अल-माइदा · 60/120
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-माइदा
قُلْ هَلْ أُنَبِّئُكُم بِشَرٍّ مِّن ذَٰلِكَ مَثُوبَةً عِندَ اللَّهِ ۚ مَن لَّعَنَهُ اللَّهُ وَغَضِبَ عَلَيْهِ وَجَعَلَ مِنْهُمُ الْقِرَدَةَ وَالْخَنَازِيرَ وَعَبَدَ الطَّاغُوتَ ۚ أُولَٰئِكَ شَرٌّ مَّكَانًا وَأَضَلُّ عَن سَوَاءِ السَّبِيلِ ۝٦٠
Qul hal unabbi`ukum bisharrim min zaalika masoobatan `indal laah; malla`ana hul laahu wa ghadiba `alaihi wa ja`ala minhumul qiradata wal khanaazeera wa `abadat Taaghoot; ulaaa`ika sharrum makaananw wa adallu `an Sawaaa`is Sabeel
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं तुम्हें ख़ुदा के नज़दीक सज़ा में इससे कहीं बदतर ऐब बता दूं (अच्छा लो सुनो) जिसपर ख़ुदा ने लानत की हो और उस पर ग़ज़ब ढाया हो और उनमें से किसी को (मसख़ करके) बन्दर और (किसी को) सूअर बना दिया हो और (ख़ुदा को छोड़कर) शैतान की परस्तिश की हो पस ये लोग दरजे में कहीं बदतर और राहे रास्त से भटक के सबसे ज्यादा दूर जा पहुंचे हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • مَثُوبَةً: बदला, प्रतिफल (यहाँ इसका प्रयोग दण्ड के अर्थ में हुआ है)
  • لَعَنَهُ: उसे अपनी रहमत से दूर कर दिया
  • الْقِرَدَةَ: बंदर
  • الْخَنَازِيرَ: सूअर
  • الطَّاغُوتَ: हर वह चीज़ जिसे अल्लाह के सिवा पूजा जाए और वह इस पर राज़ी हो
  • سَوَاءِ السَّبِيلِ: सीधा रास्ता, सत्य का मार्ग

तफ़सीर:

ऐ नबी! आप इन मुशरिकों और काफ़िरों से कहिए: "क्या मैं तुम्हें उन लोगों के बारे में बताऊँ जिनका बदला अल्लाह के यहाँ उन लोगों से भी बुरा है जिन्हें तुम बुरा कह रहे हो?" दरअसल यह आयत उन यहूदियों और काफ़िरों के जवाब में उतरी जो मुसलमानों से कहते थे कि हम तुम्हारे दीन से बुरा कोई दीन नहीं जानते। अल्लाह ने फ़रमाया कि तुम्हें बताऊँ कि अल्लाह के यहाँ सबसे बुरा बदला किसका है?

वह लोग हैं जिन्हें अल्लाह ने अपनी रहमत से दूर कर दिया और उन पर अपना ग़ज़ब नाज़िल किया। ये वही लोग हैं जिनमें से कुछ को अल्लाह ने बंदर और सूअर की शक्ल में बदल दिया — यानी हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) के ज़माने में सब्त (शनिवार) के उल्लंघन करने वालों को बंदर बना दिया गया, और हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) की दावत को झुठलाने वालों में से कुछ को सूअर की शक्ल दे दी गई। यह उनकी नाफ़रमानी, झूठ और घमंड की सज़ा थी। इसके अलावा उनमें ऐसे लोग भी थे जो ताग़ूत (शैतान और उसके साथियों) की इबादत करते थे और उसके हुक्म मानते थे।

ये सारे लोग क़यामत के दिन सबसे बुरे दर्जे पर होंगे, उनका ठिकाना जहन्नम की आग होगी, और दुनिया में भी वे सीधे रास्ते से सबसे ज़्यादा भटके हुए थे। जब यह आयत उतरी तो मुसलमानों ने यहूदियों से कहा: "ऐ बंदरों और सूअरों के भाइयों!" यह सुनकर वे शर्म से अपने सिर झुका लेते थे।

फ़ायदे:

  1. अल्लाह की रहमत से दूर होना और उसका ग़ज़ब किसी भी मुसीबत से बड़ा है — यह सबसे बड़ी सज़ा है।
  2. नाफ़रमानी और हक़ को झुठलाने के अंजाम बहुत भयानक होते हैं, अल्लाह की पकड़ कभी भी आ सकती है।
  3. अल्लाह के दीन को बुरा कहने वालों का अंजाम यही है कि अल्लाह उन्हें रुसवा कर देता है।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपने आपको अल्लाह की नाफ़रमानी से बचाना चाहिए और उसके हुक्मों का पालन करना चाहिए, क्योंकि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है।
  5. इस्लाम ही वह सीधा रास्ता है जो इंसान को दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देता है, और इसके अलावा हर रास्ता गुमराही है।


📜 आयत 58-62 — सूरा अल-माइदा

58وَإِذَا نَادَيْتُمْ إِلَى الصَّلَاةِ اتَّخَذُوهَا هُزُوًا وَلَعِبًا ۚ ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ قَوْمٌ لَّا يَعْقِلُونَ
और (उनकी शरारत यहॉ तक पहुंची) कि जब तुम (अज़ान देकर) नमाज़ के वास्ते (लोगों को) बुलाते हो ये लोग नमाज़ को हॅसी खेल बनाते हैं ये इस वजह से कि (लोग बिल्कुल बे अक्ल हैं) और कुछ नहीं समझते
59قُلْ يَا أَهْلَ الْكِتَابِ هَلْ تَنقِمُونَ مِنَّا إِلَّا أَنْ آمَنَّا بِاللَّهِ وَمَا أُنزِلَ إِلَيْنَا وَمَا أُنزِلَ مِن قَبْلُ وَأَنَّ أَكْثَرَكُمْ فَاسِقُونَ
(ऐ रसूल अहले किताब से कहो कि) आख़िर तुम हमसे इसके सिवा और क्या ऐब लगा सकते हो कि हम ख़ुदा पर और जो (किताब) हमारे पास भेजी गयी है और जो हमसे पहले भेजी गयी ईमान लाए हैं और ये तुममें के अक्सर बदकार हैं
60قُلْ هَلْ أُنَبِّئُكُم بِشَرٍّ مِّن ذَٰلِكَ مَثُوبَةً عِندَ اللَّهِ ۚ مَن لَّعَنَهُ اللَّهُ وَغَضِبَ عَلَيْهِ وَجَعَلَ مِنْهُمُ الْقِرَدَةَ وَالْخَنَازِيرَ وَعَبَدَ الطَّاغُوتَ ۚ أُولَٰئِكَ شَرٌّ مَّكَانًا وَأَضَلُّ عَن سَوَاءِ السَّبِيلِ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं तुम्हें ख़ुदा के नज़दीक सज़ा में इससे कहीं बदतर ऐब बता दूं (अच्छा लो सुनो) जिसपर ख़ुदा ने लानत की हो और उस पर ग़ज़ब ढाया हो और उनमें से किसी को (मसख़ करके) बन्दर और (किसी को) सूअर बना दिया हो और (ख़ुदा को छोड़कर) शैतान की परस्तिश की हो पस ये लोग दरजे में कहीं बदतर और राहे रास्त से भटक के सबसे ज्यादा दूर जा पहुंचे हैं
61وَإِذَا جَاءُوكُمْ قَالُوا آمَنَّا وَقَد دَّخَلُوا بِالْكُفْرِ وَهُمْ قَدْ خَرَجُوا بِهِ ۚ وَاللَّهُ أَعْلَمُ بِمَا كَانُوا يَكْتُمُونَ
और (मुसलमानों) जब ये लोग तुम्हारे पास आ जाते हैं तो कहते हैं कि हम तो ईमान लाए हैं हालॉकि वह कुफ़्र ही को साथ लेकर आए और फिर निकले भी तो साथ लिए हुए और जो नेफ़ाक़ वह छुपाए हुए थे ख़ुदा उसे ख़ूब जानता है
62وَتَرَىٰ كَثِيرًا مِّنْهُمْ يُسَارِعُونَ فِي الْإِثْمِ وَالْعُدْوَانِ وَأَكْلِهِمُ السُّحْتَ ۚ لَبِئْسَ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
(ऐ रसूल) तुम उनमें से बहुतेरों को देखोगे कि गुनाह और सरकशी और हरामख़ोरी की तरफ़ दौड़ पड़ते हैं जो काम ये लोग करते थे वह यक़ीनन बहुत बुरा है
अल-माइदाकुरान सूची
120आयत
मदनीअवतरण स्थान
60आयत

अनुवाद — अल-माइदा 60

सूरा अल-माइदा आयत 60 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं तुम्हें ख़ुदा के…

सूरा आयत 60/120 — सूरा अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-माइदा सुनें, सूरा अल-माइदा अनुवाद, सूरा अल-माइदा mp3, सूरा अल-माइदा pdf. आयत 58–62. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Thursday, October 1, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए