Wa izaa jaaa`ookum qaalooo aamannaa wa qad dakhaloo bilkufri wa hum qad kharajoo bih; wallaahu a`lamu bimaa kaanoo yaktumoon
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
और (मुसलमानों) जब ये लोग तुम्हारे पास आ जाते हैं तो कहते हैं कि हम तो ईमान लाए हैं हालॉकि वह कुफ़्र ही को साथ लेकर आए और फिर निकले भी तो साथ लिए हुए और जो नेफ़ाक़ वह छुपाए हुए थे ख़ुदा उसे ख़ूब जानता है
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اور جب یہ لوگ تمہارے پاس آتے ہیں تو کہتے ہیں کہ ہم ایمان لے آئے حالانکہ کفر لے کر آتے ہیں اور اسی کو لیکر جاتے ہیں اور جن باتوں کو یہ مخفی رکھتے ہیں خدا ان کو خوب جانتا ہے
और (मुसलमानों) जब ये लोग तुम्हारे पास आ जाते हैं तो कहते हैं कि हम तो ईमान लाए हैं हालॉकि वह कुफ़्र ही को साथ लेकर आए और फिर निकले भी तो साथ लिए हुए और जो नेफ़ाक़ वह छुपाए हुए थे ख़ुदा उसे ख़ूब जानता है
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
دَخَلُوا بِالْكُفْرِ: वे कुफ्र (अविश्वास) की हालत में (आपके पास) आए।
خَرَجُوا بِهِ: वे उसी कुफ्र के साथ (आपके पास से) निकले।
يَكْتُمُونَ: वे छिपाते थे (अपने दिलों में जो कुफ्र और निफ़ाक़ छिपाते थे)।
तफ़सीर (व्याख्या):
हे ईमान वालों! जब ये मुनाफ़िक़ीन (दिखावटी मुसलमान) तुम्हारे पास आते हैं, तो वे अपनी ज़ुबान से कहते हैं: "हम ईमान लाए" — यानी हमने तुम्हारे दीन को क़बूल कर लिया और तुम्हारी तस्दीक़ की। लेकिन हक़ीक़त यह है कि वे जिस हालत में तुम्हारे पास आते हैं और जिस हालत में तुम्हारे पास से निकलते हैं, दोनों ही सूरतों में वे कुफ्र में डूबे होते हैं। उनका यह दावा सिर्फ़ ज़ुबानी है, दिल से वे कुफ्र पर क़ायम रहते हैं। उनका आना-जाना, बैठना-उठना, सब कुफ्र की हालत में होता है। अल्लाह तआला उनके दिलों के हाल से पूरी तरह वाक़िफ़ है, और वह उन छिपे हुए राज़ों को भी जानता है जिन्हें वे अपने सीनों में छिपाते हैं। वे ज़बान से ईमान का इज़हार करते हैं, लेकिन उनके दिल कुफ्र और निफ़ाक़ से भरे होते हैं। अल्लाह उनके इस निफ़ाक़ को अच्छी तरह जानता है और वह उन्हें उनके किए की सज़ा ज़रूर देगा।
फ़ायदे (सबक़):
निफ़ाक़ की पहचान: यह आयत हमें सिखाती है कि निफ़ाक़ (दिखावटा) सबसे बड़ी बीमारी है — इंसान ज़ुबान से ईमान का दावा करे लेकिन दिल से कुफ्र और इनकार पर हो। मुसलमान को चाहिए कि वह अपने दिल और ज़ुबान को एक जैसा रखे।
अल्लाह की निगरानी: अल्लाह तआला हर दिल के राज़ से वाक़िफ़ है। कोई भी इंसान अपने दिल की बात अल्लाह से नहीं छिपा सकता। यह एहसास इंसान को सच्चाई और ईमानदारी की तरफ़ ले जाता है।
सच्चाई की पैरवी: मुसलमान को चाहिए कि वह हर हाल में सच्चा हो — सच्चा ईमान, सच्ची ज़ुबान और सच्चा अमल। अल्लाह सच्चों के साथ है और उन्हें कामयाबी देता है।
दिखावे से बचाव: यह आयत हमें दिखावे (रिया) से बचाती है और सिखाती है कि अल्लाह की नज़र में सिर्फ़ वही अमल क़बूल है जो ख़ालिस नीयत से किया जाए।
अल्लाह का इंसाफ़: अल्लाह तआला हर किसी को उसके छिपे और खुले अमल का पूरा-पूरा बदला देगा। यह हमें यक़ीन दिलाता है कि अल्लाह की अदालत में कोई ज़ालिम बच नहीं सकता और कोई नेक इंसान महरूम नहीं रहेगा।
(ऐ रसूल अहले किताब से कहो कि) आख़िर तुम हमसे इसके सिवा और क्या ऐब लगा सकते हो कि हम ख़ुदा पर और जो (किताब) हमारे पास भेजी गयी है और जो हमसे पहले भेजी गयी ईमान लाए हैं और ये तुममें के अक्सर बदकार हैं
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं तुम्हें ख़ुदा के नज़दीक सज़ा में इससे कहीं बदतर ऐब बता दूं (अच्छा लो सुनो) जिसपर ख़ुदा ने लानत की हो और उस पर ग़ज़ब ढाया हो और उनमें से किसी को (मसख़ करके) बन्दर और (किसी को) सूअर बना दिया हो और (ख़ुदा को छोड़कर) शैतान की परस्तिश की हो पस ये लोग दरजे में कहीं बदतर और राहे रास्त से भटक के सबसे ज्यादा दूर जा पहुंचे हैं
और (मुसलमानों) जब ये लोग तुम्हारे पास आ जाते हैं तो कहते हैं कि हम तो ईमान लाए हैं हालॉकि वह कुफ़्र ही को साथ लेकर आए और फिर निकले भी तो साथ लिए हुए और जो नेफ़ाक़ वह छुपाए हुए थे ख़ुदा उसे ख़ूब जानता है
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