूरा आयत 58/120 — सूरा अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-माइदा सुनें, सूरा अल-माइदा अनुवाद, सूरा अल-माइदा mp3, सूरा अल-माइदा pdf. आयत 56–60. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-माइदा
पवित्र क़ुरआन
Sunday, October 11, 2026
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